बन गयी सत्यम की दुल्हन

मैं चन्द्रप्रकाश भोपाल में पढ़ने के लिए गया था और कमरा लेकर अकेला रहता था. सत्यम से गांड मरवाकर मैं कमरे पर आया. अंदर घुसते ही मैंने दरवाजा बंद कर लिया. अपने सारे कपड़े उतार दिए. खुद को ऊपर से नीचे देखा. मेरे निप्पल लाल सुर्ख हो गये थे. मैंने कांच लेकर गांड के पीछे किया तो कूल्हों पर दांत के निशान ही निशान. सत्यम ने खूब काटा था मेरी गांड पर. मैंने उंगली गांड के छेद पर रखी, मीठा मीठा दर्द हुआ.

मैं आँख बंद करके खुद को पुकारने लगा- चंदा चंदा.
मुझे बहुत अच्छा लगा. मैंने दोनों हाथों से अपने निप्पल मसलना शुरू कर दिया. मेरे धीमी धीमी सिसकियों के बीच मेरी आवाज भी आने लगी- सत्यम. मेरे पति. मुझे ले चलो यहाँ से. मैं कैसे रहूंगी यहाँ पर.

मुझे इस बात पर आश्चर्य हुआ कि आज मेरा लंड लटका हुआ था. वह खड़ा नहीं हुआ. पहले जरा सी सेक्स सम्बन्धी बात पर झटके देने लगता था. मैंने कूल्हों पर हाथ फिराया. अब यही मेरी मस्ती के आधार है. अब मुझे मेरे लंड की नहीं दूसरों के लंड की जरूरत है. काश मेरे लंड की जगह चूत उग जाये.

मैंने थैली में से वो चीजें निकालीं जो मुझे सत्यम ने दी थीं. लिपस्टिक खोलकर मैंने अपने होंठ रंग लिए, बिंदी लगा ली, पावडर चेहरे पर मल लिया. काजल मुझे ठीक से लगाना नहीं आया. मैंने ब्रा और पेंटी पहन ली. अपने तकिये का एक कोना ब्लेड से काटकर उसमें से रुई निकालकर ब्रा में भर लिया. मैंने अपने सीने पर दो बोबे उगा लिए और धीरे धीरे दबाने लगा. मैं दिन भर उन्हीं कपड़ों में रहा. रात को वैसे ही सो गया. सपने में भी सत्यम ही आये.

जैसे तैसे रात कटी.

सुबह उठकर मैंने अपने आपको ठीक किया. मेरा कमरा चौथी मंजिल पर था. मैं गैलरी में खड़ा होकर मंजन करने लगा. जैसे ही मेरी निगाहें नीचे गईं तो मैंने देखा सामने पान की दूकान पर सत्यम खड़े थे और वे ऊपर ही देख रहे थे. हमारी निगाह मिलते ही उन्होंने मुझे हाथ का इशारा किया और कुछ बोले. मैं इतनी ऊपर था कि मुझे कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था.

अब मैं क्या करूं?

तभी मुझे आइडिया आया. मैंने अपने कंधे पर रखे टॉवल को नीचे गिरा दिया. वो हवा में लहराता लहराता सड़क पर दुकान के कुछ आगे जाकर गिर गया. सत्यम ने उसे उठाया और मुझे इशारा किया.
मैं तेजी से नीचे आया. सत्यम के हाथों से टॉवल लिया. दोनों ने एक दूसरे को देखा. बातचीत प्रारम्भ हुई- कैसी हो चंदा; मेरी चंदा?
मैं- मैं ठीक हूँ. रात भर आपको याद करता रहा.
सत्यम- एक बात मानोगी चंदा? मुझसे बात करते वक्त तुम लड़की की तरह बोलो ना प्लीज?
मैं- जी ठीक है.

सत्यम- चंदा! मैं रविवार का रास्ता नहीं देख पाऊंगा. आप अभी चलो.
मैं- सुनिए ! आप भी मेरी एक बात मानिए. आप मुझे आप मत कहिये. आप मुझे तू कहिये.
सत्यम- ठीक है. तू चल ना अभी मेरे साथ.
मैं- मैं भी नहीं रह पाऊँगी इतने दिन अब आपके बिना. आप चलिए मैं थोड़ी देर में आती हूँ. मुझे खाना भी बनाना है. भोजन करके आती हूँ दस बजे तक!
सत्यम- भोजन बाहर करेंगे. तू जल्दी आ जा.
मैं- ठीक है मैं नहाकर आती हूँ.

सत्यम ने मेरे हाथों को पकड़ा और जोर से दबाया. उनकी आँखें भीगी हुई थीं. वो अपनी बीवी को बहुत मिस कर रहे थे.

मैंने जल्दी से स्नान किया. सत्यम की दी हुई सारी वस्तुएं थैली में भरी और आधे घंटे में मैं सत्यम के घर पहुँच गया.

सत्यम ने मुझे अपने सीने से लिपटा लिया और किस करने लगे. वो फिर रोने लगे. रोते रोते बोले- चंदा. अब मुझे छोड़कर मत जाना प्लीज. फिर मुझे अलग करके बोले- तू बैठ. मैं कुछ खाने को लेकर आता हूँ. मेरा जवाब सुनने के पहले ही सत्यम निकल गये.

मैंने दरवाजा बंद किया, थैली में से सारी चीजें निकालीं, अपना मेकअप किया. आज काजल थोड़ा ठीक लग गया था. ब्रा पहनी, रुई से बोबे बनाये और सलवार कुर्ती पहन ली. कांच में देखा तो मैं एकदम लड़की लग रही थी. मैंने खुद को ही आँख मारी और हवाई किस दिया.

सत्यम को आने में चालीस मिनट लग गये. दरवाजा खोलकर मैं दरवाजे के पीछे छिप गया. उन्होंने दरवाजा बंद किया और मुझे देखते ही रह गये. अपने हाथ से दुपट्टे का पल्लू बनाकर मेरे सिर पर रखा. मैंने आँखें बंद कर ली. उन्होंने मेरी ठोड़ी पकड़कर चेहरा ऊपर किया. मेरी पीठ पर हाथ रखकर अपने से लिपटा लिया. पीठ पर हाथ फेरते फेरते वो मेरे कूल्हों पर हाथ ले गये और उन्हें धीरे धीरे दबाने लगे. फिर बोले- मैं तुम्हें एक चीज दिखाता हूँ चंदा.

उन्होंने अलमारी खोलकर एक एलबम निकाला और मेरे सामने एक तस्वीर कर दी. कहने लगे- यह है मेरी बीवी चांदनी. देखो तो तुम इन कपड़ों में बिलकुल चांदनी जैसी लग रही हो. बिल्कुल मेरी चंदा दिख रही हो.
मैंने तस्वीर को देखा तो देखता ही रह गया. वाकई वह हूबहू मेरे जैसी दिख रही थी. वही नाक नक्श. वही रंग रूप.

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