भाभी की चुत की आग लंड से बुझाई • Kamukta Sex Stories

भाभी की चुत की आग लंड से बुझाई

दोस्तो नमस्कार!
सभी भाभियों को चुत चाटते हुए मेरा लंडवत नमस्कार.

मैं आशा करता हूं कि आप सब अच्छे से चुदाई कर रहे होंगे.

मेरा नाम विक्की है और मैं राजस्थान का रहने वाला हूं.

यह गरम सेक्स कहानी मेरी और मेरी पड़ोसन भाभी की है, जिनकी चुत को मैंने अपने लंड की अमृत वर्षा से नहलाया था.

हॉट भाभी पोर्न स्टोरी शुरू करने से पहले मैं अपने बारे मैं बता दूँ.
मेरी उम्र 23 साल है, हाइट 6 फीट है. शरीर भी अच्छा-खासा है. मेरे लंड का साइज भी काफी मस्त है.
अब तक मेरा लंड 5 चुत का भोसड़ा बना चुका है.

इस सेक्स कहानी की नायिका मेरी पड़ोसन कविता भाभी की उम्र 28 साल है.
भाभी एक नंबर की माल हैं. उनकी हाइट साढ़े पांच फीट की है. फिगर के बारे में तो क्या बताऊं … उनका 36-32-38 का कमाल का फिगर है.

यह बात 5 महीने पहले की है. मेरी पहली वाली गर्ल फ्रेंड की भी शादी हो गई थी और मुझे सर्दी में चुत मारने की आदत पड़ी हुई थी.

मैं नई चुत पटाने की जुगाड़ में घूम रहा था पर चुत मुझे मेरे पड़ोस में मिल जाएगी, ये मुझे नहीं पता था.

एक दिन मैं सुबह की सैर और दौड़ लगाने के लिए घर से निकल रहा था तो सामने वाले घर से कुछ लड़ने झगड़ने की आवाज आ रही थी.

मुझे अपनी मां की बताई बात याद गई कि कविता भाभी का पति दारू पीकर उन्हें मारता है.

उस टाइम मैंने इतना ध्यान नहीं दिया और पास के एक मैदान में टहलने चला गया.
जब मैं एक घंटे बाद वापिस आ रहा था तो कविता भाभी का पति घर से निकल रहा था.
मैं उसे देख कर कुछ नहीं बोला और अपने घर में आ गया.

फिर एक घंटा बाद नहा धोकर कॉलेज चला गया.
कॉलेज से शाम को 4 बजे घर आया तो कविता भाभी हमारे घर आई हुई थीं.

मेरी मम्मी और भाभी जी आपस में बात कर रही थीं.
मैंने भाभी जी को नमस्ते बोला और उन्हें देखते हुए अपने रूम में चला गया.

भाभी भी 10-15 मिनट बाद चीनी लेकर चली गईं.

एक घंटा बाद मां ने मुझसे कहा कि कविता भाभी के घर चला जा और भाभी से कटोरी लेकर आ जा.

मैं मूवी देख रहा था तो मेरा मन जाने का नहीं था पर मां के बोलने पर चला गया.

पड़ोस में जाकर मैंने भाभी को आवाज़ लगाई तो कोई आवाज नहीं आई.
मैं अन्दर चला गया.

भाभी किचन में थीं तो मैं भी किचन में चला गया.

मैंने भाभी से कटोरी के लिए बोला तो भाभी ने मुझसे कहा- तुम 2 मिनट बैठो, मैं अभी आती हूं.
मैं- ओके भाभी जी.

फिर मैं हॉल में जाकर बैठ गया.

थोड़ी देर बाद भाभी चाय लेकर आ गईं.
उन्होंने चाय का एक कप मुझे दे दिया और एक खुद पीने लगीं.

भाभी की आंखें लाल देख कर मैंने पूछा- क्या हुआ आपकी आंखें इतनी लाल कैसे हैं … क्या आप परेशान हैं?
पहले तो वो कुछ नहीं बोलीं.
फिर मैं भी उठकर जाते हुए बोला- मुझे आप कुछ नहीं समझतीं, तो मैं यहां क्यों रुकूँ?

इस पर भाभी जी बोलीं- रुको, मैं बताती हूं.
मैं वापस बैठ गया.

भाभी- मेरी आंखें लाल इसलिए हैं क्योंकि मैं पूरी रात सोई नहीं हूँ.
मैं- क्यों?

भाभी- रात भर वो घर नहीं आए तो मुझे नींद नहीं आई.
उनकी बात से साफ समझ आ रहा था कि वो झूठ बोल रही हैं.

मैंने सीधी सीधे पूछ लिया- भाभी आप मुझे एक बात बताओ, वो शादी से पहले नशा करते थे, तो आपने उनसे शादी क्यों की?
भाभी मेरी बात सुनकर चुप हो गईं.

फिर भाभी धीमे से बोलीं- नहीं, वो पहले नशा नहीं करते थे. शादी के बाद ही जुआ खेलने लगे और हारने के बाद नशा करने लग गए.
इतना बोल कर भाभी जी फिर से रोने लग गईं.

मैंने भाभी की पीठ पर हाथ फेर कर उनको दिलासा देकर शांत किया और कहा कि जीवन में दिक्कतें सभी को आती हैं भाभी … फर्क बस इतना सा है कि किसी को ज्यादा आती हैं, किसी को कम. आप हिम्मत रखिए, सब ठीक हो जाएगा.

वो मेरी तरफ देखने लगीं.

मैंने महान प्रवचनकार की तरह उनके सामने बोलना शुरू कर दिया- रहिमन चुप कर बैठिए, देख दिनन के फेर …

मेरी बात सुनकर भाभी के होंठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई और वो शांत हो गईं.

मैंने भाभी की मुस्कान देख कर पूछा- क्या हुआ भाभी, आप बड़ी जल्दी मुस्कुरा दीं?
भाभी बोलीं- मुझे नहीं मालूम था कि मेरे देवर जी इतनी अच्छी तरह से समझाने में माहिर हैं.

मैं हंस पड़ा और भाभी भी हल्की सी मुस्कराहट के साथ मेरी तरफ देखने लगीं.
भाभी बोलीं- सच में तुमसे बात करके मन बड़ा हल्का हो गया.

थोड़ी देर बात करके मैं भी घर आ गया.

अगले दिन भाभी जी सुबह हमारे घर आकर मम्मी से बोलीं- आंटी, मुझे शॉपिंग के लिए बाजार जाना है, आप मेरे साथ विक्की को भेज दो ना!
मम्मी ने मेरी ओर इशारा करके कहा- उससे ही पूछ ले, जा रहा है तो ले जा.

भाभी जी बोलीं- विक्की, मेरे साथ बाजार चलोगे क्या?
मैंने भाभी की तरफ देखा और उन्हें पांच मिनट रुकने का बोल कर कमरे में आ गया.

फिर मैं तैयार हुआ और हम दोनों बाइक से बाजार के लिए निकल गए.

थोड़ी देर बाद मैंने पूछा- क्या शॉपिंग करोगी भाभी जी?
भाभी- बस कुछ कपड़े खरीदने थे यार!

भाभी के मुँह से अपने लिए यार सुनकर मैं जरा चौंका, फिर मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया.

मैंने अच्छा कह कर बात को नजरअंदाज कर दिया.

फिर भाभी बोलीं- विक्की तेरी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?
भाभी का ये सवाल सुनकर अब मैं हरान हो गया था.
मैं सोचने लगा था कि मामला किसी दूसरी तरफ जा रहा है.

तब भी मैंने भाभी के मन की बात को समझने का इंतजार किया.
मैं बोला- नहीं भाभी, अभी तो कोई नहीं है.
भाभी- अभी नहीं है का क्या मतलब हुआ … क्या पहले थी?

मैं बोला- हां पहले एक थी.
तो भाभी बोलीं- एक थी मतलब … एक से मन नहीं भरता था क्या?

मैं बोला- नहीं.
भाभी- अच्छा, फिर उनका साथ कैसे छूट गया?

मैंने एक कदम आगे बढ़ाते हुए कहा- वो ज्यादा मजेदार नहीं थी.
भाभी- अच्छा ज्यादा मजेदार नहीं थी. हम्म … मजेदार कैसी होती है?

फ़िर मैंने खुलते हुए कह दिया- आप जैसी हो तो कोई काम की बात बने.
भाभी- काम की बात से मतलब?

मैं- मतलब तभी मन भरेगा न!
भाभी- अच्छा मुझमें ऐसा क्या है, जो तेरा दिल भर सकता है?

मैं- बहुत कुछ कविता जी.
भाभी- अच्छा अब मैं कविता जी हो गई. चल ठीक है. अब ये बता कि ऐसा क्या है मुझमें, जो तुझे मजेदार लगता है?

मैं कुछ नहीं बोला.
भाभी ने फिर से कहा- मुझे तो अपने आपमें कुछ ऐसा नहीं लगा.

मैं- आप मुझ पर दिल हारेंगी, तो बताऊं.
भाभी- हम्म … बातें बहुत अच्छी कर लेते हो. चल बता भी दे.

मैं- कविता जी आप मौका दो, मैं बातों के अलावा सेवा भी अच्छी कर देता हूं.
इस पर भाभी हंसने लगीं.

फिर बोलीं- सेवा करने का मौका जरूर मिलेगा डार्लिंग.
इतना बोलकर भाभी ने मेरे एक गाल को अपने हाथ की दो उंगलियों से खींचा और बोलीं- मेरा देवर बहुत जोश में लग रहा है.

मैं- हां जी भाभी जी.

तब तक बाजार आ गया था.
मैं और भाभी जी एक बड़े मेगा मार्केट में चले गए.

वहां भाभी जी कपड़े ट्राई करके मुझे दिखा रही थीं कि कौन सा अच्छा लग रहा है.

कुछ सूट ट्राई करने के बाद एक लाल रंग ला सूट पहन कर भाभी बाहर आईं तो मैं तो उन्हें बस देखता ही रह गया.
क्या कयामत ढा रही थीं.

मैं उन्हें एकटक देखता रहा.

थोड़ी देर बाद भाभी जी बोलीं- देख लिया तो चेंज कर लूं.
मैं हंस कर बोला- हां हां.

फिर भाभी ने वो सूट ले लिया.
इसके बाद भाभी अंडरगारमेण्ट की शॉप पर चली गईं.
वहां बहुत सी सेक्सी पैंटी और ब्रा देख कर मुझे शर्म आ रही थी.

भाभी भी कुहनी मार कर हंसने लगीं.
वहां से भाभी ने दो नेट वाली लाल रंग की ब्रा पैंटी ले लीं और बोलीं- तुम बाहर चलो. मैं अभी वैक्सिंग का सामान लेकर बाहर आती हूँ.

उन्होंने मुझसे बाइक निकालने का बोला तो मैं बाहर आ गया.
वो शायद झांटें साफ करने का सामान लाने चली गई थीं.

थोड़ी देर बाद भाभी आ गईं और हम दोनों घर को निकल आए.

रास्ते भाभी जी ने मेरा फोन मांगा और बोलीं- मेरा फोन घर पर रह गया.
मैंने उन्हें फोन दे दिया.

भाभी मेरे फोन से फोन लगा कर बात करने लगीं और वो उन्होंने अपने पास ही रख लिया.

फिर हम दोनों घर पहुंच गए.

भाभी ने फोन देते हुए एक सेक्सी स्माइल पास की और मैंने भी आंख मारकर सेक्सी जवाब दिया.
मैं अपने घर में अन्दर आ गया.

थोड़ी देर बाद मुझे एक अनजान नंबर से कॉल आई.

मैं कॉल उठाई तो वो कविता भाभी की कॉल थी.

मैंने पूछा- मेरा नंबर आपके पास कहां से आया.
भाभी- क्यों आ नहीं सकता था क्या?

मैं- नहीं ऐसी बात नहीं है.
भाभी- फिर कैसी बात है?

मैं- कैसी भी नहीं.
फिर वो बोलीं- क्या तुम अभी मेरे घर आ सकते हो … मेरे कमरे का पंखा नहीं चल रहा है, शायद खराब हो गया है.

मैंने उन्हें 5 मिनट रुकने का बोला और मैं भाभी के घर चला गया.

भाभी ने अपने रूम में जाकर पंखा दिखाया कि देखो ये चल ही नहीं रहा है. पता नहीं क्या खराबी आ गई है.
मैंने भाभी से एक टेबल मंगाई और टेबल पर खड़ा होकर पंखा चैक करने लगा.

मैंने नीचे देखा तो भाभी की चूचियां मुझे ऊपर से साफ दिख रही थीं. उनके मस्त दूध देख कर मेरा लौड़ा खड़ा होने लगा.
भाभी भी यही देख रही थीं कि मेरी वासना जाग रही है.

फिर अचानक से न जाने कैसे टेबल हिली और मैं भाभी के ऊपर गिर गया.

भाभी मेरे नीचे दबी थीं और मैं उनके ऊपर चढ़ा था.
कुछ देर तक मैं उनकी आंखों की वासना पढ़ता रहा.

फिर अचानक भाभी ने मेरे होंठों हो अपने होंठों के बीच लेकर दबा लिया और किस करने लगीं.
मैं भी उनका पूरा साथ दे रहा था.

कुछ पल बाद मेरा एक हाथ उनकी चूचियों पर चला गया और मैं भाभी के मम्मों को जोर जोर से मसलने लगा.

फिर मैं इतना गर्म हो गया कि मुझे खुद को ही याद नहीं रहा कि मैं क्या कर रहा हूँ.

मैं भाभी को जोर जोर से किस करने लगा और उनके मम्मों को दबाने लगा, उनके बाल पकड़ कर होंठों को खाने सा लगा.
भाभी भी मेरा साथ दे रही थीं.

फिर कुछ देर बाद मैंने भाभी को अपनी गोद में उठाया और उन्हें बेड पर लेटा दिया.
भाभी ने अपनी बांहें फैला दीं तो मैं झटके से उनके ऊपर चढ़ गया.

वे जोर से चिल्लाईं- आंह जान लेगा गया पागल.
मैं बोला- जान की जान कौन लेता है डार्लिंग … मैं तो आपकी चुत लूंगा.

इतना बोलकर मैं जोर जोर से किस और मम्मों को दबा रहा था.

भाभी ‘आआह आह आह आह …’ कर रही थीं.

फिर मैंने एक एक करके उनके कपड़े उतारने शुरू कर दिए.
भाभी का पूरा सूट निकाल दिया.
अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में पड़ी थीं.

दस मिनट तक मैंने भाभी के मम्मों को चूसा, फिर धीरे धीरे नीचे आ गया.
उनकी पैंटी को मैंने अपने दांतों से पकड़कर नीचे कर दिया और उनकी नंगी चुत मेरे सामने आ गई.

एक पल भी देर ना करते हुए मैंने अपनी जीभ उनकी चुत में डाल दी और भाभी की कमर ऊपर उठने लगी.

भाभी अपने हाथों से मेरे सर को अपनी चुत पर दबा रही थीं.
दस मिनट चुत चुसाई के बाद मैं ऊपर आकर उनके मम्मों के बीच लौड़ा डालकर बूब्स चोदने लगा.

थोड़ी देर बाद भाभी ने मेरे लौड़े को मुँह में ले लिया और चूसने लगीं.
उनकी चुसाई से लग रहा था कि हॉट भाभी पोर्न खूब देखती होंगी.

कोई पांच मिनट लंड चूसने के बाद वो चुत खोलकर बोलीं- विक्की अब मत रुक यार … जल्दी से पेल दो.
मैं बोला- भाभी, मुझे मूत आ रहा है.

भाभी बोलीं- बाद में मूत लेना पहले चोद दे. या तू ऐसा कर मुझे ही पिला दे.
मैं खड़ा होकर उनके और उनकी चुत के ऊपर मूतने लगा.

थोड़ा मूत भाभी पी भी गईं. फिर मैं उनके ऊपर लेटकर किस करने लगा.
भाभी बोलीं- अब मत तड़पा यार … जल्दी से अपना लौड़ा डाल दे.

मैंने उनकी कमर के नीचे तकिया लगा दिया और धीरे से अपना लौड़ा उनकी चुत पर घिसने लगा.
थोड़ी देर बाद लंड का टोपा मैंने भाभी की चुत में डाल दिया. अचानक इस वार से भाभी की आह निकल गई.

मैं उनको किस करने लगा, पर अभी तक मेरा टोपा ही उनकी चुत में था.
फिर अचानक से मैंने एक जोर का धक्का मारा और मेरा आधा लौड़ा उनकी चुत में चला गया.

भाभी को बहुत दर्द हो रहा था.
वो उनकी आंखों से पता चल रहा था.

फिर मैंने एक और जोर का झटका मारा और अपना पूरा लौड़ा बच्चेदानी तक पहुंचा दिया.
भाभी की आंखों में आंसू आ गए.

थोड़ी देर रुकने के बाद मैंने लंड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया.
अब भाभी का दर्द भी जा चुका था और साथ में वो भी कमर हिला हिला कर साथ दे रही थीं.

अब मैंने अपनी एक्सप्रेस ट्रेन शुरू कर दी.
ताबड़तोड़ 15 मिनट की चुदाई में भाभी दो बार झड़ गई थीं.
फिर मेरा भी होना वाला था तो 10-15 जोरदार झटकों के बाद मैं भी उनकी चुत में ही झड़ गया.

मैं उनके ऊपर ही लेट गया.
दस मिनट बाद मेरा फिर से मूड बन गया.
इस बार मैंने उनकी गांड को खूब पेला.

अब तो भाभी के साथ ये चुदाई रोज होने लगी, कभी दिन में, तो कभी रात में!

हॉट भाभी खुद प्यासी रहती थीं तो मैं उनकी चुदाई रोज करने लगा था और आज भी कर रहा हूँ.

अब भाभी मुझसे अपने बहन को भी चुदवाना चाहती हैं. उनकी बहन की चुदाई की कहानी को मैं अगले भाग में लिखूंगा.

दोस्तो, लंड के इस कामुक सफर में हम मिलते रहेंगे.
आपको यह हॉट भाभी पोर्न स्टोरी कैसी लगी, आप मेल करके जरूर बताना.