अपनी गांड की खुजली को एक नौजवान युवक से मिटाई

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मेरा नाम आशा है मैं बनारस की रहने वाली हूं, मेरी शादी को 5 वर्ष हो चुके हैं लेकिन इन 5 वर्षों में मैं अपने पति के साथ बिल्कुल भी खुश नहीं हूं। उन्होंने जिस प्रकार से मुझे परेशान किया हुआ है मैं बहुत ज्यादा ही दुखी हो गई हूं, मुझे लोगों के घर में जाकर काम करना पड़ रहा था और वह कुछ भी काम नहीं करते इसीलिए मैंने सोचा कि मैं अब ज्यादा समय तक उनके साथ नहीं रहूंगी। मैंने उन्हें कई बार इस बारे में समझाने की कोशिश भी की लेकिन वह बिल्कुल भी मेरी बात समझने को तैयार नहीं थे और कहने लगे कि तुम कौन होती हो मुझे समझाने वाली, जब उन्होंने मुझसे यह बात कही तो मुझे बहुत ही बुरा लगा और उस दिन मैंने फैसला कर लिया कि मैं अब बनारस छोड़कर कहीं बाहर चली जाऊंगी। मैंने फैसला कर लिया कि मैं अब दिल्ली चली जाऊंगी इसलिए मैं दिल्ली चली गई।

जब मैं दिल्ली गयी तो वहां पर मेरी एक बहुत पुरानी सहेली मुझे मिली, उसने जब मेरी स्थिति देखी तो वह कहने लगी तुम तो बिल्कुल ही दुबली पतली हो चुकी हो। मैंने उसे अपनी सारी व्यथा बताइए और वह कहने लगी कि तुमने यह बहुत ही अच्छा फैसला लिया कि तुमने अपने पति को छोड़ दिया। मैंने उसे बताया कि मेरा पति एक नंबर का शराबी है और वह ना तो कुछ काम करता है और ना ही काम करने के लिए तैयार है। मैंने उसे 5 साल दिये लेकिन इन 5 सालों में भी उसने मेरी जिंदगी को बिल्कुल ही बदतर हालत में कर दिया इसीलिए मैं अपना जीवन अपने तरीके से जीना चाहती हूं। जब यह बात मैंने अपनी सहेली को बताई तो वह कहने लगी तुम चिंता मत करो, मैं तुम्हारे लिए कहीं नौकरी की बात कर लूंगी। मैन उसे कहा कि मेरे पास रहने के लिए भी कोई ठिकाना नहीं है यदि तुम मेरी मदद कर दो तो मुझ पर बहुत बड़ा उपकार होगा, वह कहने लगी कि तुम मेरे बचपन की सहेली हो, क्या मैं तुम पर उपकार करूंगी, तुम मेरे साथ मेरे घर पर ही रहोगी।

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मैं कुछ दिन उसके घर पर ही रही और उसने मेरी एक कंपनी में नौकरी लगवा दी। मेरे पास थोड़े बहुत पैसे होने लगे थे और कुछ पैसे मेरे पास पहले से ही जमा थे इसलिए मैं सोचने लगी कि मैं रहने के लिए दूसरी जगह देख लेती हूं क्योंकि मेरी वजह से ही मेरी सहेली के परिवार में कोई दिक्कत ना हो जाए इसीलिए मैंने उसे कहा कि मैं अब अकेले रहना चाहती हूं। वह पहले मना कर रही थी लेकिन मैंने उसे समझाया कि अब ज्यादा समय तक तुम्हारे घर पर रहना मेरे लिए अच्छा नहीं है इसीलिए मैं अकेले रहना चाहती हूं। उसने मेरे लिए ही वहीं पास में एक घर देख लिया और मैं वहीं पर रहने लगी। मैं जहां पर रहती थी वहां मेरे पड़ोस में एक लड़का भी रहता था, वह किसी कंपनी में जॉब करता था उसका नाम रोहित है। रोहित से मेरी मुलाकात हुई तो मुझे उससे बात कर के अच्छा लगा, वह मुझसे काफी छोटा था, हम दोनों साथ में बैठे हुए थे तो मैंने उसे पूछा कि तुम्हें दिल्ली आए हुए कितना समय हो चुका है, वह कहने लगा कि मुझे दिल्ली आए अभी ज्यादा वक्त नहीं हुआ है, मुझे सिर्फ 6 महीने ही दिल्ली में हुए हैं। मैंने उसे कहा कि तुम कहीं जॉब करते हो, वह कहने लगा मैं जॉब तो करता हूं लेकिन फिलहाल मैं ऐसे ही पार्ट टाइम नौकरी कर रहा हूं ताकि मेरा खर्चा निकल जाया करें। मुझे जब भी कोई जरूरत होती तो मैं रोहित को बोल दिया करती थी और वह हमेशा ही मेरी मदद के लिए मेरे साथ खड़ा रहता था। धीरे-धीरे हम दोनों के बीच में दोस्ती होने लगी तो उसे मेरे बारे में भी सब कुछ पता चल गया था, मैंने उसे बताया कि मेरे पति और मेरे बीच में बिल्कुल भी अच्छे संबंध नहीं है इसलिए मैंने उन्हें छोड़ दिया है, मैं अब अपने तरीके से अपने जीवन को जीना चाहती हूं, वह कहने लगा यह तो आपने बहुत ही अच्छा फैसला लिया ताकि उन्हें भी सबक मिले, आप सिर्फ उनके हाथों की कठपुतली नहीं है। जब यह बात मुझे रोहित ने कहीं तो मैंने उसे कहा कि तुम्हारी उम्र तो बहुत छोटी है लेकिन तुम बहुत ही समझदार हो, मुझे नहीं पता था कि रोहित इतना ज्यादा समझदार है। उसकी उम्र सिर्फ 22 वर्ष है लेकिन वह इतनी कम उम्र में भी बहुत समझदार है मुझे रोहित ने बताया कि मेरे घर की भी स्थिति ठीक नहीं है इसी वजह से मैं काम करने लगा हूं ताकि मैं अपना खर्चा खुद ही उठा पाऊं।

रोहित बिहार का रहने वाला है और वह बहुत ही अच्छा है, मुझे कई बार लगता है कि शायद रोहित भी मेरी तरह ही परेशान है इसलिए मैं उसे अपने आप को बहुत ज्यादा जुड़ा हुआ महसूस करती हूं। कभी कबार रोहित बहुत लेट आता है तो मैं उसके लिए खाना बना कर रखती हूं ताकि उसे कोई भी दिक्कत ना हो। रोहित भी मुझे बहुत मानता है और कहता है कि आप मेरा बहुत ज्यादा ध्यान रखती हैं, मुझे आपने कभी भी मेरे घर वालों की कमी नहीं होने दी। मैंने रोहित से कहा कि मेरा भी अब इस दुनिया में कोई भी नहीं है तो मुझे लगता है कि तुम इतने अच्छे हो तो मैं तुम्हारी थोड़ी बहुत मदद कर दिया करू, तुम भी तो हमेशा ही मेरी मदद करते हो। जब मैंने रोहित से यह बात कही तो वह कहने लगा कि मैंने तो आपकी कोई भी मदद नहीं की है, उसे हमेशा ही लगता है कि वह मेरी कोई भी मदद नहीं करता लेकिन वह कई बार मेरी बहुत ही ज्यादा मदद कर दिया करता है। एक दिन रोहित अपने ऑफिस से लेट आया और मैंने उसके लिए खाना बना कर रखा हुआ था। उसने खाना खाया और उसके बाद हम दोनों ही साथ में बैठे हुए थे लेकिन उस दिन रोहित बहुत ज्यादा परेशान लग रहा था उसने मुझे बताया कि मेरे पिताजी की तबीयत ठीक नहीं है और वह बहुत बीमार है।

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