बॉस की गरम सेक्सी बीवी-1

“इस बारिश ने भी मुसीबत कर रखी है. सुबह बच्चों की छुट्टी करा दी तो इस बहाने उन्हें नानी के यहां जाने का बहाना मिल गया, अब शाम को उन्हें लाना पड़ेगा। चंदा आई थी लेकिन उसके घर में पानी भर गया है तो वह भी बिना कुछ किये धरे वापस भाग गयी। सुबह से खुद ही सब कर रही हूँ।” वह कलपती हुई बोली।

और मेरे मन में आया तो मैं क्या करूँ.. अपने पति को सुना यह सब। अब घर के काम तो मैं करने से रहा.. अभी नौकरी को लात मार के चला जाऊंगा।

“हर तरफ तो पानी भरा है, कोई काम हो भी तो कैसे।” वह बड़बड़ाती हुई मुझे ड्राईंग रूम में ले आई।
“आपका ब्यूटी पार्लर तो खुला होगा न?” मैंने बैठते हुए पूछा।
जवाब देने के बजाय उसने घूर कर मुझे देखा और वहीं ढका रखा पानी का गिलास उठा कर मेरी तरफ बढ़ा दिया।

“वही मुसीबत हो गयी है। आज शाम किटी में जाना है, स्लीवलेस गाउन पहनना है और इसीलिये सोचा था कि आज ही वैक्सिंग मसाज वगैरह करा लूंगी, लेकिन क्या पता था कि यह बारिश सब गुड़गोबर कर देगी।”

“मतलब.. फिर बंद है क्या?” मैं मन ही मन खुश होते हुए बोला, चलो अच्छा है बला टली और दो घूंट पानी पी कर गिलास टेबल पर रख दिया।
“अरे मेरी माधवी से बात हुई थी कि मैं घर से निकल रही हूँ आप पंहुचिये, तभी तेरे को बुलाया लेकिन अभी उसका फोन आया कि उसके साईड भी सब पानी भरा है और फिलहाल शॉप खुलने का कोई चांस नहीं।”
“फिर.. तो जाना कैंसिल?”
“तुझे बड़ी खुशी हो रही है कि जाना कैंसिल। ब्यूटी पार्लर कैंसिल होने से मेरी किटी थोड़े कैंसिल हो जायेगी। वह तो होनी ही है और मुझे स्लीवलेस गाउन पहनना ही है.. आया समझ में!”

“तो मैं क्या कर सकता हूँ।”
“करने को तो तू यह मनहूस राय भी दे सकता है कि मैं हेयर रिमूवर का इस्तेमाल कर के अंडरआर्म क्लीन कर लूं और खुद अपने हाथों से अपनी मसाज कर लूं.. तेरे मुंह का क्या है, बस हिलना ही तो है।”
“अरे भाभी मैं तो …”

“क्या मैं तो … ज्यादा डॉक्टर न बन। रेजर या वीट वगैरह न लगाती अपने अंडर आर्म पे। आई बात समझ में!”
जी में आया कि गंदी-गंदी गालियां दे दूं दो चार, लेकिन बेबसी से देखता रह गया।

“यह बारिश मेरे पैर रोक सकती है लेकिन मुझे नहीं रोक सकती। मुझे शाम को किटी में जाना है तो जाना है.. वहां बाकायदा परफार्म करना है तो करना है। ऐसे ही थोड़े पार्टी क्वीन कही जाती हूँ मैं।”
“बताइये मैं इसमें क्या कर सकता हूँ?”
“अब तो सबकुछ तू ही कर सकता है।” वह आंखें चमकाते हुए बोली और मैं सरापा सवाल बना उसे देखने लगा।

उसने मुझे उठने का इशारा किया और अपने पीछे चलाती ऊपर की मंजिल पर बने एक छोटे कमरे में ले आई जहां बड़ी-बड़ी खिड़कियों से बाहर बारिश के नजारे तो देखे जा सकते थे लेकिन शीशे ऐसे थे कि बाहर से अंदर का दृश्य नहीं देखा जा सकता था और वैसे भी बाहर बारिश में देखने के लिये होता भी कौन।

कमरे के मध्य में एक टेबल मौजूद थी जिस पर रैक्सीन शीट वाला गद्दा पड़ा हुआ था और सरहाने की साईड में ही एक एंगल की अलमारी थी जिसमें थोड़ा बहुत जो सामान रखा था वह इस बात की चुगली कर रहा था कि यह जगह मसाज के काम आती रही होगी।

“यह प्रापर मसाज रूम बनवा रखा है रोनित ने.. संडे-संडे उनका मालिशिया आता है चंपी करने और कभी-कभी मैं भी चंदा से मसाज ले लेती हूँ।”
“पर मुझे यहां किसलिये लाई हैं?” मैंने संशक भाव से उस कमीनी औरत को देखा जो अब कुटिल अंदाज में मुस्करा रही थी।
“क्योंकि फिलहाल मेरे पास ऐसी हालत में, जब पूरे लखनऊ की माँ बहन एक हुई पड़ी है और घर में दूसरा कोई नहीं है तो तेरे सिवा कोई और विकल्प नहीं।” उसने अर्थपूर्ण दृष्टि से मुझे देखा।
“मतलब?” मैंने अपना सर खुजाया।
“मतलब यह कि तुम मेरी वैक्सिंग करोगे।” उसने निर्णयात्मक स्वर में कहा।

मैं सकपका कर उसे देखने लगा.. मेरे सामने वह खुद को खोलना पसंद करेगी, इस बात से मुझे सख्त हैरानी हुई।
“लल-लेकिन मुझे यह सब नहीं आता।” मैंने अटकते हुए कहा।
“कोई बात नहीं.. मैं सिखा देती हूँ।”

तत्पश्चात उसने अपने हाथ में थमे मोबाईल पे यूट्यूब पे वैक्सिंग का एक वीडियो लगा कर दे दिया और खुद उस कमरे से अटैच बाथरूम में चली गयी।
ऐसा नहीं कि इस तरह के वीडियो मैंने पहले कभी देखे न हों लेकिन इस नजर से तो कभी नहीं देखा था कि एक दिन मुझे खुद करना पड़ेगा.. सो अब उस नजर से इसे समझने की कोशिश करने लगा।
जब तक वीडियो खत्म होता, उससे पहले ही वह बाथरूम से निकल आई और उसे देख के मेरा मुंह खुश्क हो गया।

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