बॉयफ्रेंड और जयपुर टूर

antarvasna, desi kahani

मेरा नाम कंचन है मैं जॉब करती हूं और मेरी उम्र 26 वर्ष है, मैं फरीदाबाद की रहने वाली हूं, मेरी मुलाकात सागर से दो वर्ष पहले हुई थी। मेरी मुलाकात सागर से दो वर्ष पहले सुहानी के घर पर हुई थी, सुहानी मेरी कॉलेज की बहुत अच्छी दोस्त है, मैं उसके घर पर ही गई हुई थी और सागर भी उस दिन उनके घर पर आया हुआ था। सुहानी ने मुझे सागर से मिलवाया, उस दिन मेरे दिल में सागर के लिए ऐसी कोई भी फीलिंग नहीं थी लेकिन कुछ दिनों बाद सागर ने मुझे फोन किया, मैंने उससे पूछा कि तुम्हें मेरा नंबर कहां से मिला तो वह कहने लगा कि मुझे सुहानी ने तुम्हारा नंबर दिया है। मैं सुहानी पर बहुत गुस्सा हुई और मैंने सुहानी को फोन किया तो वह कहने लगी कि सागर मुझसे बहुत ज्यादा जिद कर रहा था इसलिए मैंने उसे तुम्हारा नंबर दे दिया। मैंने सुहानी से कहा कि तुमने एक बार मुझसे पूछ तो लिया होता, उसके बाद तुम उसे मेरा नंबर दे देती, मैंने उसे कहा की मुझे सागर से कोई भी प्रॉब्लम नहीं है लेकिन तुम्हें एक बार मुझसे बात जरूर करनी चाहिए थी।

सुहानी ने मुझसे उसके लिए सॉरी कहा और कहने लगी की अगर तुम्हे बुरा लगा हो तो मैं तुमसे सॉरी कहती हूं, सुहानी मेरी बहुत अच्छी सहेली है इसलिए मैंने उसकी बात को दिल पर नहीं लिया और मैंने सागर से इस बारे में बात नहीं की लेकिन सागर और मेरी बात अब होने लगी थी और मुझे लगने लगा कि वह एक अच्छा लड़का है। वह एक अच्छी कंपनी में भी जॉब करता है और एक अच्छी पोस्ट पर भी है, जब सागर और मैं मिलते तो मुझे उससे मिलना भी अच्छा लगने लगा। एक दिन सुहानी मुझे कहने लगी कि हम लोग कहीं टूर बनाते हैं, मैंने उसे कहा कि मेरे ऑफिस की अभी छुट्टियां नहीं है लेकिन कुछ दिनों बाद हम लोग कहीं घूमने चलेंगे, वह कहने लगी ठीक है हम लोग कुछ दिनों के लिए कहीं घूमने चल पड़ेंगे। कुछ दिनों बाद ही मेरी ऑफिस की 3 दिन की छुट्टियां पड़ गई तो मैंने सुहानी को कहा कि हमारे ऑफिस में 3 दिन की छुट्टी हैं तो क्या हम लोग इस बीच घूमने का प्लान बना ले। जब मैंने सागर से इस बारे में बात की तो वह कहने लगा ठीक है हम लोग घूमने का प्लान कर लेते हैं।

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हम लोगों ने सोचा कि जयपुर ही ठीक रहेगा क्योंकि जयपुर फरीदाबाद से नजदीक भी है और हम लोग वहां से दो-तीन दिन में आ भी जाएंगे इसीलिए हम लोग जयपुर चले गए। जब हम लोग जयपुर गए तो हम लोग बस में ही गए थे, हम लोग जयपुर पहुंचे तो हम लोगों ने होटल में रूम ले लिया, सुहानी और मैं एक ही रूम में थे और सागर दूसरे रूम में था। मैंने सागर और सुहानी से कहा कि मैं अपने किसी रिलेटिव के घर जा रही हूं, मैं उनसे मिल लेती हूं, उसके बाद हम लोग घूमने के लिए चलेंगे। मैं फ्रेश हुई और उसके बाद अपने रिलेटिव से घर चली गई। जब मैं उनके घर गई तो मुझे उनसे मिलकर भी बहुत अच्छा लगा क्योंकि काफी सालों बाद ही मेरी मुलाकात उनसे हो रही थी। वह लोग भी मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए और कहने लगे कि तुम इतने सालों बाद हम से मिलने के लिए आ रही हो हमें बहुत ही खुशी हो रही है। मैं उनके घर काफी देर तक रुकी और उसके बाद मैं होटल वापस चली गई। जब मैं होटल में गई तो सागर और सुहानी मूवी देख रहे थे, मैंने उनसे बोला कि तुम लोग मूवी क्या देख रहे हो कहीं घूमने चलते हैं, शाम भी हो चुकी थी इसलिए हम लोग घूमने के लिए चले गए। हम लोग काफी इंजॉय कर रहे थे और मुझे सागर के साथ घूमना अच्छा लग रहा था। सुहानी भी मुझे कह रही थी तुम तो बहुत ही किस्मत वाली हो जो तुम्हारे साथ सागर है, मैं तो सिंगल ही घूम रही हूं और तुम दोनों के बीच में हड्डी बनी हुई हूं। मैंने सुहानी से कहा ऐसी कोई भी बात नहीं है तुम्हारे होते हुए तो मैंने घूमने का प्लान बनाया, नहीं तो मैं घूमने नहीं आती क्योंकि तुम्हें तो पता ही है मैं अकेले कहीं भी नहीं जाती और मुझे बहुत ज्यादा डर लगता है। मैंने सुहानी से कहा कि मुझे बहुत तेज भूख लग रही है, हम लोग कुछ खा लेते हैं क्योंकि रात भी हो चुकी थी। जब हम लोग एक रेस्टोरेंट में गए तो वहां पर हम लोग बैठे हुए थे, वहां पर मुझे एक परिचित अंकल मिल गए जो मेरे पिताजी के दोस्त हैं, मैंने उन्हें नहीं पहचाना लेकिन उन्होंने मुझे पहचान लिया और वह मुझसे कहने लगे कि तुम जयपुर में क्या कर रही हो।

मैं उन्हें देखकर डर गई और मुझे लगा कि कहीं उन्होंने मुझे सागर के साथ देख लिया तो वह घर पर ना बता दें लेकिन मैंने उन्हें कहा कि यह मेरे दोस्त हैं और मैं अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में जयपुर आई थी। वह सागर से पूछने लगे कि क्या तुम जयपुर में ही रहते हो, सागर ने कहा कि हां मैं जयपुर में ही रहता हूं और यह मेरी बहन है। वह अंकल हमारे साथ काफी देर तक बैठे रहे, मुझे बहुत डर लग रहा था लेकिन सागर ने उस दिन सारी बात को संभाल लिया, उसके बाद मैं थोड़ा रिलैक्स हुई और कुछ देर बाद वह चले गए। जब वह चले गए तब जाके मैंने चैन की सांस ली और मैंने अच्छे से खाना खाया। हम लोग बहुत हंस रहे थे और मुझे भी बहुत ज्यादा हंसी आ रही थी, सुहानी कहने लगी यदि सागर बात को नहीं संभालता तो शायद हम लोग पकड़े जाते। मैंने सुहानी से कहा तुम बिल्कुल ठीक बोल रही हो, सागर ने संभाल लिया नहीं तो अंकल मेरे घर पर बता देते, वह कहते की तुम्हारी लड़की किसी लड़के के साथ घूम रही है। हम लोग उसके बाद होटल में चले गए और कुछ देर हम तीनों ही साथ में बैठे हुए थे और बात कर रहे थे। सुहानी कहने लगी मुझे नींद आ रही है मैं सोने जा रही हूं। जब सुहानी सोने चली गई तो सागर और मैं साथ में ही बैठे हुए थे। सागर ने जैसे ही मेरे हाथ को पकड़ा तो मेरे अंदर से उत्तेजना जागने लगी और मैंने भी सागर को कस कर पकड़ लिया। उसने मुझे जब अपनी बाहों में लिया तो मेरे अंदर से करंट निकलने लगा और जैसे ही सागर ने मेरे होठों का रसपान किया तो मैं पूरे मूड में आ चुकी थी। सागर ने मुझे नंगा कर दिया और मेरी चूत भी पूरी गीली हो चुकी थी।

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