कैब ड्राइवर के लंड को आइसक्रीम की तरह चूसकर चूत चुदवाई

सभी दोस्तों को चूत दिखाकर नमस्कार करती हूँ। नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम के माध्यम से आप सभी को अपनी स्टोरी सुना रही हूँ। कोई गलती हो जाए जो माफ़ करना। मेरी हिंदी जरा कमजोर है। आशा है की स्टोरी पढकर सभी लड़के लड़की झड़ जाएंगे अपनी अपनी चड्डियों में। स्टोरी आपको अच्छी लगेगी।

मेरा नाम वाटिका चौधरी है। मैं गुड़गांव में जॉब करती हूं। मेरी जॉब शिफ्ट अलग अलग टाइम की होती है। कई बार मुझे रात की शिफ्ट में भी काम करना पड़ता है लेकिन कंपनी ने मेरी शिफ्ट टाइमिंग को देखते हुए मेरे लिए कैब का इंतज़ाम भी करवा रखा है।इसलिए रात में जब भी मेरी शिफ्ट लगती है तो मैं कंपनी की कैब से ही घर आती हूं।

यहां पर ग्रुप सोसायटी है जिसमें जगह-जगह ऊंची बिल्डिंग के फ्लैट्स बने हुए हैं। ये शहर रात के वक्त भी जगता हुआ दिखाई देता है इसलिए यहां पर मेरे घर वालों को भी मेरी जॉब से कोई प्रॉब्लम नहीं है। मेरे लिए शादी के कई रिश्ते आ चुके हैं लेकिन अभी मैं अपने करियर में और ऊंचाई तक पहुंचना चाहती हूं इसलिए शादी के लिए मना कर देती हूं। साथ ही मुझे एक हैंडसम लड़के की तलाश है जिसका लंड भी काफी तगड़ा हो। लेकिन मेरी ये ख्वाहिश अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। क्योंकि मेरे पहले ब्यॉयफ्रेंड का लंड तो काफी मोटा था लेकिन वो देखने में कुछ खास नहीं था।

इसलिए मैंने अपने दोस्तों को भी उसके बारे में नहीं बताया था कि मैं किसी के लंड के नीचे से निकल चुकी हूं। क्योंकि अच्छा हैंडसम ब्यॉयफ्रेंड हो तो उसके साथ बाहर मस्ती करने का मज़ा ही अलग होता है। इसलिए मैंने पहले ब्यॉयफ्रेंड के बारे में किसी को नहीं बताया था। हां, जब भी मेरी चूत में खुजली होती थी मैं उसको फोन करके दो-चार मीठी बातें करके बुला लेती थी या उसके कमरे पर चली जाती थी।

लेकिन जल्दी ही मेरा मन उससे भर गया था इसलिए मैंने उसके साथ ब्रेक अप कर लिया था। अब मेरी चूत काफी दिनों से प्यासी ही थी। मन तो करता था कि उसको बुलाकर चूत की प्यास को बुझा लूं लेकिन सोचा कि एक बार बुला लिया तो कई दिन उससे पीछा छुड़ाना मुश्किल हो जाएगा, इसलिए मैं अपनी गरम चूत को अपनी पैनी उंगलियों से ही शांत कर लेती थी। लेकिन चूत मेरे इस बहकावे में ज्यादा दिन रह नहीं पाई। उसको तो लंड ही चाहिए था इसलिए अगले ही दिन फिर से मुंह फुलाकर खड़ी हो जाती थी।

मेरी फिगर के बारे में तो मैं बताना भूल ही गई। मेरी गांड तो ज्यादा लंबी चौड़ी नहीं है लेकिन मेरे दूध काफी मोटे हैं जिनको मैं अपने टॉप के अंदर बड़ी ही मुश्किल से संभाल पाती हूं। टॉप के ऊपर से उनकी दरार की गहरी खाई अच्छे-अच्छों को लार टपकाने पर मजबूर कर देती है। लेकिन अभी तक मुझे ऐसा कोई दमदार लंड नहीं मिला था जिसको मैं हमेशा के लिए अपना बनाने के बारे में सोच सकूं। वैसे भी अरेंज मैरिज में ये तो करना संभव नहीं था क्योंकि अरेंज मैरिज में लड़के की शक्ल तो देखी जा सकती है लेकिन उसका सामान देखने के लिए बहुत ही पापड़ बेलने पड़ते हैं इसलिए मैंने अपने घरवालों को कह रखा था कि मैं शादी करूंगी तो लव मैरिज ही करूंगी।

हाई सोसायटी की वजह से मेरे घरवालों को भी मेरे इस फैसले से कोई परेशानी नहीं थी। लेकिन पता नहीं रिश्तेदारों के दिमाग में क्या भूसा भरा होता है मुझे ये आज तक समझ नहीं आया। वो आए दिन मेरे लिए कोई न कोई रिश्ता लेकर आ जाते थे और मेरा जवाब सुनकर फिर अपना सा मुंह लेकर वापस चले जाते थे।

मैं रोज़ की इस चिक-चिक बाज़ी से परेशान होकर घरवालों को कई बार समझा चुकी थी कि अभी मुझे शादी की कोई जल्दी नहीं है। पहले मुझे अपने करियर पर फोकस करना है। लेकिन घरवालों को भी जैसे मेरे साथ मत्था मारने में मज़ा आता था। खैर, ये तो रोज़ की ही कहानी थी लेकिन इसके साथ ही मेरी चूत भी मुझे परेशान करती रहती थी। कुछ दिन पहले की ही बात है कि मेरी नाइट शिफ्ट लग गई और ऑफिस टाइम शाम के 6 बजे से रात के 2 बजे तक का हो गया।

पहले दिन जब मैं घर जाने लगी तो कैब ड्राइवर को देखकर मेरी चूत ने अपना मुंह खोलकर एक आह… दे दी। वैसे तो कैब वाले मुझे पसंद नहीं आते थे लेकिन उस बंदे में कुछ अलग ही बात थी। देखने में हट्टा-कट्टा और तगड़ा था। लेकिन मैं अपनी तरफ से कोई इस तरह की पहल नहीं करना चाहती थी जिससे कि उसको शक हो जाए कि मैं उसकी तरफ आकर्षित हो रही हूं। इसलिए मैं चुपचाप उसको पीछे वाली सीट पर बैठकर फोन में लगी रहती थी। एक दिन की बात है जब मैं घर जा रही थी कैब वाले के फोन पर कॉल आती है। उसने जब बात करना शुरु किया तो पता चला कि कोई गांव का बंदा है और गुड़गांव में अपने दोस्तों के साथ रूम लेकर रह रहा है। उसकी बोली भी ठेठ गांव जैसी थी। मैंने सोचा कि शरीर से तो ये काफी रसीला है ही और हो सकता है कि इसका लंड भी काफी दमदार हो।

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