चलती ट्रेन में चूत चुदाई का पहला अनुभव

नमस्ते दोस्तो, मैं करीब 4 साल से अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ. यह कहानी मेरा पहला अनुभव है, जो कि इसी दिसंबर महीने में हुआ.

सबसे पहले मैं आपको अपना परिचय दे दूं. मैं जोधपुर का रहने वाला हूँ, मेरा नाम लकी है. मेरा कद 5 फुट 4 इंच है. मेरे लंड की लंबाई 5 इंच है और ये काफी मोटा है. मैं इस समय अम्बाला में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा हूँ. वैसे तो मैं एक सीधा सा लड़का हूं, क्लास में भी लड़कियों से बहुत कम ही बात करता हूं. पर सेक्स करने की इच्छा तो हर किसी में होती है, सो मैं अन्तर्वासना की कहानियां पढ़ कर मुठ मार लेता था. मुझे अभी तक किसी लड़की के साथ सेक्स करने का मौका नहीं मिला था. लेकिन ट्रेन में मिली एक आंटी ने मुझे ये मीठा अनुभव भी दे दिया था. उसी अनभव को आज मैं आपके साथ साझा कर रहा हूँ.

मेरी कॉलेज की छुट्टियां शुरू हुईं, तो मैं ट्रेन से अपने घर जाने को निकल गया. मेरी ट्रेन करीब रात के बारह बजे की थी, तो मैं साढ़े ग्यारह स्टेशन पर आ गया. ट्रेन आधा घंटा देर से आई. फिर मैं अपनी सीट खोज कर वहां पे आ कर बैठ गया. मेरी सीट ऊपर वाली थी. लेकिन मैं नीचे ही बैठ गया था. थोड़ी देर में ट्रेन वहां से चल पड़ी. मैं भी अपने बैग से कम्बल निकाल कर ओढ़ के लेट गया.

अगले किसी स्टेशन पे एक अधेड़ उम्र की औरत आ कर बैठ गयी. वो देखने में मस्त माल लग रही थी. सफेद रंग की पजामी और शायद बैंगनी रंग का सा कुर्ता पहन रखा था. ऊपर से उसने हरे रंग की शॉल ओढ़ रखी थी. उसकी सफ़ेद पजामी में मोटी मोटी जांघें बड़ी मस्त लग रही थीं.

ट्रेन चली तो ठंड भी बढ़ने लगी. उस औरत ने सिर्फ शॉल ले रखी थी. मैंने महसूस किया कि उनको सर्दी लग रही थी. मैं सीट पे बैठ गया और उससे बात करने लगा. बातचीत के दौरान ही मैंने अपना आधा कम्बल उन्हें दे दिया. कम्बल में आ जाने से उनको सर्दी से काफी राहत मिल रही थी. मुझे ऊपर अपनी बर्थ पर जाना था, लेकिन बैठ न पाने के कारण मैं कुछ सोचने लगा.

इधर मैं अभी यही सोच रहा था तो आंटी ने मुझसे पूछा- क्या सोच रहे हो?
मैंने बताया कि मेरी ऊपर वाली बर्थ की वजह से उस पर सही से बैठ नहीं पा रहा हूँ.
तो आंटी ने मुझे उसी नीचे वाली सीट पर ही बैठने को कह दिया ताकि हम दोनों आराम से बैठ सकें. उनके ऊपर वाली बर्थ अभी खाली थी, तो वो फोल्ड की हुई थी. मैं भी मौके की तलाश में था. इसलिए उनकी जांघ के पास चिपक के बैठ गया. तभी ट्रेन अगले स्टेशन पर रुकी और वो मिडिल वाली बर्थ, जिस मुसाफिर की थी, वो आ गया तो बर्थ को अनफोल्ड करना पड़ गया.

अब ट्रेन भी चल पड़ी तो मैं साइड में टेढ़ा से हो कर लेट गया और आंटी भी मेरी जांघ का तकिया सा बना कर लेट गईं.

इतनी देर में आंटी मेरे साथ बातों में काफी खुल गयी थीं. मैं भी पहली बार किसी के साथ इतना फ्रैंक हो रहा था. उन्होंने बताया कि उनके पति होमगार्ड हैं और वो अब उनके साथ नहीं रहते.
फिर उन्होंने पूछा कि तुम्हारी कोई गर्लफ्रैंड नहीं है क्या?
मैंने न में जवाब देते हुए सिर हिला दिया. तो वो धीरे धीरे सेक्स के बारे में पूछने लगीं. मैं थोड़ा सा घबरा गया लेकिन मैंने भी ठरकी बनते हुए धीरे से उनके मम्मों पर हाथ रख दिया.

आंटी के मम्मों पर हाथ रखते वक्त मेरी डर के मारे हालत खराब हो रही थी.
तभी आंटी ने मुझे घूरते हुए हाथ हटा दिया और बोलीं- ये क्या कर रहे हो?

उस समय ट्रेन के लगभग सारे यात्री सो रहे थे. पूरे डिब्बे में 2-3 लाइट ही जल रही थीं, लेकिन मेरी डर के मारे फटी पड़ी थी. मैं कुछ बोल भी नहीं पा रहा था. मैंने आंटी के मम्मों से हाथ हटा लिया था.
तभी मैंने मेरी जांघों के बीच में हलचल महसूस की और पाया कि आंटी का हाथ मेरे लंड के ऊपर आ गया था और वो धीरे धीरे मेरे लंड को सहलाने लगी थीं.

मैंने उनकी ओर देखा तो वो आंख मार के मुस्करा दीं. आंटी ने मेरे लोअर को नीचे सरका दिया. फिर वो कुछ इस तरह से लेट गईं कि उनका मुँह मेरे लंड के करीब हो गया. आंटी लेटे-लेटे ही मेरा लंड चूसने लगीं. मुझे दिखाई कम ही दे रहा था, लेकिन फिर भी मैंने ऊपर तक कम्बल से दोनों को ढक लिया था. वो मेरा लंड चूसे जा रही थीं. मुझे मस्त मजा आ रहा था. सच में ये मेरे जीवन का पहला अनुभव था, जब कोई महिला मेरा लंड चूस रही थी. मैं बता नहीं सकता कि मुझे कितना अधिक हॉट लग रहा था.

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