चंड़ीगढ़ में मेल एस्कॉर्ट का जॉब

कौन कहता है कि इंसान का नेचर और सिग्नेचर नहीं बदलता, मैं कहता हूँ कि सिर्फ़ एक चोट की ज़रूरत है. हाथ पे लगे तो सिग्नेचर… और दिल पे लगे तो नेचर तो, क्या इंसान भी बदल जाता है.

नमस्कार पाठको, मैं राजदीपक आप के साथ अपनी फर्स्ट सेक्स स्टोरी शेयर कर रहा हूँ.

मैं 27 साल का युवक हूँ. पिछले साल मेरी जीएफ से मेरा ब्रेकअप हुआ, मैं उससे बहुत प्यार करता था और शादी करना चाहता था, लेकिन कुछ संयोग ऐसे हुए कि वो मुझे छोड़ कर चली गई और मैं गम के अंधेरे में डूबता चला गया. मैं इतना परेशान हो गया कि त्यागपत्र दे दिया जो कि मेरी परेशान हो चुकी जिन्दगी का सबसे बड़ा उदाहरण हुआ. इसके बाद 4 महीने दारू पी पी कर अपने आपको कोसता रहा.

फिर एक दिन एक न्यूज़ पेपर में मैंने एक जॉब देखी. ये जॉब थी मेल एस्कॉर्ट की.

क्योंकि मैंने अपनी पढ़ाई टूरिज्म से की थी और मैं 3 बड़ी कंपनीज़ के लिए एस्कॉर्टिंग का काम भी कर चुका था, तो मैंने सोचा क्यों ना अपने इस गुण को परखा जाए.

मैंने कॉल की, तो सामने से किसी जेंट्स की आवाज़ थी. मैंने बात की तो उसने मेरी पूरी डिटेल ली और कहा कि कल शाम एक नंबर और एड्रेस मोबाइल पे आएगा, उसी हिसाब से बात कर लेना.

अगली शाम 5 बजे मैसेज आया, एक एड्रेस था, चंडीगढ़ का ही पता था. मैंने उस नम्बर पर कॉल करके बात की. जिनसे बात हुई उसका नाम था मृदुला. मुझे लगा कि आज तो फंस गया, इस बूढ़ी औरत के साथ मारा जाएगा बेटा.

मैंने एड्रेस नोट किया और ओला लेकर पहुँच गया. उस पते पर पहुंच कर डोर बेल बजाई तो अन्दर से एक नौकरानी सी दिखने वाली औरत आई. उसने मुझसे मेरा नाम पूछा और अन्दर चली गई.
दो मिनट बाद आई और मुझे अन्दर ले कर गई. मैं ड्रॉइंग रूम में बैठा वेट कर रहा था.

तभी एक आवाज़ आई- हे राज..
मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो एक 30-32 साल की लेडी थी. मैं देखता ही रह गया. सच में स्वप्न सुन्दरी सी थी लाल रंग का स्लीब लैस सूट और हाई हील्स पहने एक जबरदस्त माल मेरे सामने खड़ा था. सौभाग्य से मैं भी फॉर्मल ड्रेस पहन कर गया था.

मृदुला ने मुझसे कहा- राज, यू लुक्स सो हैंडसम!
मैंने कहा थैंक्यू मेम.. आंड यू ऑल्सो लुक्स गॉर्जियस.

उसके साथ बातचीत हुई, उसने मुझे रोजाना के आधार पर ब्वॉयफ्रेंड हायर किया था, उसका हज़्बेंड बिज़्नेस के लिए ऑस्ट्रेलिया में रहता था. जिस वजह से उसको समय बिताने के लिए एक मेल की जरूरत थी.
आज उसका आउटिंग का प्लान था, तो उसने ड्राइवर को बुलाने के लिए कहा, जिस पर मैंने मना कर दिया- ड्राईवर को रहने दीजिये, मैं ड्राइव कर लूँगा.
उसने पूछा- क्या तुम चंडीगढ़ में ड्राइव कर सकते हो?
मैंने कहा- हां, मैं कर सकता हूँ.

इसके बाद उसकी हाइ एंड वेर्ना गाड़ी लेकर हम दोनों घूमने चले गए. पब्लिक पार्क, एक गार्डन और एक क्लब भी गए, काफी देर तक हम दोनों ने समय व्यतीत किया.

जब वापिस 11 बजे घर की तरफ़ जाने लगे, तो उसने मेरे कंधे पे अपना सर रखा. उस वक्त मुझे मेरी जीएफ नीरू की याद आ गई और मैं रोने लगा.
उसने मुझसे पूछा- क्या हुआ?
तो मैंने अपने रिलेशन के बारे में उसे बता दिया. उसने कहा कोई बात नहीं परेशान मत हो.. तुम्हें जीवन में बहुत अच्छा गिफ्ट मिलेगा.

खैर हम दोनों उसके घर पहुँचे. मैंने कार पार्क की और मैं मोबाइल पर ओला बुलाने के लिए ऑर्डर करने लगा.
तो वो बोली- आज यहीं रुक जाओ.
मैंने मना किया, लेकिन वो नहीं मानी और मुझे उसकी बात माननी पड़ी.

उसने अपनी नौकरानी को बोल कर खाना बनवाया. कुछ देर बाद हम दोनों ने खाना खाया.
रात गहराने लगी तो मैंने पूछा- मेरा रूम मुझे बता दो.
उसने ओके कहा और वो मुझे अपने रूम में ले गई. वहाँ मैंने देखा कि ड्रिंक्स का एक अच्छा ख़ासा कलेक्शन था.

उसने मुझे ऑफर किया लेकिन मैंने मना कर दिया. उसने पूछा कि पीते तो हो न?

मैंने कुछ नहीं कहा लेकिन मेरी आँखों में मनाही के भाव नहीं थे, जिसे महसूस करते हुए उसने दो पैग बनाए और एक गिलास मेरी तरफ बढ़ा दिया. उसके 2-3 बार कहने के बाद मैंने गिलास ले लिया और चीयर्स बोल कर एक पैग खींच लिया.
कुछ देर बाद वो जब चेंज करके गाउन में आई तो माँ कसम मन कर रहा था कि साली को यहीं पटक कर अभी का भी चोद डालूँ.

सुरा का असर होने लगा था, तो मैं अपने रूम में जाने की ज़िद करने लगा. मेरी बात पर उसने मुझे अपनी ओर खींचा, मेरे होंठों पे किस करने लगी और पागलों के तरह काटने लगी.

मुझे लगा जैसे कि मैं नीरू के साथ हूँ. बस मैं शुरू हो गया. उसके गाउन में हाथ डाल कर उसके बूब्स दबाने लगा. उसके चूतड़ों को सहलाने लगा और धीरे धीरे हम बिल्कुल नंगे हो गए.

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