चुदाई का भूत

तभी मेरे पतिदेव कमरे में आ गए, उनके पीछे पीछे मेरे देवर और देवरानी भी आ गए। मुझे इस हालत में देखकर मेरे देवर जी तो बहुत खुश थे। उनकी खुशी उनके चेहरे पर साफ दिख रही थी। उनकी आंखों में एक अलग ही चमक आ गई थी, मुझे ऐसे देखकर। मेरे पती इनको लेकर यहां क्यों आए थे? एक तो मुझे अब इनके सामने अपने खुले बदन का प्रदर्शन करने में बहुत शर्म महसूस हो रही थी, ऊपर से मै अपने शरीर को ढक भी नही सकती थी।
वो तीनो मुझे देखकर आपस मे कुछ बात कर रहे थे, लेकिन वो मै सुन नही पाई। थोडी ही देर में मेरी देवरानी जी मेरे पास आकर बैठ गई, और मुझसे बात करने लगी। बीच बीच मे वो मेरे शरीर को भी छुए जा रही थी। कभी वो मेरे चूची को छूकर देखती, तो कभी मसल देती। उसके बाद उन्होंने मेरी चुत के दोनों होठों को भी फैला दिया, और उनके बीच देखने लगे गई। फिर उसके बाद उन्होंने अपने हाथ पीछे ले जाकर मेरी गांड के पास अपने हाथ घूमाना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने हाथों से मेरे चुतडों को भी दबाकर देखा।

फिर वो मेरे पास से उठकर उन दोनों के पास गई, और उनसे कुछ बातें करने लगी। उनकी बातें करने के बाद, देवर जी मेरे पास आ गए, और उन्होंने उन दोनों से कहा, “आज की रात हम दोनों को अकेला छोड दो, आज हम दोनों सुहागरात मनाएंगे। तुम दोनों मेरे कमरे में जाकर मजे कर लो।”
उनके मुंह से यह सुनकर मै तो दंग रह गई। इसका मतलब मुझे अब मेरे देवर जी चोदने वाले थे, और मेरी देवरानी मेरे पतिदेव के साथ मजे करने वाली थी। यह तो स्वैप ही कर दिया था मेरे देवर और पतिदेव के बीच। मुझे शुरू में थोडा डर तो लग रहा था, कि पता नही यह सब क्या हो रहा है, और मै किसका साथ दूं। मुझे कुछ पता नही चल रहा था कि, आगे क्या होगा?
तभी मेरे पतिदेव और देवरानी हमारे कमरे से बाहर चले गए। और देवर जी ने कमरे को कुंडी मार दी। अब कमरे में सिर्फ मै और मेरे देवर जी बचे हुए थे। फिर देवर जी मेरे पास आ गए, और मेरे कान के पास अपना मुंह लाते हुए बोले, “तुम अपनी चुत की प्यास बुझाना चाहती हो ना?”
मैने उनका जवाब नही दिया तो फिर वो मेरे पास आकर बोले, “मुझे सब पता है, तू जब से इस घर मे आई है, तब से तुझे चोदना चाहता था, आज जाकर मेरी इच्छा पूरी हुई है। इस घर मे जो भी औरत आती है, सबको हम मिलकर चोदते है।”
इतना कहकर देवर जी ने मेरे चुचियों पर अपने हाथ रख दिए, और अब उन्हें मसलने लगे। देवर जी के चूचियों को मसलने से मेरी चुत में फिर से आग लगने लगी थी। देवर जी सब बहुत प्यार से कर रहे थे। लेकिन जिस तरह से वो चूचियों को अपनी हथेली में भरकर मसल रहे थे, मुझे काफी दर्द हो रहा था।

दर्द की वजह से मेरे मुंह से सिसकारियां निकलना भी शुरू हो चुका था। तभी उन्होंने मेरे ऊपर आते हुए मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिए, और बडे ही प्यार से मेरे होठों का रसपान करने में लग गए। मै भी उनका पूरा साथ दे रही थी। शायद देवर जी ने मेरे हाथ पैर खोलना ठीक नही समझा, और वैसी ही हालत में वो मेरे साथ यह सब किए जा रहे थे। उन्होंने अपने कपडे भी नही उतारे थे, तो मैंने उनका लंड अब तक नही देखा था।

आगे की कहानी अगले भाग में लिखूंगी, तब तक सब अपने लंड हिलाते रहिए, और चुत में उंगली करते रहिए। धन्यवाद।

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