चुत चाटकर चुदाई

यह कहानी मेरी है, मेरी पहली चुदाई की, जो दो साल पहले मेरे साथ हुई। तब मै बारहवीं के परीक्षा दे चुकी थी और अब गर्मी की छुट्टियां चल रही थी। लेकिन इन छूट्टियों मे यह एक घटना ऐसी घटी जिसने मेरी पूरी जिंदगी बदल के रख दी। अब मै आप लोगों को अपने बारे में बता दूं, मै एक अच्छे बदन की मालकिन हूँ।

तब मै थोडी मोटी थी, मेरा रंग गोरा है, लेकिन दूध से गोरा नही। मेरा फिगर उस समय उतना अच्छा नही था। और ज्यादा तर लडके मेरी जैसी लडकियों को पसंद नही करते है। तो अब आपका ज्यादा समय न लेते हुए मै सीधे कहानी पर आती हूँ।

हम लोग कोलकाता से है, और मेरे घर में मै, मेरा भाई, मां और पापा रहते है। मेरा भाई मुझसे दो साल बडा है, और वो यहीं इंजीनियरिंग की पढाई करता है।

मेरी मां और पापा दोनों बैंक में जॉब करते है, तो वो सुबह घर से 8-9 बजे निकलते है और सीधे रात 7 के आसपास ही घर वापस आते है। तो छूट्टियों में दिन के समय मेरे घर मे सिर्फ मै और भाई दोनों ही होते है।

भैया का और मेरा कमरा अगल-बगल में ही था। मैने भैया के अफेयर्स के बारे मे काफी चर्चा सुनी थी, लेकिन कभी कोई पक्का सबूत नही मिला।

जब भी मै घर पे होती हूँ, बस टी-शर्ट और शॉर्ट पहनती हूँ, जो मेरे घुटनों तक आता है। घर मे मै उसके अंदर कुछ नही पहनती थी।

मेरे शरीर मे बदलाव बहुत बाद में आने शुरू हुए थे, इसलिए तब तक मेरा बदन पूरा अपने पूरे आकार में नही आया था। मै पहले से ही नोटिस करती थी, कि भैया कुछ अजीब तरीके से मुझे घूरते रहते है। जैसे मुझे खा जाना चाहते हो।

मै जब भी घर मे झाडू लगा रही होती हूँ, या कुछ भी काम कर रही होती हूँ, उनकी नजर हमेशा मेरी छाती पर होती।

एक दिन भैया कॉलेज गए हुए थे, तो मै उनके कमरे मे गई और साफ-सफाई करने लगी। उनके कमरे की साफ-सफाई करने का मेरा हेतु ही था, की मुझे कुछ मिल जाये। और हुआ भी वही, उनके बिस्तर के नीचे मुझे कुछ मैगजीन्स मिली।

मैने मैगजीन्स खोलकर देखा तो अंदर लडकियों की नंगी तस्वीरे और कुछ कहानियां थी। अभी भैया वापस आने में बहुत समय था, तो मै वही उनके कमरे में बैठकर वो मैगजीन पढने लगी।

उस मैगजीन के अंदर बहुत रोमांचक और सेक्सी कहानियां थी। मैने सोचा थोडी देर यही बैठकर पढ लुंगी और भैया के आने के समय के पहले यहां सब पहले जैसा करके निकल जाऊंगी।

इसी विचार से मै वही उनके बिस्तर पर आराम से बैठकर मैगजीन पढ़ने लगी। वह सब देखते देखते मुझे पता ही नही चला, की मेरा हाथ कब मेरी चुत तक पहुंच गया। घर मे इस समय सिर्फ मै ही होती हूं, तो मैने भैया के कमरे का दरवाजा ठीक से बंद नही किया था।

मै मैगजीन की कहानियां पढते पढते अपने शॉर्ट के अंदर हाथ डालकर अपनी चुत को सहला रही थी।

मैने दरवाजे की तरफ ध्यान ही नही दिया, कब भैया आये और मुझे देखने लगे मुझे पता ही नही चला। भैया बहुत देर से मुझे देख रहे थे, और मुझे तब पता चला जब वो एकदम मेरे से करीब आकर खडे हुए।

मै उन्हें देखते ही एकदम से डर गई, अब मै ऐसे थी मानो काटो तो खून नही। भैया को देखकर एकदम से मै मूर्ति सी बन गई, मुझे समझ नही आया मै क्या करूँ।

भैया को देखने के बाद जैसे ही मै अपने शॉर्ट के अंदर से अपना हाथ निकालने वाली थी, की भैया के हाथ मेरे टॉप के ऊपर से ही मेरी चूचियों पे पहुंच गए।

मै तो अब तक एकदम शॉक में ही थी, क्या हो रहा है मुझे कुछ समझ मे नही आ रहा था। भैया ने तो मेरी चुचियां सहलाते हुए वो मेरे टॉप को ऊपर की ओर उठा रहे थे।

पता नही मुझे क्या हुआ, शायद मुझ पर वासना हावी होने लगी थी। पहले ही मैगजीन से हॉट कहानियां पढकर, नंगी तस्वीरे देखकर और अब भाई के हाथों से स्तनों का मर्दन करवाकर मै भी बहकने लगी थी।

धीरे धीरे मै भी भैया के द्वारा की जाने वाली हरकतों का मजा लेने लगी थी। मैने एक बार को भी भैया को रोकने की कोशिश नही की। जिस वजह से भैया ने शायद समझ लिया कि मेरी तरफ से हरी झंडी है। और वो मस्त होकर मेरे बदन से खेलने लग गए।

अब भैया ने आगे होकर पहले मेरे हाथ से मैगजीन ले ली और उसे साइड में रख दिया। उसके बाद वो भी मेरे सामने बैठ गए और मेरे बालों में हाथ डालकर मेरे सर को अपनी तरफ खींच लिया। और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये।

यह मेरे जीवन का पहला कीस था, जो मेरे भैया के साथ था। भैया एक मंझे हुए खिलाडी की तरह मेरे होठों को चूस रहे थे।

Pages: 1 2