चुत चाटकर चुदाई

उन्होंने कोई जल्दबाजी नही करते हुए सब आराम से और प्यार से कर रहे थे। शायद इसीलिए मै चाहकर भी उनका विरोध ना कर पाई।

हम दोनों में से किसी ने भी अब तक कोई बात नही की थी। पूरे कमरे में बस हमारी हलचल से होने वाली और पंखे की आवाज ही थी।

अब भैया मुझे कीस करते हुए अपने हाथों को मेरे टॉप के अंदर घुसा दिया। टॉप ढीला ढाला होने के कारण उनको कोई तकलीफ भी नही हुई।

अब वो किस करते हुए मेरे स्तनों को दबा रहे थे। यह सब मेरे लिए पहली बार था, और अब मुझे मेरी चुत के आसपास कुछ रेंगता हुआ सा महसूस होने लगा।

चुत के इर्द गिर्द एक अजीब सी खुजली सी होने लगी थी, जिसे मिटाने के लिए मै अपना हाथ वहाँ ले गई।

जैसे ही भैया ने देखा कि, मै अपना हाथ खुद चुत पर ले जा रही हूं। तो भैया ने कहा, “क्या हुआ पिंकी? जलन हो रही है क्या चुत में।”

भैया के मुंह से इतनी खुलकर बातें सुनने मात्र से मेरे बदन में एक सिरहन सी दौड गई। भैया की तरफ देखे बिना ही मैने बस हां में अपना सर हिला दिया।

तो भैया मुझसे थोडे से अलग हुए। अलग होते ही उन्होंने अपना हाथ सीधा मेरी चुत पे रख दिया। उसे अपनी मुट्ठी में भींचने की कोशिश करने लगे।

और थोडी देर बाद उन्होंने मेरा शॉर्ट निकालना चाहा, तो मैंने भी उनको सहयोग करते हुए अपनी कमर उठा दी। मेरे कमर उठाते ही उन्होंने झट से मेरे पैरों से शॉर्ट निकालकर साइड में रख दिया।

अब मै पहली बार किसी लडके के सामने अधनंगी हालात में थी। भैया ने पहले मेरी चुत को अच्छे से देखा, मेरी चुत पे छोटे छोटे बाल थे।

मेरी चुत की फांकों को अपनी उंगलियों से थोडा फैलाकर वो मेरी चुत के अंदर झांकने लगे। मेरी चुत को अच्छे से देख लेने के बाद भैया बोले, “पिंकी, तेरी चुत तो एकदम मस्त है। गुलाबी है अंदर से पूरी, इसे देखकर मै खुद को नही रोक पा रहा।”

इतना कहकर भैया ने मेरी चुत पे अपना मुंह लगा दिया। और मेरी चुत की फांकों को अपने होठों से चूसने लगे। थोडी देर के बाद उन्होंने अपनी जीभ मेरी चुत के अंदर डालनी चाही और तभी मेरे पूरे बदन में एक झुरझुरी सी दौड गई।

मेरा पूरा बदन अकडने लगा, अनायास ही मै भैया के सर को अपनी चुत पे दबाने लगी। और फिर मै एकदम से निढाल सी हो गई।

जैसे ही मेरा पानी निकल गया, भैया ने उठकर अपने अरे कपडे उतार दिए सिवाय उनकी बॉक्सर के। उनका लंड बॉक्सर में से बहुत बडा लग रहा था। और वो अंदर ही बार बार झटके मार रहा था, जैसे बाहर आने के लिए तडप रहा हो।

अब वो मेरा टॉप निकालना चाह रहे थे, और अगले ही पल उन्होंने मुझे पूरी नंगी कर दिया।

भैया अब मेरे सामने आकर खडे हो गए और मुझसे कहा, “मै चाहता हूँ, कि तुम भी इस खेल का खुलकर मजा लो। लेकिन तुम हो कि कुछ बोलती ही नही और न ही कुछ कर रही हो। बस मेरा साथ दे रही हो तब से। अब मेरे बॉक्सर को निकाल दो।”

इतना सुनते ही मै बॉक्सर निकालने लगी। बॉक्सर निकालते ही मेरे सामने भैया का लण्ड था। भैया ने अब ज्यादा समय ना लेकर उन्होंने मुझे सीधा लिटा दिया, मेरी कमर के नीचे एक तकिया रखा।

और खुद अपनी पैंट की जेब से निकालकर कंडोम पहन लिया। फिर उन्होंने मेरे दोनों पैरों को फैलाकर अपने लंड को मेरी चुत पे रखकर एक जोर का धक्का मारा।

मै तो अब तक अनचुदी थी, तो मेरे मुंह से चीख निकल गई। भैया ने तुरंत मेरे होंठों को अपनी कैद में कर लिया, जिससे आवाज बाहर ना आये।

और भैया जोर जोर से धक्के लगाते रहे, पूरा लन्ड अंदर जाने पर थोडी देर के लिए रुककर मेरे बदन से खेलने लगे। इससे मेरा दर्द थोडा कम हुआ, और भैया फिर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।

पूरी चुदाई के दौरान मै दो बार झड चुकी थी। लगभग भैया मुझे १५ मिनट तक चोदते रहे, फिर उनका भी वीर्य निकल गया।

चुदाई खत्म होने के बाद मैंने देखा तो तकिये पर खून लगा था, जो मेरी झिल्ली फटने के कारण था। मुझसे ठीक से चला भी नही जा रहा था। मैने पेनकिलर खा ली और आराम करने अपने कमरे में चली गई।

दोस्तों यह मेरी पहली चुदाई की कहानी है। आपको कैसी लगी जरूर बताइयेगा। मै आपके कमैंट्स का इन्तजार करूंगी।

धन्यवाद।

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