चुदाई की दोस्त की चुदक्कड़ मम्मी की

दूसरे दिन नाश्ते की मेज पर मीठानंद बहुत खुश दिख रहे थे. प्रीति भी हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी. आज उसने घूंघट नहीं किया था और मीठानंद से बातें भी कर रही थी. गौरव को यह देखकर कुछ अजीब सा लगा. अपना काम निपटाने के बाद गौरव कॉलेज के लिये चला गया.

इधर प्रीति ने अपना सारा काम निपटाया और नहाने के लिये बाथरूम में चली गई. उसने अपने पूरे कपड़े उतारे और शॉवर चालू कर दिया. ठंडे पानी की फुहार उसके शरीर पर पड़ने लगी. नहा धोकर प्रीति सजी संवरी और मीठानंद के रूम की ओर चली गई.

मीठानंद प्रीति को देखकर खुश हुए और उसे अपने सीने से लगा लिया. प्रीति आज बहुत सुंदर दिख रही थी. उसने अपने होंठों पर लाल रंग की लिपस्टिक लगाई थी, जिसे देखकर मीठानंद फिदा हो रहे थे. उन्होंने प्रीति के होंठों को अपने होंठों के बीच दबाया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगे. उनका लौड़ा उनके पजामे ही खड़ा हो गया.

इधर गौरव पशोपेश में था कि आखिर उसकी मम्मी ने घूंघट क्यों नहीं किया और दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा क्यों रहे थे? उसका मन इन्हीं बातों में उलझा हुआ था. वह वापस अपने घर की ओर मुड़ गया. घर पर गया तो उसने दरवाजा खोला और हॉल में पहुंच गया. कोई नहीं दिखा तो वह दादाजी के कमरे की तरफ बढ़ा. वहां उसे हंसने और सिसकारियों की आवाजें आने लगीं. उसकी धड़कने बढ़ गईं. वह धीरे से दरवाजे तक पहुंचा और की-होल से झांका. झांकते ही उसके दिल की धड़कने इतनी बढ़ गईं कि उसकी आवाज उसे खुद सुनाई देने लगी. उसका शरीर कांपने लगा. उसने देखा कि दादाजी नंगे बिस्तर पर लेटे हैं और उसकी मम्मी अपने नर्म मुलायम लाल होंठों से दादाजी के कड़क लौड़े को अपने मुँह में लेकर चूस रही हैं. उसका सर चकराने लगा.

जैसे-तैसे गौरव ने खुद को संभाला और मेरे पास यानि बबलू के पास आया. मैंने उससे पूछा- क्या बात है गौरव? आज इतना उदास और परेशान क्यों है?
गौरव- कुछ नहीं यार. बस अजीब सा लग रहा है. मुझे ऐसे लग रहा है, जैसे मैंने लड़कियों को चोदकर काई गलत काम किया है.
मैं चौंका- यह तू क्या बोल रहा है गौरव.. तू तो सेक्स के लिये कुछ भी करने को तैयार हो जाता है? फिर आज क्या बात हो गई कि तुझे अपनी गलती पर पछतावा होने लगा?

गौरव कुछ देर नाटक करता रहा. उसने मेरे साथ सिगरेट पी और शाम को व्हिस्की के पैग भी लगाये. नशा होते ही उसन सारी बातें बता दीं.
मैंने उसे समझाया कि इस तरह टेंशन मत ले यार. यदि तेरी मम्मी ने किसी के साथ सेक्स कर लिया है, तो अब तो तू कुछ नहीं कर सकता है. तेरी मम्मी इतनी सेक्सी हैं कि कोई भी उनके साथ सेक्स करने को तैयार हो जाये.
“हां यार.. पता नहीं भगवान ने मेरी मम्मी को इतनी सेक्सी क्यों बनाया?” गौरव उदासी से बाला.

“अरे यार. तू ये सब बातें छोड़ और हो सके तो तू भी अपनी मम्मी के मजे ले ले.” मैंने उस समझाया.
“क्या बकवास कर रहा है यार? भला अपनी मम्मी को कोई चोद सकता है क्या?” गौरव गुस्से में बोला.
“हां चोद सकता है यदि उसकी मम्मी खुद चुदाने को तैयार हो तो.” मैंने कहा.
“भला मेरी मम्मी मुझसे चुदवाने को क्यों तैयार होंगी?” गौरव जिज्ञासा से बोला.

मैंने उसे अपना प्लान समझाया. वह तैयार हो गया. उधर उसके दादाजी मीठानंद ने गौरव के पापा के आने तक प्रीति की खूब चुदाई की. उनकी चूत जी भरकर मारी. गौरव के पापा आने के दूसरे दिन ही वह गांव चले गए ताकि उनका राज नहीं खुले.

कुछ दिन बाद गौरव के पापा को 5 दिनों के लिये फिर से टूर पर जाना पड़ा. ये बात गौरव ने आकर मुझे बता दी. दिन में गौरव की मम्मी अकेले रहती हैं. मैं उनके घर पर गया. गौरव मेरे पीछे पीछे ही था. मैंने घंटी बजाई तो प्रीति आंटी ने दरवाजा खोला, मुझे देखकर बोली- अरे बबलू तुम.. गौरव तो कॉलेज गया है.
“नहीं, मुझे आपस कुछ काम था आंटी.” मैंने कहा.
“मुझसे..? मुझसे भला क्या काम है बबलू?” प्रीति आंटी चौंकी.
“पहले आप मुझे एक गिलास पानी पिलाइये. फिर मैं बताता हूँ क्या काम है.”

प्रीति आंटी ने मुझ सोफे पर बैठाया और पानी लेने किचन में गईं. मैं उनके पीछे गया और किचन में उन्हें अपनी बांहों में भर लिया. प्रीति आंटी चिल्लाईं- यह क्या बदतमीजी है. कोई मैनर्स हैं या नहीं तुझमें.. आवारा लड़कों की तरह हरकतें कर रहे हो?
मैं धीरे से मुस्कुराकर बोला- मैं आवारा ही सही.. पर आपने तो सारी मर्यादा भुलाकर अपने ससुर के साथ चुदाई का खेल खेला है.

यह सुनना था कि प्रीति आंटी का चेहरा फीका पड़ गया. वह सकपकाकर बोलीं- क्या बकते हो.. होश में तो हो.. तुम अनाप-शनाप बक जा रहे हो.
“मेरे पास सबूत है इसका. आपके और दादाजी के सेक्स के दौरान लिये गए फोटो हैं मेरे पास. कहो तो आपके पति को दिखा दूं.”

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