गाँव की गोरियाँ देसी छोरियां

यह खेल चलता रहा! कुछ समय बाद मैंने सीमा को नीचे लिटाया और उसके दोनों पैर अपने कन्धों पर लेकर मेरे लण्ड को चुत में घुसेड़ कर जोर जोर से धक्के मारने लगा। सीमा भी मुझे कसकर पकड़कर ऊपर की ओर अपने कूल्हे उठाकर साथ देने लगी।

उधर सुजाता भी राहुल के लण्ड पर बैठ कर उछल रही थी। कुछ देर बाद हमने पार्टनर चेंज किया और मैं सुजाता को झुकाकर मेरा लण्ड उसकी गांड में डालने लगा. सुजाता ने पहले कभी गांड नहीं मरवायी थी तो उसे काफी दर्द हुआ और वो बिदकने लगी. जैसे कैसे मैंने सुजाता की गांड का उद्घाटन कर ही दिया और झटके मारने लगा. सुजाता को काफी दर्द हो रहा था पर वो शान कर रही इथी.

उधर राहुल ने सीमा को घोड़ी बनाकर उसकी चुत में अपना लण्ड घुसेड़ दिया और धक्के मारने लगा। जैसे ही वो झड़ने वाला था तो उसने अपना लण्ड निकालकर सीमा के कूल्हों पर सारा वीर्य छोड़ दिया और निढाल होकर जमीन पर लेट गया।

मेरा अभी झड़ा नहीं था तो अभी भी मैं सुजाता की गांड को बुरी तरह से चोद रहा था, अब तो वो भी मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी। सीमा और राहुल अब हमारी ओर देख रहे थे। सीमा के चहरे से लग रहा था कि उसे भी इस प्रकार गांड मरवाने की चाह होगी।

मेरा लण्ड वीर्य छोड़ने वाला था तो मैंने अपना लण्ड निकाल कर सुजाता के कूल्हों पर छोड़ा तो उसकी धार सुजाता की पीठ तक गयी।

अब सब शांत हो गए थे और सब साफ करके कपड़े पहन कर अपने अपने घर लौट गए।

मेरी कहानी पसंद आई या नहीं, मुझे मेल अवश्य करें!
मैं जरूर आपके लिए और कहानी लिखूंगा।
आपका रेक्स

Pages: 1 2 3 4 5