मासूम गर्लफ्रेंड के साथ पहली बार चुदाई पार्क में

आप सभी को मेरा नमस्ते कहते हुए अपना परिचय देना चाहूंगा. मेरा नाम रवि सिंह है. मैं अन्तर्वासना की कहानियों का बड़ा भक्त और एक नियमित पाठक हूँ. ये अन्तर्वासना पर मेरी पहली कहानी है.

आज मैं आपको अपनी वो सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ, जो कि मेरे साथ कुछ एक साल पहले घटी थी. यह कहानी मेरी और मेरी एक्स गर्लफ्रेंड की चुदाई की कहानी है. कैसे हम दोनों ने अपनी अपनी वर्जिनिटी लूज़ की, अपना कौमार्य भंग किया, पहली चुदाई की.

मेरी एक्स गर्लफ्रेंड का नाम श्रीतमा है. आज हम बहुत अच्छे दोस्त हैं. वह मुझसे अभी भी बहुत ज़्यादा प्यार करती है. उस समय हम दोनों अंजान थे, एक दूसरे को नहीं जानते थे. हम बस एक ट्यूशन क्लास में मिले थे. मुझे वह तभी से पसंद थी. उसका फिगर बहुत ही अच्छा और कामुक है. अगर कहा जाए तो सांवली लड़कियों की बात ही कुछ और होती है, ये बड़ी हॉट होती हैं.

मैंने जब पहली बार उसको ट्यूशन में देखान तो मुझे अजीब सी फीलिंग आई. लेकिन क्लास में घुसते ही मेरा नसीब तो तब खुला, जब मैं उसकी पीछे जाकर बैठ गया. मुझे लगा कि आज उससे बात करूँगा, लेकिन वैसा हो नहीं पाया.

लेकिन उस क्लास में मैंने उसको जी भर के निहारा. उसने एक शॉर्ट टॉप पहना हुआ था, इसलिए हिलते वक्त पीछे से उसका टॉप उठ जाता और मुझे उसकी मुलायम त्वचा दिख जाती. मेरा लंड तो मेरी पैन्ट से बाहर आने को उछाल मार रहा था.

फिर कुछ ऐसा हुआ कि मैं पागल ही हो गया. वो जब नोट्स अपनी दोस्त को दिखाने के लिए पीछे मुड़ी, तो उसकी चूचियों का पूरा खाका मुझे दिख गया. बस मैं तो उसकी चूचियों की उस दूधिया घाटी को देखता ही रह गया. उसको भी शायद इसका अहसास हो गया था; उसने झट से सीधे होकर अपने आप को ठीक कर लिया.

मैंने देर नहीं की और एक ही हफ़्ते बाद उसे प्रपोज़ कर दिया. उस वक्त तो उसने मेरे प्रपोजल का कोई जबाव नहीं दिया. लेकिन उसके चेहरे पर एक मीठी मुस्कान थी जिसने मुझे बड़ी राहत दी थी. वो सर झुका कर चली गई.

दो दिन बाद मैंने देखा कि वो मेरी तरफ बड़ी आशा भरी निगाहों से देख रही थी, तो मैंने उससे जबाव माँगा.
तो उसने सर नीचे करते हुए हां कर दी.

मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा था. मैंने उसको अपना फोन नम्बर देने के लिए उसका फोन मांगा. उसने अपना फोन मेरी तरफ बढ़ा दिया. मैंने उसके फोन से अपना नम्बर डायल कर दिया.

हम अब फ़ोन पर बातें करते और मैसेज पर भी लगे रहते. उसे मेरा नाम बहुत प्यारा लगा, पता नहीं क्यों.

मैं अब रुक नहीं सकता था, मैं उससे प्यार करने लगा था और उसे ढेर सारा प्यार करना चाहता था. लेकिन यह मेरी कामुकता थी. हम जब भी अकेले में मिलते, तो मैं उसे किस करता, उसके होंठों को छूता, जिसकी वजह से वो नशे में आ जाती और मुझे भी जोर जोर से किस करती. मुझे समझ आ गया था कि जल्दी ही मुझे उसे चोदना होगा. इसलिए मैंने उससे सेक्स चैट करने की कोशिश की, पर वह बहुत ही साधारण लड़की थी, उसे यह सब समझ नहीं आता था.

फिर वह दिन आया, जब मैं सफल हुआ. कुछ महीनों बाद 31 दिसम्बर का दिन आया. वो साल का आखिरी दिन था. मैंने और कुछ दोस्तों ने मिलने का प्लान बनाया, लेकिन मैंने अपना प्लान किसी को नहीं बताया.
हम सब शाम को 5 बजे पार्क में मिलने वाले थे, लेकिन मैंने श्रीतमा को सुबह 9 बजे बुलाया और उसे पता था कि हम एक साथ थोड़ी देर रहेंगे, तो हमारे लिए अच्छा होगा.

मैंने समय से पहले दुकान से जाकर कंडोम का दो पैकेट खरीद लिए. उसे नहीं पता था कि हम सेक्स करने वाले हैं. उसे लगा था कि रोज की तरह किसिंग और स्मूचिंग ही होगी, पर मैं उसे चोदने के लिए पूरी तरह से तैयार था.

मैं पार्क में 9 बजे चला गया, मैंने पार्क में जाकर सारी जगहों का मुआयना किया. मैं उधर ऐसी जगह ढूंढ रहा था, जहां कोई आता जाता न हो. मुझे वह जगह मिली, रिस्ट्रिक्टेड एरिया में, वहां कोई नहीं आता जाता था. वो जगह थोड़ी ऊंचाई पर थी.

अब मैं उसके आने का इंतज़ार कर रहा था. वो बस से उतर कर समय पर आ गई. आज वह कुछ ज़्यादा ही खूबसूरत लग रही थी. उसने एक सलवार कमीज पहनी थी और वह बहुत खूबसूरत दिख रही थी.

उसके आते ही मैंने उसके होंठों पर एक ज़ोर का किस किया और वो भी मुझे किस करने लगी. फिर हम दोनों एक बेंच पर जाकर बैठ गए और बातें की. मेरा हाथ उसकी कमर पर चल रहा था.

उसने पूछा- क्या बात है आज इतनी प्यार भरी नज़रों से क्यों देख रहे हो?
मैंने जवाब दिया- आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो.
उसने पूछा- क्यों.. रोज़ नहीं लगती क्या?

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