कच्ची कली कचनार की

मैं अपने दोस्त के घर पेईंग गेस्ट रहता था. मेरे दोस्त की कमसिन कच्ची कली जवान बेटी को मैं चोदना चाहता था क्योंकि वो बहुत सेक्सी और होट लगती थी। तो मैंने उसे कैसे चोदा?

दोस्तो, मेरा नाम अविनाश है और आज मैं एकदम कच्ची कली कचनार की चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूं। ये बात तीन साल पहले की है जब मैं सूरत में एक दोस्त के साथ एक ही रूम में रहते थे। मेरा दोस्त बिहार का था और मैं राजस्थान का। उस दोस्त की बीवी और उसकी 19 साल की लड़की और मैं … कुल 4 सदस्य रहते थे। लड़की 12वीं कक्षा की पढ़ाई कर रही थी।
हम किराये के मकान में रहते थे जिसमें 2 रूम ही थे। एक रूम में दोस्त और उसकी बीवी सोते थे और दूसरे में मैं और उसकी बेटी कोमल।

चूंकि हम दोनों दोस्त पैसे के मामले में कमजोर थे तो हम पैसा बचाने के लिए एक साथ रहते थे. मेरी बीवी राजस्थान के एक गाँव में हमारे पुश्तैनी घर में मेरे माँ बाप के साथ रहती थी. मैं यहाँ सूरत में नौकरी करके पैसा बचा कर घर भेजता था.

मेरे दोस्त की बेटी कोमल कम उमर में बहुत सेक्सी और होट लगती थी। मैं उसको रोज चोदने की सोचता था पर बोल नहीं पाता था।

कोमल को रोज रात मैं कोचिंग कराता था। पढ़ाते समय मैं उसकी गोल गोल चूचियों को खा जाने की नजर से देखता रहता था। जी करता था कि जोर से पकड़ के मसल डालूं पर हिम्मत नहीं होती थी। पढ़ाई के बीच बीच में मैं उसके साथ मस्ती करने लगता और जाने अनजाने उसकी चूची छू जाती थी तो मुझे करंट जैसा झटका लगता। कभी प्यार से उसके गाल भी खींच लेता था और पप्पी ले लेता था।
पढ़ते पढ़ते जब नींद आने लगती तो दोनों अलग- 2 सो जाते थे।

रात में मुझे रोज मुठ मारने की आदत थी। मैं मुठ मारता था तो कोमल का चेहरा मेरी आँखों के सामने रहता था।

मैं बैड पर सोता था और कोमल नीचे।
एक दिन मैंने सोचा कि कोमल सो गयी है तो मैं मुठ मार रहा था।

तभी अचानक कोमल पानी पीने के बहाने उठी तो मुझे मुठ मारते हुए देख लिया। मेरा लंड 7” का देखकर उसका भी मन शायद चुदाने के लिये मचल गया। मैंने तुरंत अपने ऊपर चादर डाल ली।
कोमल दिखने में तो बहुत मासूम लगती थी पर चढ़ती जवानी का असर भी दिख रहा था।

एक दिन उसकी किताब में किसी का लव लैटर लिखा हुआ मेरे हाथ लग गया।
मेरे दिमाग में आया कि ये साली बाहर मरवाती ही है, तो क्यों ना घर की इज्जत घर में ही रखूं। मुझे चुदाई करने की ठरक लगी हुई थी।

मैंने कोमल को बोला- ये लव लेटर मैं तेरे पापा को दूँगा।
तो वो डर गयी और मेरे पैर पकड़ के बोली- चाचू, आपको मेरी कसम! आप जो बोलोगे वो करूंगी पर पापा को मत दिखाना।
मैं तो बस मौके की तलाश में था, मैं बोला- ओके चल सोते हैं मगर एक ही बिस्तर पे।
उसने हंस के हां बोल दी।

अब मेरा लंड चुदाई के लिये फड़फड़ाने लगा। वैसे कोमल भी मेरे से चुदवाने के लिये बेकरार थी पर वो बोल नहीं पाती थी।

मैंने कोमल को बेड पे लिटा दिया। मैंने कोमल को छुआ तो उसका बदन बहुत गर्म लग रहा था. मैंने अपने होंठ उसके होंठों पे रख दिये।

उस दिन कोमल ने स्कूल ड्रेस ही पहन रखी था। मैंने उसके शर्ट के बटन खोल दिये।
हाय … क्या गजब की चूचियां थी उसकी … एकदम टाईट और गोल।

मैंने धीरे धीरे उसकी चूचियों को सहलाना शुरू किया और होंठ चूसे जा रहा था। उसके हाथ मेरा लंड सहला रहे थे। मेरा लंड धोंकनी के जैसे फुल गरम और कड़क हो गया था। कोमल भी चुदवाने के लिए तड़प रही थी।

मैंने उसकी चड्डी खोल दी। उसकी बुर पे हल्के बाल थे। एकदम छोटी सी बुर देखकर मैं पागल हो गया। मैंने उसको गोद में उठा लिया और किस करने लगा और उसकी बुर को सहलाने लगा। कोमल भी मेरे होठों का रसपान कर रही थी। उसे बहुत मजा आ रहा था। वो फुल गरम हो गयी थी।

अब मैंने उसको लिटा दिया और उसकी बुर चाटने लगा. वो आहह ईईई उउउ आआउच जैसी आवाजें निकालने लगी।

अपने लंड पे और उसकी बुर पे मैंने खूब सारा नारीयल का तेल लगा दिया ताकि लंड आसानी से बुर में घुस सके।

मैंने कोमल को पूछा- तेरी सील किसी ने तोड़ दी या फिर नहीं?
तो वो बोली- नहीं चाचू, ये आपके लिये ही कच्ची कंवारी रखे हुए हूं। आज आप ही मेरी पहली चुदाई करेंगे चाचू!
मैंने कहा- वाह मेरी जान, आज तेरी सील तोड़ के तुझे मेरी रंडी बना लूंगा।

उसकी कमर के नीचे मैंने प्लास्टिक बिछा दिया ताकि खून बिस्तर पे ना लगे।
अब मैं उसकी टांगें चौड़ी करके बीच में आ गया और लंड को उसकी चूत पे रख के धीरे से धक्का मारा. मगर लंड बहुत मोटा होने की वजह से बुर में घुस नहीं रहा था।
मैं बोला- कोमल थोड़ा दर्द सहन करने के लिये तैयार रहना।

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