दोस्त की कुंवारी मौसी को चोदा

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार. मैं नियमित रूप से अन्तर्वासना का पाठक हूँ. इधर की ढेर सारी कहानियां पढ़ने के बाद सोचा कि मैं भी अपनी जिंदगी की सेक्स लाइफ के रंगीन लम्हे आपसे शेयर करूँ.

यह कहानी मेरे पहले सेक्स की है, जो मैंने पड़ोस के लड़के की मौसी के साथ किया था. मैं पुणे (महाराष्ट्र) से हूँ, मेरी उम्र 20 साल है. अपनी बॉडी की बात करूँ, तो एकदम ठीक ठाक है और मैं 7 इंच लम्बे लंड का मालिक हूँ.

यह कहानी तब की है, जब मैं जवानी की दहलीज पर था. मेरे पड़ोस में एक लड़का रहता था, उससे मेरी अच्छी दोस्ती थी. उसकी मौसी जो 21 साल की थी, जो उसके यहां रह कर पढ़ने के लिए आई थी. पहले तो मेरे दिमाग में उसके लिए कुछ भी गलत विचार नहीं थे.

एक दिन पढ़ाई के कुछ डाउट थे, इसलिए मैं उसके घर गया. दरवाजा खुला था तो मैं सीधा अन्दर चला गया. उसके घर पर कोई नहीं था. मैं उसे ढूंढने लगा तो बेडरूम में घुस गया, दरवाजा थोड़ा खुला था.. तो मैंने अन्दर झाँक कर देखा तो दोस्त की मौसी कपड़े चेंज कर रही थी.

मैं उसके नंगे बदन को देख कर भौंचक्का रह गया. दूध के जैसे उसका गोरा और कटीला बदन.. उसके 32 साइज के चुचे और काले बालों से लिपटी हुई सुंदर सी गोरी चुत.. उसका 32-26-34 के मदमस्त साइज का बदन कहर ढा रहा था. मेरी जवानी तो उसका नंगा बदन देखकर उफान मारने लगी थी. मेरे अन्दर भी हलचल मचने लगी.

तभी उसे आहट हुई कि मैं उसे देख रहा हूँ, तो वो बाहर आने लगी. मैं जल्दी से वहां से निकल गया और पहली बार उसके नाम की मुठ मारी.

वैसे तो मैं रोज उससे मिलता था, पर उस दिन के बाद से मैं उससे पढ़ने के लिए रोज जाने लगा. वो भी मुझे बड़े मन लगा कर पढ़ाती थी.

एक दिन वो कॉलेज से थक कर आई थी, मैं उसके घर गया, तो देखा वो सो रही थी. सोते वक्त वो बहुत ही प्यारी लग रही थी. मैं उसकी बाजू में बैठ गया और उसके चेहरे पे प्यार से हाथ फेरने लगा. तभी उसने करवट ली. उस दिन उसने साड़ी पहनी थी, तो करवट लेते ही उसका पल्लू साइड में हो गया और उसके रसीले चुचे मेरे सामने आ गए.

मैं इसी की फिराक में था, पर डर रहा था कि उठ गई तो मेरी तो लग जायेगी. मैंने डरते डरते उसकी एक चुची पे हाथ रखा. कोई हलचल नहीं देखी तो मेरी हिम्मत बढ़ गयी और मैं चुचियों को मसलने लगा. फिर धीरे से उसके होंठों पे किस किया.. तभी वो जागने लगी थी. मैं संभल गया और मैं वहां से निकल गया.

अब मैं रोज उसके सोने के टाइम पे जाता और रोज उसकी चुचियों को मसलने लगा. ऐसा रोज करके मुझे मजा आने लगा.

एक दिन ऐसे ही मैं उसके घर गया, तो चुचे मसलने के बाद मैंने देखा कि उसका टॉप थोड़ा ऊपर उठा हुआ था. पजामे से पैंटी की स्ट्रिप दिख रही थी. मैंने सोचा आज बुर की दीदार किया जाए. मैंने एक हाथ उसके पजामे में डाल दिया और उसकी बुर पे हाथ से सहलाने लगा था. उसकी बुर गीली थी, ये मुझे थोड़ा सा अजीब सा लगा. मैंने एक उंगली बुर में घुसा दी, तभी वो हल्के स्वर में चीख़ मारते हुए उठकर बैठ गयी. मैं बहुत डर गया और उससे माफी मांगने लगा. मुझे ऐसा घबराया देख कर वो हँसने लगी और मुझे गले से लगाकर बोली- इतने दिनों से मजे ले रहे थे, तब नहीं डरे.. आज क्यों डर रहे हो?

मैं सुनता रह गया, मैंने मन में सोचा कि साली लौंडिया खुद मजे ले रही थी.. तभी इसकी बुर गीली थी.

फिर उसने मेरे होंठों पर होंठों रखे और हम दोनों एक दूसरे को दस मिनट तक चूमते रहे. फिर उसने मेरे कपड़े उतार दिए और मैंने उसकी टॉप उतार दिया. उसकी नंगी रसीली चुचियां मेरे सामने आ गईं. मैंने झट से उसकी एक चुची मुँह में दबा ली और चूसने लगा. वो जोर जोर से मादक सिसकारियां लेने लगी ‘आह ऊंह उम …’
मैं भी पूरी लगन से एक एक करके उसकी दोनों चूचियों को निचोड़ रहा था. आज मुझे ऐसा करने में ज्यादा मजा आ रहा था क्योंकि जब लड़की भी सामने से रेस्पॉन्स दे रही हो, तो ज्यादा मजा आता है.

थोड़ी देर चुची मसलते मसलते एक हाथ बुर पे ले गया और कपड़ों के ऊपर से उसकी कुंवारी बुर को मसलने लगा. वो और भी गर्म हो गयी, उसने अपनी टांगें फैला दीं और बुर की रगड़वाई का पूरा मजा लेने लगी. मैं भी उसकी बुर में उंगली करके उसके दाने से खेलने लगा. उसकी बुर के नन्हे से दाने को अपनी दो उंगलियों के बीच में दबा कर जैसे ही मसला उसकी आह निकल गई और वो एकदम से गरमा गई.

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