लेडी कस्टमर को चोद कर गर्भवती किया

अब उसने मुझे दुविधा में डाल दिया. ऐसे मोड़ पर ना तो मैं उसके साथ जबरदस्ती कर सकता था और न ही पीछे हट सकता था.

मैंने सोचा- भागते हुए भूत की लंगोटी ही सही.
मैंने कहा- ठीक है, इसको चूस ही दो. सेक्स फिर कभी कर लेंगे.
मेरे कहते हुए उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया. आह्ह … उसके गर्म गर्म मुंह में लंड जैसे ही अंदर गया, मैं तो जन्नत की सैर पर निकल गया.

वो मेरे लंड को चूसने लगी. आह्ह … इस्स … आह्हा … करके मेरे मुंह से मजे के मारे सिसकारियां निकलने लगीं. मादरचोद बहुत ही मस्ती भरने वाला अहसास था वो. औरत के मुंह में लंड देकर चुसवाने का भी निराला ही सुख होता है.

उसको भी मेरे लंड में कुछ ज्यादा ही रस मिल रहा था. वो मेरे लंड को बड़ी ही तबियत से चूस रही थी. मगर पूरा लंड अंदर नहीं ले जा रही थी. आधा लंड जाते ही फिर से ऊपर आ जाती थी.

मैंने उसका सिर पकड़ लिया और उसके सिर को दबाते हुए उसके मुंह को अपने लंड पर नीचे दबाने लगा. मैं तेजी के साथ उसके मुंह के चोपे अपने लंड पर लगवाने लगा. वो गूं-गूं-गूं-गूं की आवाज करने लगी.

बीच-बीच में वो लंड को निकालने के लिए इशारा करती लेकिन मेरे सिर पर जैसे हवस का भूत सवार था. मैं अपने हाथों को विराम तो दे रहा था लेकिन उसके मुंह से लंड को बाहर नहीं निकाल रहा था. बीच बीच में कुछ पल के लिए अपनी पकड़ को ढीली छोड़ देता था और वो हौले-हौले मेरे लंड को चूसने लग जाती थी.

कुछ देर उसको आराम देकर मैं फिर से उसके मुंह को लंड पर दबा देता था. इस तरह से मैं उसके सिर को पकड़ कर पूरा लंड उसके गले तक घुसा देता था. लंड जितना उसके गले में गहराई तक जाता था मुझे उतना ही मजा आ रहा था.

वो भी अब सहज हो गयी थी और लंड को आराम से अंदर तक ले जा रही थी. अब वो पूरा लंड अपने मुंह में लेकर मजे से चूसने का आनंद ले रही थी. इधर मेरे लंड की नसें जैसे फटने को हो गयी थीं. उसके मुंह को चोदने में जो मजा मिल रहा था उससे सुखद अहसास उस वक्त कोई भी नहीं था.

तकरीबन 15 मिनट तक मैं उसको अपना लंड चुसवाता रहा. उसका मुंह एकदम से लाल हो गया. उसकी सांस फूल गयी.
वो बोली- बस … मुंह दुखने लगा है अब … निकाल भी दो.
मैंने कहा- जान … ये तो अपने आप ही निकलेगा.

इतना कह कर मैंने फिर से उसके मुंह को अपने लंड पर दबा दिया और उसके सिर को पकड़ कर जोर जोर से अपने लंड की मुखमैथुन उससे करवाता रहा.

दो मिनट के बाद मेरा वीर्य पूरे उबाल पर आ गया और अब किसी भी पल वो लावा बाहर फूट सकता था.
मैंने सिसकारते हुए पूछा- आह्ह … जानेमन … होने वाला है, कहां निकालूं अपने माल को?

उस औरत ने उसके मुंह की लार से सने मेरे लंड से मुंह ऊपर करके हांफते हुए कहा- आह्ह मुंह में ही।
उसके बाद फिर से उसने मेरे लंड पर मुंह दे दिया और चूसने लगी.

कुछ पल के बाद ही मेरे लंड से मेरे वीर्य की पिचकारी फूट कर उसके मुंह में गिरने लगी. आह्ह … हाह… ओह … याह … करते हुए मैंने पूरा माल उसके मुंह में खाली कर दिया. मेरे वीर्य की एक बूंद बूंद को उसने निचोड़ लिया और अंदर ही पी गयी. बाहर उसने एक बूंद भी नहीं गिरने दी.

वीर्य स्खलन होते ही मैं ढीला पड़ गया और उसने भी राहत की सांस ली. एक मिनट तक उसने मेरे लंड को मुंह में ही रखा. अब मेरा लंड फिर से अपने छोटे आकार में आने लगा था. फिर उसने लंड को बाहर निकाल दिया और उसको चाट कर बिल्कुल साफ कर दिया.

दोस्तो, उसको लंड चुसवाने में भी चुदाई से कम मजा नहीं आया. वो लंड की काफी प्यासी लग रही थी. फिर हम दोनों शांत हो गये. रात के 11 बज गये थे. अभी तो पूरी रात बाकी पड़ी थी.

चूंकि उसने चुदने के लिए मना कर दिया था इसलिए मुझे अब कोई और तरकीब लगानी थी. थोड़ी देर तक लेटे रहने के बाद मैंने पूछा- मैं तो शांत हो गया लेकिन तुम्हारी चूत भी तो गीली हो रही होगी.

वो बोली- हां, लेकिन मुझे तुम्हारे लंड से डर लग रहा है.
मैंने कहा- तो मैं कब कह रहा हूं कि मैं तुम्हें अभी चोद दूंगा, एक बार दिखा तो दो कि क्या हाल है तुम्हारी गुफा का?

मेरे कहने पर उसने अपनी टांगें मेरे सामने चौड़ी फैला दीं. मैंने उसकी चूत को फांकों को खोल कर देखा. उसकी चूत से पानी चू रहा था.
मैंने उसकी चूत पर जीभ से चाट लिया. ऐसा करते ही उसके मुंह से सिसकारी निकल गयी.

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