मामी की गांड चोद कर सुहागरात मनायी

उस दिन चुदाई करने के बाद हम दोनों बेड पर लेट हुए बातें कर रहे थे. मामी ने कहा कि मैंने अपने जीवन में कभी इतनी जबरदस्त चुदाई नहीं की है. तुमने मुझे अपनी पत्नी की तरह संतुष्ट कर दिया है, जो कि मेरे पति का काम था. इसलिए अब से तुम ही मेरे असली चुदाई वाले पति हो.

इस बात पर मैंने कहा- मामी जी, पति को तो अपनी पत्नी की कुंवारी बुर मिलती है ना? पर मुझे नहीं मिली. चलो कोई बात नहीं, वो मेरे मामा जी ने मार ली है, पर मुझे भी आपकी कुंवारी मिल सकती है.. लेकिन जब आप दोगी तब.
मामी जी- मेरी क्या चीज कुंवारी बची है, जो कुछ मैं अपने चोदू पति को दे सकती हूं?
मैं- मामी जी आपके पास आपकी कुंवारी मख़मली गांड है, मैं आपके साथ सुहागरात में आपकी गांड मारना चाहता हूँ.

मामी जी इस बात से खुश हो गईं और वो इसके लिए तैयार भी हो गईं. मामी जी ने और मैंने, हमारे ख़ुद के पास वाले फार्म हाउस में सुहागरात मनाने का प्लान बनाया. इसके लिए हमने तैयारी की. बाजार गए, जनरल स्टोर से बॉडी मालिश करने के सामान खरीदे, कुछ कपड़े और खाने का सामान लेकर शाम को फार्म हाउस जा पहुंचे.

फार्म हाउस मैं हमारा बूढ़ा वॉचमेन रमेश अपनी दूसरी पत्नी रूपा के साथ वहीं रहता है. रूपा एक ज़वान औरत है, पर मजबूरी में उसे एक बूढ़े से शादी करनी पड़ी. हम जब फार्म हाउस पहुंचे तो उसने ख़ुशी से हमारा स्वागत किया.

रमेश- अरे छोटे मालिक, बहुत दिनों बाद आपके दर्शन हुए.
मैं- बात ही कुछ ऐसी है, मामी जी की तबियत खराब है और डॉक्टर ने उन्हें खुली हवा में रहने के लिए कहा है, तो हम दो दिनों के लिए यहां रहने आए हैं.
रमेश- अरे वाह, आप यहाँ पर रुकने वाले हैं.. बड़ी बहू भी, चिंता ना करें. यहां बहू की तबियत ठीक हो जाएगी. मैं भी आपके घर आकर दो दिन के लिए जाने की कहने की सोच रहा था. लेकिन आप फ़िक्र ना करें आपकी सेवा में ये रूपा यहीं रहेगी. मैं इसे अकेले छोड़ कर नहीं जा पा रहा था. अब आप लोग आ गए तो मुझे किसी बात की चिंता नहीं है.

मेरी निगाह रूपा के मस्त उठे हुए मम्मों पर थी जोकि रूपा ने भी भांप लिया था.

फिर बूढ़ा रमेश जाने की तैयारी करने चला गया और रूपा ने हमें खाना खिलाया, खाना रूपा ने बनाया था, तो उसे मैंने रूपा को सौ का नोट उपहार स्वरूप देकर कहा- खाना खाकर मन प्रसन्न हो गया.
वो शरमाते हुए चली गई.

उसके बाद मैंने रमेश से कहा- हम आज रात हम ऊपर सोने वाले हैं.. तो हमारा बिस्तर ऊपर छत पर लगवा देना.

उसके बिस्तर लगवा देने पर मैंने उसे एक बियर की बोतल दी, वो खुश होकर चला गया. वो पास के बैलों की शेड की तरफ बनी हुई झोपड़ी में सोता है.. लेकिन आज उधर रूप ही अकेली रहने वाली थी.

हमारा फार्म हाउस दो मंजिला बना है, जिसके चारों ओर तारों की बाड़ है, जिसके मेनगेट बंद होने पर कोई भी अन्दर नहीं घुस सकता है.

रात हो गई थी, खेतों में आठ बजे के बाद ही ऐसा महसूस होने लगता, जैसे शहरों में रात ग्यारह बजे के बाद लगता है. रात में सिर्फ मैं और मेरी मामी ही फार्म हाउस में थे.
मैंने फार्म हाउस का गेट बंद कर दिया. मैंने मामी से कहा- आप नीचे बाथरूम में नहा लीजिए और तैयार हो जाएं.
मैं ऊपर छत पर बेड लगवाकर पर चुदाई की तैयारी करने लगा. मैं सोच रहा था कि मामी की मखमली मोटी गांड आज जम कर मारूँगा.

कुछ ही में समय मामी जी नहाकर तैयार हो गईं और सज संवर कर ऊपर आ गईं. मामी बहुत ही हसीन लग रही थीं. एकदम नई दुल्हन सी लग रही थीं.

मुझसे रहा नहीं गया और फिर मैंने मामी जी को पैरों और कमर से पकड़ कर बाँहों में उठा लिया और बेड पर लिटा दिया.
मैंने मुस्कुराते हुए मामी जी से कहा- आई लव यू मामी जी.
मामी जी ने भी ‘लव यू टू जानू…’ कहा.

इसके बाद मैं उनके ऊपर आ गया, मैंने उनके माथे को चूमा, फिर उनके गुलाबी होंठों पर होंठ रख दिए और उनको चूमने लगा. उसी बीच मेरे हाथ उनके पल्लू में से पीठ, कमर पर होते हुए उनके स्तनों पर पहुँच गया. मेरा हाथ उनके ब्लाउज के ऊपर से उनके स्तनों को दबा रहा था. उनकी आँखें पूरी तरह से बंद थीं.. और वो उसका पूरा मजा ले रही थीं.

उसके बाद उनके पल्लू को मैंने उनके कन्धों से हटाया और वो एक तरफ गिर गया, साथ ही साड़ी का दूसरा हिस्सा जो पेटीकोट में घुसा हुआ होता है, उसे भी बाहर की तरफ खींच कर निकाल दिया. और इस तरह मामी की साड़ी पूरी तरह से निकाल दी. साड़ी निकालने की वजह से वो बेड से उठ गई थीं, अब वो मेरे सामने पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी थीं.

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