मामी की गांड चोद कर सुहागरात मनायी

इतने में मैंने ब्लाउज के बटन खोलकर, उसे भी निकाल दिया. उनके मस्त मम्मों के ऊपर कसी हुई गुलाबी रंग की ब्रा सामने आ गई. फिर मैंने मामी की ब्रा के हुक भी खोल दिए तो उनके बड़े बड़े स्तन आजाद हो गए. अब मैं उनके बड़े बड़े स्तनों को बारी बारी से अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.

वो ‘आआ हाआ ऊऊन्न्ह ऊऊ म्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआ..’ करने लगी थीं. नीचे देखा तो उनके पैर मेरे पैरों पर रेंग रहे थे.

मैं फिर से ऊपर आकर उनके निर्वस्त्र स्तनों पर जीभ फेरने लगा. मामी के मुँह से तो बस मादक सिसकारियां निकली जा रही थीं- अह्ह्ह ह्ह्ह्ह.. मम्म.. और जोर से.. म्मम्मम्म…

मामी जी के स्तनों को दबाते हुए मैं नीचे उनके पेट पर आ गया और पेट पर जीभ फिराने लगा. मैं उनकी गहरी और गोल नाभि में जीभ डाल कर गोल गोल घुमाने लगा.

फिर मैं धीरे धीरे से अपना हाथ मामी जी के पेटीकोट के नाड़े पर ले गया और उसे ज़ोर से पकड़ कर खींच डाला, जिससे मामी का पेटीकोट एकदम से नीचे गिर पड़ा. मामी जी अब पिंक कलर ब्रा पैंटी में मेरे सामने थीं. मैंने उन्हें फिर से लिटा दिया.

मैं अब अपना मुँह मामी की पैंटी के पास ले गया और मामी की चूत को ऊपर से ही चूसने लगा. फिर मैंने उनकी पैंटी को पकड़ा और झटके से उनकी पैंटी निकाल दी. उनकी चूत मेरे सामने आ गई.

छत पर चांदनी रात में नंगी मामी.. क्या मस्त माल लग रही थीं. मामी जी की चूत, रात में एकदम चमाचमा उठी. उनकी चिकनी चूत कामरस से भीगी हुई थी.

इस तरह चूत के दर्शन करने के साथ मैंने अपनी जीभ उनकी चूत में घुसा दी मामी जी एकदम से तिलमिला उठीं. फिर मैं धीरे धीरे उनकी चूत को जीभ से सहलाने लगा. मैं उनकी चूत की दोनों पंखुड़ियों के बीच की दरार में अपनी जीभ नीचे से ऊपर करके चुत चाटने लगा.

मामी की सांसें तेज होने लगीं- आआह्हह्ह.. उईई.. ओह्ह.. अई..
वे मादक सिसकारियां भरने लगीं.

मैं मामी की चूत चुसाई करता रहा. उन्होंने अपनी दोनों टाँगों को उठा कर मेरे कन्धों पर रख दिया और मेरा सर अपने हाथों से अपनी चूत पर दबा दिया. मैं समझ गया कि अब वो झड़ने वाली हैं. मैं जोर जोर से अपनी जीभ मामी की चूत में अन्दर बाहर कर रहा था. वो बहुत ही उत्तेजित हो गई थीं, इसलिए ज्यादा समय तक सह नहीं सकीं और उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

मैंने चूत को चाट कर साफ दिया. चूत चुसाई से अब चूत का काम हो गया था.

अब मैंने अपने आज के मुख्य लक्ष्य की तरफ़ जाने का फैसला किया यानि कि मामी की गांड मारने की तरफ आ गया.

मैंने मामी जी को पलटने के लिए कहा. वो उठीं और पेट के बल लेट गईं. अब मेरे सामने मामी जी के चूतड़ थे, जिनको सिर्फ़ देख कर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था.
मैं- वाह, क्या गोल गोल चूतड़ हैं मामी जी आपके… इनकी संगत में आपकी गांड चुदाई में बहुत मजा आएगा.
मामी जी- सच राहुल तुम्हारे मामा जी ने तो आज तक इसको छुआ तक नहीं, एक बार गांड मारने का प्रयास किया था, लेकिन उस दिन क्या हुआ कि जब वह पीछे से अन्दर डालने का प्रयास करते, तो उनका लंड मेरे बड़े बड़े चूतड़ की गोलाई में ही फंस कर रह जाता था, क्योंकि उनका लंड छोटा है. इसके बाद उन्होंने कभी गांड मारने का प्रयास नहीं किया. वो कहते थे कि तुम्हारी गांड बहुत मोटी है.. इसलिए मुझे गांड मारना पसंद नहीं है.
मैं- अरे गांड मारना भी बड़े भाग्य से मिलती है.. आपकी इस सेक्सी गांड को तो मैं ही मारूंगा. चलो अब पीठ की मालिश कर देता हूँ.

मैंने एक हाथ में ढेर सारा तेल डालकर उनकी पीठ पर दोनों हाथों से मालिश करना शुरू कर दिया. पीठ से होते हुए मेरे हाथ अब उनकी कमर की मालिश कर रहे थे. कमर की मालिश करते वक़्त मेरे हाथ उनके चूतड़ों पर टच हो रहे थे. वाह क्या मुलायम और बड़े बड़े चूतड़ थे, जो न जाने कितने दिनों से मुझे दीवाना बना रहे थे.

मामी की कमर की मालिश के बाद मैंने उनकी टाँगों को थोड़ा खोल दिया. फिर उनके चूतड़ों के नीचे एक तकिये को रखा तो उनके चूतड़ ऊपर की तरफ उठ गए, जिससे मामी की चूत और गांड साफ दिखाई दे रहे थे. मैंने उनके चूतड़ों पर तेल डाल दिया. तेल उनके चूतड़ों पर फैलाकर मालिश करने लगा, फिर धीरे से चूतड़ दबाने लगा. उनके चूतड़ों पर मेरे हाथों का स्पर्श पाकर मामी मस्त हो गई थीं. उनके मुँह से हल्के हल्के स्वर में कामुक सिसकारियां निकल रही थीं. वो ‘अहह.. सस्स्सस्स.. अहह..’ कर रही थीं.

मैंने अपनी एक उंगली तेल से भिगो कर उनकी गांड के छेद लगा कर कुछ देर तक सहलाया, फिर और तेल से भिगोकर उंगली को मामी जी की गांड में धीरे से करीब आधा इंच अन्दर डाल दी. इससे वे मचल उठीं और उनकी सिसकारी निकल गई.

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