मामी की गांड चोद कर सुहागरात मनायी

थोड़ी देर वैसे ही उंगली को मामी की गांड के अन्दर रहने दी. इसके बाद धीरे धीरे मैंने पूरी उंगली मामी जी की गांड में घुसा दी. फिर मैं उंगली को थोड़ा थोड़ा हिलाने लगा और अन्दर बाहर करने लगा.

अब मेरी एक उंगली आसानी से अन्दर बाहर हो रही थी, तो मैंने अपनी दूसरी उंगली भी मामी जी की गांड में घुसा दी, जिसकी वजह से उनको थोड़ा सा दर्द हुआ, लेकिन उन्होंने कहा कि अपना काम करते रहो.

फिर मैं धीरे धीरे उंगलियों को दोनों तरफ घुमाना शुरू कर दिया, साथ ही साथ अन्दर बाहर भी कर रहा था, जिसके कारण गांड में थोड़ी सी जगह बन गई.

अब यही मौका था उनकी गांड में लंड डालने का. मेरा लंड गांड में घुसने के लिए बेताब हुए जा रहा था. मैंने अपने लंड पर ढेर सारा तेल लगा दिया, खास कर लंड के सुपारे पर.. और साथ ही साथ एक बार फिर थोड़ा तेल लेकर मैंने गांड के छेद में और उसके आसपास मल दिया.

इसके बाद मैंने मामी जी से कहा- आप अपनी गांड को ढीली रखना, अगर दर्द होने लगे तो बता देना, सिर्फ जरा सा दर्द होगा, जैसा पहली बार चूत चुदवाने में होता है वैसा ही होगा बस.

मैंने अभी तक उनकी गांड पर लंड नहीं रखा था. मैंने मामी जी से कहा आपके नितम्ब बहुत ही बड़े बड़े हैं, तो आप अपने हाथों से उन्हें चौड़ा कीजिए.

तो मामी जी ने अपने दोनों हाथ पीछे किए और अपने नितम्बों को पकड़ कर उन्हें चौड़ा कर दिया, इससे गांड का छेद भी और खुल गया. फिर मैंने मामी जी कि कमर को जोर से पकड़ लिया और लंड का सुपारा गांड के छेद पर लगा दिया. गांड पर लंड का गर्म गर्म स्पर्श होते ही उनके बदन में एक सिहरन सी दौड़ गई.

मैंने धीरे से अन्दर की ओर दबाव बनाया पर मेरा लंड फिसल गया. मैंने यह कई बार प्रयास किया, किन्तु लंड हर बार फिसल रहा था. इधर उत्तेजना से मेरा हाल बुरा हो रहा था, लग रहा था कि मैं ऐसे ही झड़ जाऊँगा.. और उधर मामी जी की भी साँसें बहुत तेज चल रही थीं.

मैंने अपने एक हाथ से अपने लंड को सहारा दिया, जिससे कि वो अब बाहर ना निकल पाए. फिर दुबारा अपनी कमर से दबाव बनाया.

अबकी बार मेरे लंड का थोड़ा सा सुपाड़ा मामी जी की गांड में चला गया, जिसकी वजह से तो वो ज़ोर से चीख पड़ीं- आईईईईई मैं मर गई.. आज तो फाड़ ही दो मेरी इस गांड को आह्ह्ह्हह्ह.. आज मुझे वाकयी में लग रहा है कि मेरी असली सुहागरात तो आज ही है. इतना दर्द तो मुझे पहली सुहागरात को भी नहीं हुआ था. उई.. आह.. राहुल क्या लंड है आपका.. मार दो मेरी गांड.. फाड़ दो.

मुझे मालूम था कि मामी को दर्द हो रहा है.. लेकिन वो मुझे अपनी गांड मारने के लिए उकसा रही हैं. ये उनका साहस ही था, जिसे देख कर मैं खुश हो गया.

लेकिन अभी दर्द होना बाकी था. इसलिए मैं कुछ देर तक वैसे ही रुका रहा. कुछ देर रुक कर एक बार फिर से जोरदार झटका मारा. इस बार तो मेरा लंड का पूरा सुपाड़ा उनकी गांड में समा गया.

मेरा सुपाड़ा उसकी गांड में घुसते ही वो दर्द मिश्रित आवाज में बोलीं कि राहुल थोड़ा आहिस्ते आहिस्ते डालना.. प्लीज़ दर्द हो रहा है.. मैं पहली बार गांड मरवा रही हूं.
मैंने कहा- अरे आप डरो मत सिर्फ थोड़ा सा ही दर्द होगा.

अब में सिर्फ़ अपने सुपाड़े को ही धीरे-धीरे उनकी गांड में अन्दर बाहर करने लगा था. ऐसे ही थोड़ा सा अन्दर बाहर अन्दर बाहर करते करते एक ही झटका मारा, जिससे उनकी चीख निकल गई. मेरा लंड उनकी गांड को चीरता हुआ 2″ अन्दर तक घुस गया था. मैं थोड़ा रुक गया और बड़े प्यार से उनकी पीठ को सहलाता हुआ चूमने लगा.

उसके बाद एक बार मैंने अपने लंड को थोड़ा सा बाहर खींचा और फिर से एक धक्का और लगा दिया. इस बार लगभग मेरा आधा लंड, गांड की गहराई में उतर गया. मामी के मुँह से फिर से चीख निकल गई- इईईई.. श्श्शशश.. अआआआ.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ह्ह्हह..

इस बार आवाज तेज निकल गयी थी. सुनसान जगह और रात का समय था सो उनकी चीख जरा ज्यादा ही तेज लगी. मैंने उनको बताया कि रूपा भी सुन सकती है तो वे चुप हो गईं.

उनका बदन थोड़ा सा अकड़ गया. फिर मैं अपने हाथ से मामी जी के बदन को सहलाने लगा, जिस से वो नॉर्मल होने लगीं.

मामी जी की गांड और मेरे लंड पर तेल लगाने से गांड बहुत ही चिकनी हो गयी थी, जिस कारण गांड लंड आसानी से घुस रहा था. मैंने जितना सोचा था, गांड मारना उतना ज्यादा टफ नहीं लगा.

अब तक मेरा आधा लंड मामी जी की गांड में घुस चुका था. ये मेरी आधी जीत थी. मैं ऐसे ही आधे लंड को अन्दर बाहर कर के मामी जी की गांड मारने लगा और थोड़ा थोड़ा अन्दर घुसेड़ता भी जा रहा था, जिससे लंड का काफी हिस्सा गांड के अन्दर घुस गया था. अब ऐसे करने से मामी जी की गांड का छेद भी थोड़ा खुल चुका था.

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