मस्तराम जवानी चुत चुदाई

मम्मी ने चाय बना कर दी. मैंने चाय पी और पार्क में अपने दोस्तों के साथ खेलने लगा.

शाम को थोड़ी देर टीवी देखा फिर रात का डिनर करने के बाद मैं अपने रूम में सोने चला गया. मेरी आदत है कि मैं गर्मियों में अपने रूम में बिल्कुल नंगा होकर सोता हूं क्योंकि मेरे रूम में अटैच्ड बाथरूम भी है तो मुझे किसी भी काम के लिए सुबह तक बाहर नहीं जाना होता.

आज मैं सोने की कोशिश कर रहा था और मुझे सरिता की याद आ रही थी. फिर मैंने एक प्लान बनाया और सोने की कोशिश करने लगा था कि मैं कल सुबह जल्दी उठ कर दोपहर को अपने प्लान पर काम कर सकूं.
उस रात को नींद आने के बाद मैंने सरिता को सपने में चोदा.

सुबह उठा तो मम्मी ने बोला- बेटा, रात का दूध फट गया है … तुम मदर डेयरी जाकर दूध ले आओ … तो मैं चाय बनाऊं.
मैं दूध का बर्तन लेकर मदर डेयरी चला गया. मैंने मदर डेयरी पर टोकन खरीदा और लाइन में लग गया, लेकिन मैंने देखा कि मेरे आगे सरिता भी दूध की लाइन में लगी हुई थी. मैंने उसे हाय कहा, उसने भी मुझे हाय कहा.

मैंने उससे पूछा- आज दोपहर में कब आओगी?
उसने कहा- मैं 1:00 बजे आऊंगी.
मैंने कहा- ठीक है.

मैं दूध लेकर घर आ गया, मम्मी ने चाय बनाई नाश्ता तैयार कर दिया. मैंने और पापा ने नाश्ता किया. पापा अपने ऑफिस चले गए … मैं भी अपने दोस्त के घर जाने के लिए तैयार हुआ.

मम्मी ने पूछा- कहां के लिए तैयार हो रहे हो?
तो मैंने बताया कि मैं सोनू के घर जा रहा हूं … मुझे कुछ काम है.
मम्मी ने कहा- बेटा 11:00-11:30 बजे तक जरूर घर आ जाना क्योंकि नयना आंटी के घर पर कीर्तन है और मैं 12:00 बजे कीर्तन में जाऊंगी. उधर से मुझे आते हुए शाम हो जाएगी, मैं तुम्हारे लिए लंच बनाकर रख दूंगी. तुम अपना दोपहर में लंच कर लेना और और घर की देखभाल करना. मैं शाम को 6:00 बजे तक वापस आऊंगी.
मैंने ये सब जाना तो खुश होते हुए कहा- ठीक है … मैं 11:00 बजे तक घर आ जाऊंगा.

मैं सोनू के घर पर अपना काम निपटा कर 11:00 बजे घर पर वापस आ गया. मम्मी तैयार हो रही थीं. नयना आंटी हमसे पीछे वाली गली में रहती हैं.

ठीक 12:00 बजे मम्मी नयना आंटी के घर चली गईं. मैंने अलमारी में से अपना पजामा निकाला और उसको बीच में से थोड़ा उधेड़ दिया ताकि मेरा पप्पू वहां से निकल सके. मैंने अपना अंडरवियर उतारा और पजामा पहन लिया. अब मैं सरिता की प्रतीक्षा कर रहा था.

ठीक 1:00 बजे दरवाजे की घंटी बजी, मैंने दरवाजा खोला तो देखा सामने सरिता खड़ी है. वो बड़ी मस्तराम लग रही थी, उसने ब्लैक टॉप और ब्लू जींस पहनी हुई थी जो कि उसके शरीर पर एकदम टाइट थी. वह अन्दर आ गई.
मैंने उससे पूछा- तुमने लंच कर लिया है?
तो उसने कहा- नहीं … मम्मी ने टिंडे की सब्जी बनाई है और मुझे टिंडे की सब्जी पसंद नहीं है.
मैंने उससे कहा- मेरी मम्मी ने राजमा चावल बनाए हैं … चलो हम दोनों पहले लंच कर लेते हैं … फिर कैरम खेलेंगे.
उसने कहा- ठीक है.

हम दोनों डाइनिंग टेबल पर बैठकर राजमा चावल खाने लगे. लंच करने के बाद मैंने सरिता से कहा- चलो कैरम बोर्ड खेलते हैं.
उसने कहा- ठीक है.

मैंने जमीन पर कैरम बोर्ड रखा और हम दोनों खेलने लगे. मैं इस तरह से बैठा था कि उसे मेरा फटा हुआ पजामा अच्छी तरह से नजर आए. खेलते हुए उसकी नजर मेरे पजामे के उधड़े हुए हिस्से पर चली गई. मैं अनजान बना उसे देख रहा था. वह मेरा लंड देख कर थोड़ा शर्मा रही थी. तब भी वह बार बार मेरे पजामे के उधड़े हुए हिस्से को देखने लगी. उसे मेरा लंड देखने में शायद मज़ा आ रहा था लेकिन वह मुझसे कुछ बोल नहीं रही थी.
मैंने उससे बोला- आज तुम्हारा ध्यान किधर है?
उसने कहा- यश, तुम्हारा पजामा फटा हुआ है.
तो मैंने पजामे की तरफ देखा मेरा लंड तो पहले से ही सरिता के बारे में सोच-सोच कर खड़ा हुआ था.

मैंने सरिता से कहा- मम्मी तो शाम को आएगी और मुझे सिलाई करनी नहीं आती है. अब तो शाम तक यही पहनना पड़ेगा.
उसने कहा- ठीक है कोई बात नहीं … अब कर भी क्या सकते हैं.

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और हम खेलने लगे लेकिन वह बार-बार मेरे लंड को देख रही थी. थोड़ी देर बाद उसने कहा- आज खेल में मन नहीं लग रहा है, चलो सोते हैं.
मैंने कहा- ठीक है.

हम दोनों बेड पर लेट गए मेरा लंड खड़ा हुआ था जोकि पजामे से साफ दिखाई दे रहा था. मैं सरिता की तरफ करवट लेकर पलट गया और अपना लंड उसकी गांड से बिल्कुल सटा दिया. उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं की, तो मेरी थोड़ी हिम्मत बढ़ गई. मैंने अपना हाथ धीरे-धीरे टॉप के ऊपर से उसकी चूची पर रख दिया और धीरे-धीरे सहलाने लगा. उसकी सांसें तेज हो चली थीं, लेकिन उसने मुझे कुछ भी नहीं कहा.

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