मेरे दोस्त की सेक्सी बहन की कामुकता

उसने मुस्कुरा कर हाथ फैला दिए तो मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिए. उसने अन्दर जालीदार काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी. उसे देख कर मैं और ज्यादा गर्म हो गया. मैंने कहा- ब्रा तो बड़ी मस्त पहनी है रज्जो.
वो बोली- आज ख़ास तेरे लिए पहनी है.
मैंने हंस कर कहा- पहले से ही सोच रखा था क्या?
वो मुस्कुराकर कहने लगी- सच में जाने कब से तेरे साथ सेक्स करने का दिल था. पर तू एकदम भौंदू निकला कभी तूने मुझे ठीक से देखा ही नहीं.
मैंने कहा- हां ये तो सही बात है.. मैंने तेरी जवानी पर निगाह देर से डाली. चल कोई बात नहीं अब पूरा मजा लूँगा.

अब मैं उसके दोनों मम्मों को पकड़ कर दबाने लगा और वो भी ‘हमम्म अह्म्म मम्म …’ की आवाज़ से मेरा साथ देने लगी. फिर मैंने उसके दोनों मम्मों को ब्रा से आजाद कर दिया.. और उन्हें बारी बारी से मुँह में लेकर चूसने लगा. इसमें बड़ा ही आनन्द आ रहा था. उसके मम्मे बहुत ही मुलायम और चिकने थे.

इसके बाद उसने फिर टोका- एक ही जगह अटके रहोगे क्या?
मैंने उसकी भड़की हुई चुदास को समझा और पहले एक बार चुदाई करने का मन बना लिया. बाक़ी का चूमा चाटी और चुसाई आदि बाद में करने की सोचा.

मैंने उसकी सलवार उतार दी और अब वो केवल पेंटी में मेरे सामने लेटी थी. मैं समझ रहा था कि उसको चुदने की जल्दी मची है, लेकिन वो भी पूरा मजा लेने के मूड में थी.
वो उठ कर बोली- जा.. जाकर मलाई लेकर आ.

मैं फ्रिज में से मलाई लेकर आया. उसने कुछ मलाई अपनी फुद्दी पर लगाई और कुछ मेरे लंड पर मल दी.
अगले ही पल हम दोनों 69 की पोज़िशन में आ गए. वो तो मेरे लंड को ऐसे चाट रही थी, जैसे लंड चाटने में साली ने पीएचडी कर रखी हो. ऐसा लग रहा था कि वो रंडी के जैसे लंड चाटना अच्छे से जानती हो.

ये सब मुझे थोड़ा अजीब लग रहा थ. उसने एकदम से अपनी फुद्दी ऊपर उठा दी और मेरे मुँह से टकरा गयी. मुझे उसकी चुत की खुशबू अच्छी लगी. मैं उसकी फुद्दी को मुँह से लगा कर किस करने लगा तो वो नशीले स्वर में बोली- जीभ से चाट साले.
मैंने भी जीभ से उसकी फुद्दी चाटना चालू कर दिया. मुझे उसकी फुद्दी चाटना बहुत अच्छा लग रहा था. उसकी फुद्दी की खुशबू मुझे पागल कर रही थी.

उधर वो मेरे लंड को कभी जीभ से चाटती तो कभी लंड बाहर निकाल कर उस पर दाँत मारती. फिर मुँह में भर लेती.
सच में जन्नत का मज़ा आ रहा था. जब मुझे लगा कि अब मैं छूटने वाला हूँ, तो मैं हट गया.

वो समझ गई.. फिर उसने बोला- कंडोम है?
तो मैंने मना कर दिया.
बोली- कोई बात नहीं.. तुम करो, मैं गोली खा कर आई हूँ.

उसकी फुद्दी एकदम गोरी चिट्टी थी, मैंने उसकी फुद्दी के छेद पर लंड लगाया और धक्का दे मारा. तो मेरा लंड एक तरफ निकल गया.
वो बोली- शिट.. यार..
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- फंसा कर कस के धक्का मार न.

मैंने दूसरी बार ट्राई की. इस बार मैंने लंड को पकड़ कर उसकी फुद्दी पर लगाया और धक्का दे मारा, तो मेरा थोड़ा सा लंड अन्दर घुस गया. उसी वक्त उसने दर्द के मारे अपनी कमर ऐंठ ली.. और एक हल्की सी आह निकल गई.

मैंने एक धक्का और मारा तो मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अन्दर समा गया.
दो पल रुकने के बाद वो बोली- अब धीरे से धक्के मारने शुरू कर!
मैंने वैसे ही किया और मुझे मज़ा आना लगा. फिर धक्के तेज होते गए और वो एकदम से फुद्दी को ऊपर करते हुए मेरे गले से लग गयी. शायद वो झड़ने को थी. मैंने उसके कान में बोला- मैं भी आ रहा हूँ.
तो बोली- अन्दर ही आ जा … गोली खा रखी है.

मैंने भी उसके अन्दर ही माल छोड़ दिया और मैं निढाल उसके ऊपर गिर गया.

उस दिन वो शाम तक मेरे घर पर रही उस दौरान मैंने उसे किचन में, हॉल में चोदा और हॉल में उसकी गांड भी मारी. वो कहानी बाद में लिखूँगा.

प्लीज़ कमेंट करके बताना कि कैसी लगी सेक्स स्टोरी. ये एक सच्ची चुदाई की कहानी है.

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