मेरे हनीमून की यादें

आप सभी पढ़ने वालों और वालियों को मेरा नमस्कार। मेरी पिछली कहानियों पर मुझे काफी मेल्स मिले। कुछ ने नंबर पाने की भी चेष्टा की। माफ़ी चाहूंगा क्यूंकि मैं खुद दुनिया के सामने नहीं आना चाहता। आप बस मेरी कहानियों को पढ़ें और आनंद लें और अपना प्यार बनाये रखें।

एक लम्बे अंतराल के बाद कहानी लिख रहा हूं क्यूंकि पिछले कुछ महीनों से काफी व्यस्त था।
शोभा से मेरी शादी हो गयी है और हम दोनों अपने प्यार को एक दूरी चरण में ले आये है।

जो लोग शोभा के बारे में नहीं जानते उनसे निवेदन है कि मेरी पुरानी कहानियां पढ़ ले।
पिचकारी… दे मारी
पिचकारी घुसी पिछवाड़े में

बिना कोई वक़्त गंवाए मैं अपनी नयी कहानी पर आता हूँ। आज जो किस्सा आपको बता रहा हूँ वो हमारे हनीमून का है।

मैंने और शोभा ने हनीमून किसी ठंडी जगह मनाने का मन बनाया। और हम शादी के सात दिन बाद अपने हनीमून पर मनाली निकल गए। ज़ाहिर है हनीमून की बात है तो सारी तैयारियां हम लोगो ने पहले से कर रखी थी। शोभा ने दो बार चॉकलेट वैक्स भी करवा लिया था। हमने शान्ति और प्राइवेसी के लिए मनाली से थोड़ा बाहर एकांत में बंगलो लिया तीन दिन के लिए।

जब हम वह पहुंचे तो बहुत शानदार नज़ारा था। सामने बर्फ से ढके पहाड़; बंगलो के सामने हरी हरी घास; दूर दूर तक कोई शोर नहीं सिर्फ प्राकृतिक आवाज़ें। दो बंगलो के बीच काफी दूरी और ऊंची दीवारें थी, मतलब कोई तंग नहीं करने वाला। खाने के लिए सिर्फ एक कॉल करो और आधे घंटे में खाना डिलीवर!

शोभा वहां पहुँच कर जैसे गुम सी गयी थी। वो ख़ुशी से मेरे गले लगी। हम लोग पहले नहाये और फिर खाना आर्डर कर दिया। शोभा ने सेक्सी नाईटी पहन ली थी। अंदर जी-स्ट्रिंग पहन रखी थी। पारदर्शी होने के कारण सारे नज़ारे साफ़ दिखाई दे रहे थे। उसके गोरे और गोल नितम्ब छोटी सी नाईटी से बाहर आ रहे थे।

हम दोनों ने शादी से पहले ही एक दूसरे से ना जाने कितनी बार सम्भोग कर लिया था। हनीमून पर कुछ नया करेंगे ऐसा संकल्प लेकर आये थे। थोड़ी देर में खाना आ गया और मैंने शोभा को बोला- गेट खोलो और खाना ले लो।
शोभा ने पहले तो थोड़ी ना नुकुर की क्योंकि उसने लगभग ना के बराबर कपड़े पहने थे। पर कुछ नया और रोमांचक करने के लिए उसने खड़े हो कर दरवाज़ा खोला। डिलीवरी वाला लड़का पहले तो स्तब्ध रह गया फिर अंदर बंगलो के हॉल में आकर टेबल पर खाना और बर्तन रख दिए।
वो जान बूझ कर बोला- सर, खाना सर्व कर दूँ?
मैंने कहाँ- हाँ।

और वो चोर नज़रों से शोभा को देखते हुए खाना सर्व करके चला गया। उसके जाते ही शोभा की योनि में मैंने जी-स्ट्रिंग के ऊपर से ही उंगली फेरी। उसकी पूरी योनि गीली हो गयी थी। पराये मर्द के सामने खुद को ऐसे पेश करने से वो बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी।

शोभा ने नज़रें झुकाई और मैंने उसके बोबे दबा दिए। वो बहुत ज्यादा उत्तेजित थी और मैं भी। हमने खाना खाने से पहले ही सेक्स का दौर शुरू कर दिया। एक तो ठण्ड, फिर अभी अभी जो हमने किया और हनीमून का अनूठा अहसास। आज की चुदाई का अहसास बिलकुल अलग था। आज शोभा की योनि चाटते हुए एक अलग ही मजा था। शोभा ने भी पूरा मुँह खोल खोल कर मेरा लिंग मुँह में गले तक उतारा।

आधे घंटे की इस ताबड़ तोड़ चुदाई के बाद हमने खाना खाया और बाहर गार्डन में पसर गए।

खुला आसमान, नंगे जिस्म, बर्फ से ढके पहाड़, हमें लग ही नहीं रहा था की हम अपने ही देश में हैं। ठण्ड से हमारे रोंगटे खड़े हो रखे थे पर फिर भी हमें मजा आ रहा था। शायद हम गरम प्रदेश वालों को सर्दी का अहसास बहुत सुखी लग रहा था।

हम लोग ठंडी हवा का आनंद ले रहे थे कि तभी मेरे मोबाइल की घंटी बजी। मैंने किराये पर कार की बुकिंग कर ली थी उसी का फ़ोन था और वो बता रहा था कि 10 मिनट में गाड़ी पहुंच जायेगी। मैं और शोभा तैयार होने चले गए।

गाड़ी वाला टाइम पर आ गया और चाबी देकर चला गया। हम अपनी प्राइवेसी में किसी भी प्रकार का दखल नहीं चाहते थे, ड्राइवर का भी नहीं। इसलिए गाड़ी किराये पर बुक करा ली थी।

मैंने शोभा को आवाज़ दी और शोभा एक ओवरकोट पहने जो घुटनों से थोड़ा ऊपर खत्म हो रहा था वो पहन कर बाहर आ गयी। मैं थोड़ा गुस्से में बोला की शोभा हमें इस ट्रिप को यादगार बनाना था और तुम ये पूरा ढक कर आ गयी। तभी शोभा ने ओवरकोट की आधी चैन खोली और उसके बोबे मुझे दिख गए। मतलब वो ओवरकोट के नीचे पूरी नंगी थी। उसने झट्ट से चैन फिर से बंद कर ली और गाड़ी में बैठ गयी।

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