मेरे मामा की लड़की मेरी दिलबर

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम सम्राट है और अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़कर मुझे भी अपनी सच्ची दास्तान सुनाने की इच्छा हुई. समय बर्बाद न करते हुए मैं आता हूँ अपनी कहानी पर।
वो कहते हैं न कि प्यार कहीं भी किसी से भी हो जाता है वैसे ही मुझे भी प्यार हो गया था. मगर जिससे प्यार हुआ वह रिश्ते में मेरी बहन लगती थी. मैं अपने मामा की लड़की को पसंद करने लगा था. यह सिलसिला शुरू हुआ 2009 में. वो हुआ यूँ कि हम और मेरे मामा एक ही शहर में रहते हैं जयपुर में. मेरे मामा के घर में 3 लोग हैं. मेरे मामा, मामी और मेरी जान … कोमल!
कोमल की उम्र 19 साल थी और मेरी उम्र 24 साल.

मैं अक्सर मामी के घर जाया करता था. और सभी मुझे बहुत प्यार भी करते थे. मेरे मन में कभी कोमल के लिए ग़लत ख्याल नहीं आये. अक्सर वो मेरे साथ मेरे घर या किसी भी काम से मेरी गाड़ी पर जाया करती थी. हमारे बीच भाई-बहन जैसा ज्यादा कुछ रह नहीं गया था. मैं उससे अपनी हर बात शेयर कर लिया करता था और वह भी मुझ पर पूरा भरोसा करती थी.

कोमल और मैं आपस में खूब मस्ती करते थे. साथ में बाहर मार्केट में चाट वगैरह खाने निकल जाया करते थे. मैं उससे अपनी पसंद के बारे में बता दिया करता था कि मुझे किस तरह की लड़कियाँ पसंद हैं और वह भी मुझसे कुछ इस तरह की बातें अक्सर किया करती थी. इस तरह हम दोनों भाई-बहन आपस में बहुत खुल गए थे.
एक दोस्ती सी हो गयी थी हमारी. हम रात में भी बातें करने लगे थे. लेकिन इस सब के चलते अनजाने में ही मुझे कोमल से मोहब्बत होने लगी.

यह सब कब और कैसे हो गया मुझे पता नहीं चला. मगर जब पता चला तो तब तक बात मेरे हाथ से निकल चुकी थी. मैं कोमल को पसंद करने लगा था. अब समाज की नज़रों में तो हम दोनों भाई-बहन थे इसलिए मेरे सामने बड़ी मुसीबत आकर खड़ी हो गई थी.मैं धर्म संकट में था कि क्या ये सही होगा.
अगर मैं कोमल को अपने दिल की बात बता दूँ तो क्या यह सही है. और अगर मैं किसी तरह उसको यह बात बता दूँ तो क्या वह भी मुझे अपनाएगी. मैं सोच रहा था कि किसी तरह अगर मैंने कोमल से बात कर भी ली तो क्या उसके बाद हमारा वो रिश्ता किस कैटेगरी में आएगा.
घर वालों को तो इस बात की भनक भी नहीं लगने देना चाहता था मैं.

मैं अंदर ही अंदर इन सब बातों को सोचता रहता था. जब बार-बार आपको कोई बात परेशान करने लगे और आपको उसका कुछ समाधान न मिले तो फिर वह बात आपके अंदर घर कर जाती है. हम कितना भी छिपाने की कोशिश करें लेकिन किसी न किसी को आपके मन की हालत का पता लग ही जाता है. मेरी भी हालत कुछ ऐसी ही थी.
हर वक्त मैं इसी बात को लेकर परेशान रहने लगा था कि आखिर इस समस्या का इलाज हो तो हो कैसे. लेकिन बहुत सोचने के बाद भी मुझे कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था और मैं अपसेट सा रहने लगा.

कई बार सोचा कह दूँ; लेकिन एक बार कोमल ने ही पूछ लिया उसने कहा- भैया, आजकल आप अपसेट से लग रहे हो, क्या हुआ?
मैं- बस यूँ ही मन नहीं लगता आजकल.
उसने मुझसे मज़ाकिया लहज़े में पूछा- कहीं किसी से प्यार तो नहीं हो गया आपको?
और यह सुन कर मेरा दिल की धड़कनें बढ़ गयी. जिस लड़की को मैं पसंद करता हूँ वह खुद मुझसे पूछ रही है कि मुझे कहीं प्यार तो नहीं हो गया. अब क्या जवाब दूँ उसको मुझे समझ नहीं आ रहा था.

कोमल मेरे सामने ही खड़ी मुस्करा रही थी. मैं उसको बस देखे जा रहा था जैसे उसको आँखों ही आँखों में सब कुछ समझाने की कोशिश कर रहा था. लेकिन जो प्यार मेरी तरफ से था क्या वो प्यार कोमल भी महसूस कर पा रही थी. या फिर वह मुझे बस भाई की नज़र से ही देख रही थी.

मुझे कुछ पता नहीं था. फिर भी मैंने हिम्मत की और मजबूत दिल कर लिया. इस घुटन से ज्यादा अच्छा है मैं अपने दिल की बात कोमल को बता ही दूँ।
मैंने मन ही मन सोच लिया और कह दिया- हाँ प्यार तो हो गया है.
उसने कहा- यह तो ख़ुशी की बात है, नाम बताओ कौन है, मैं बात करती हूँ उससे. आपको कोई कैसे ना कर सकता है?
मैंने कहा- ये नहीं हो सकता. वो मना कर देगी तो हमारी दोस्ती भी टूट जाएगी.

मैंने कोमल के सामने बात तो छेड़ दी थी मगर फिर वह भी मेरे पीछे ही पड़ गई थी क्योंकि हम दोनों में बहुत अच्छी बनती थी. अब मैं यहां पर यह सोचने में लगा हुआ था इसको आगे क्या बताऊं। एक तरफ तो मन कर रहा था कि बोल दूँ मगर साथ ही हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहा था.
लेकिन वो ज़िद पर अड़ गयी और दावा करने लगी कि वो हाँ ही कहेगी और आपसे बात बंद नहीं करेगी. अब नाम बताओ फटाफट.

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