मेरी प्यारी दीदी मुझसे चुद गई

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार.. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ. काफी सारी कहानियां पढ़ने के बाद मैं अपनी जिंदगी में घटी घटना लिख रहा हूँ.

मेरा नाम राहुल है और मैं पच्चीस साल का हूँ. मैं अहमदाबाद में रहता हूं.. दिखने में ठीक-ठाक हूँ. मेरा लंड छह इंच का मोटा सा है.

थोड़े दिनों पहले मुझे किसी काम से सूरत जाना हुआ. अपना काम खत्म करके मैं वापस आ रहा था कि घर से फोन आया कि अपने चाचा की लड़की को भी साथ में लेते आना.

मेरे चाचा की लड़की, जिसका नाम निशा है.. वह सूरत में अपने पति के साथ रहती है. उसके पति यानी मेरे जीजू को कंपनी के काम से एक महीने के लिए दूसरे शहर जाना पड़ा था, तो वह अकेली रह रही थी. शायद इसी वजह से उसका मेरे साथ आने का मन करने लगा था.

निशा की तीन साल पहले शादी हुई थी. वह अठ्ठाइस साल की बहुत ही सुंदर माल जैसी दिखती है. उसका मादक फिगर 34-28-34 का है. ऊंचाई पांच फीट दो इंच है. उसकी गांड अब ज्यादा बाहर निकल गई है. मुझे वो बहुत ही सेक्सी लगती थी लेकिन चूंकि वो मेरी बहन थी इसलिए मुझे उसके साथ ये सब करने की हिम्मत नहीं होती थी और मौका भी नहीं मिल सका था.

मैंने उसको फोन किया तो वह स्टेशन पर आ गई. उसने पीले कलर का टी-शर्ट और सफेद लंबा स्कर्ट पहना था. वो बहुत ही मस्त दिख रही थी. उसके पास एक बैग था, जो मैंने ले लिया.

हम दोनों भाई बहन बात करते हुए ट्रेन का इन्तजार करने लगे. रात को नौ बजे की ट्रेन थी, पर वह ज्यादा बारिश की वजह से रद्द हो गई थी. दूसरी कोई और ट्रेन भी अब आने वाली नहीं थी. काफी देर तक इन्तजार के बाद हम दोनों ने ये तय किया कि सड़क के रास्ते चला जाए.

सूरत से अहमदाबाद के लिए स्टेशन से बाहर कई साधन मिल जाते थे, तो मैं निशा के साथ बाहर आ गया.

हम लोग स्टेशन से बाहर निकले तो वहाँ भी ऐसी कोई कार वगैरह नहीं थी, जो अहमदाबाद जा रही हो.

मैं पूछताछ करने लगा तो एक भाई ने बोला कि वह अहमदाबाद जा रहा है. उसकी गाड़ी में बस एक ही सीट खाली बची थी और वहां भी मैं ही बैठ सकता था, क्योंकि नेहा की गांड बहुत बड़ी थी.

आमने सामने की सीट लगी हुई थीं, जिसमें लोग बैठे हुए थे. मैं सीट में बैठ गया और निशा, उस गाड़ी में एक चालीस साल की औरत थी, उसकी गोद में बैठ गई.

पर थोड़ी देर में औरत के पैर दुखने लगे तो निशा खिसक कर थोड़ा बाजू हट गई. अब वह, एक पचास साल का आदमी बैठा था, उसकी जांघों पर बैठ गई.

मुझे ताज्जुब हो रहा था कि निशा किसी आदमी की गोद में कैसे बैठ सकती थी. हालांकि मैं भी उसको अपनी गोद में बिठा सकता था परन्तु मैंने संकोच के चलते ऐसा नहीं कहा. फिर जब वो उस आदमी की गोद में बैठी, तब भी मुझे लगा कि ये भी उम्रदराज आदमी है, कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन मेरे दिमाग में ये भी सवाल आया कि इस आदमी के पैर दुखने लगेंगे तो ये इसके बाद मेरी गोद में आसानी से बैठ जाएगी.. तब इसकी गांड का मजा मिल जाएगा. मतलब अब भी मैंने उसको चोद पाने का नहीं सोच पाया था.

खैर.. गाड़ी अपनी रफ्तार पर जा रही थी और लोग सोने लगे थे. निशा ने भी थोड़ा पीछे हटकर मेरी गोद में सर रख दिया और सोने लगी.

पर उसके पीछे खिसकने से अब वह पूरी तरह उस आदमी के लंड पर बैठ गई थी. मैं देख रहा था कि उस आदमी का लंड भी खड़ा हो गया था. वो बार बार अपने पायजामे में अपने लंड को सही कर रहा था.

निशा अब सो चुकी थी, पर वह आदमी मेरी ही ओर देख रहा था. मैंने भी थोड़ी देर के लिए अपनी आंख बंद कर लीं. मैं भी जानना चाहता था कि इस आदमी की सोच किधर तक जाती है.

थोड़ी देर बाद मैंने आंख खोली तो वह आदमी निशा की कमर पकड़ कर धीरे धीरे हिल रहा था. मैंने ध्यान से देखा तो वो तो शायद मेरी बहन निशा की चुदाई जैसा कुछ कर रहा था. हालांकि अँधेरे के कारण कुछ भी साफ़ नजर नहीं आ रहा था तब भी मेरी झांटें सुलग गईं.

मुझे बहुत गुस्सा आया तो मैंने निशा को बोला- दीदी, उस भाई के पैर अकड़ जाएंगे. आप मेरे पैरों पे बैठ जाओ.
पर निशा ने नींद में बोलते हुए मना कर दिया- अरे चार-पांच घंटे की बात है. कुछ नहीं होगा.

मैंने उसको खींचते हुए दोबारा बोला, तो वह मान गई. अब वो मेरी गोद में बैठ गई और बैठते ही सो गई.

मैंने देखा कि उस आदमी ने अपना लंड बाहर निकाला हुआ था और उसका लंड बाहर से आती हुई रोशनी में थोड़ा चमक रहा था. पर मेरे देखते ही उसने अपना लंड पायजामे में कर लिया. इसी के साथ उसने मुझे कुछ हाथ में पकड़ा दिया.. और वो आंख बंद करके सो गया.

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