मीठा मीठा मौसम

नमस्कार दोस्तो, आप सभी को आशु का नमस्कार!
मीठा मीठा मौसम आ चुका है। यही वो मौसम है जिसमें आप अपने प्यार को प्यार करते हैं। आज मैं आप को ऐसे ही मौसम के दौरान मेरे और सोनू के प्यार की एक कहानी सुनाना चाहता हूँ।

जो हिसार के बारे में जानते हैं, वो अग्रोहा के बारे में भी जानते होंगे। जो नहीं जानते उन्हें मैं थोड़ा सा बता देना चाहता हूँ।
अग्रोहा हमारे हिसार से थोड़ा दूर एक छोटा सा टूरिस्ट स्पॉट है। पास में ही एक पार्क है और कुछ पुराने थेहड़। आमतौर पर वहां कोई आता जाता नहीं है। आप शांति से वहां कुछ देर बैठ कर सनसेट देख सकते हैं और अपने प्यार के साथ एन्जॉय कर सकते हैं।

ऐसे ही एक दिन फुरसत के मूड में मैं और सोनू वहां घूमने गए। उस दिन सोनू एक चुस्त जीन पेंट और टॉप पहन के आई थी। मीठी मीठी ठंड का मौसम था और मेरे पास उस समय बाइक हुआ करता था।
जब से बाइक लिया था मैं सोचा करता था कि कभी तो कोई लड़की मेरे साथ भी मेरी बाइक पे बैठेगी, मुझे कस के पकड़ेगी और मुझे भी कुछ सिंगल लड़कों को जलाने का मौका मिलेगा जैसे तब तक मैं जला करता था!
हा हा हा!

उस दिन सोनू मुझे यह मौका देने के लिए आई थी। मैंने सोनू को हिसार कृषि यूनिवर्सिटी के गेट से पिक किया। वो एक तरफ पैर कर के बैठने लगी तो मैंने कहा- ऐसे नहीं यार..!! अब गर्लफ्रैंड बनी हो तो गर्ल फ्रेंड की तरह बैठो!
सोनू बोली- अच्छा जी … धीरे धीरे जनाब के ख्याल कुछ ज्यादा ही रोमांटिक होते जा रहे हैं?
मैं मुस्कुरा दिया।

सोनू मेरे पीछे क्रॉस लेग कर के बैठ गई। उसने पीछे से मेरे पेट पर हाथ बांध लिए।
दोस्तो, एक बात बोलना चाहूंगा सोनू एकदम बिंदास लड़की थी, उसने कभी भी अपने फेस पे कपड़ा नहीं बांधा।

सोनू चिपक कर मेरे पीछे बैठ गई और हम मस्त, बेपरवाह हवाओं की तरह आजाद घूमने के लिए निकल पड़े। मैं किसी आवारा भंवरे की तरह मस्ती में मचलता हुआ हौले हौले बह रही हवाओं का मजा लेते हुए बाइक चला रहा था।
सोनू ने अपना सर मेरे कंधे पे रख लिया था और वो भी असीम सुकून का एहसास कर रही थी।

दोस्तो, मुझे लगता है कि किसी भी रिश्ते में और खास कर प्रेमी प्रेमिका के रिश्ते में असली मजा तब आता है जब सामने वाला आप पर विश्वास करता है, आप से सुकून पाता है और आप को भी उसी सुकून का एहसास कराता है।

इस वक़्त मैं और सोनू दोनों उन्हीं लम्हों के अहसास का मजा लूट रहे थे। रास्ते भर हम हल्की फुल्की बातें करते रहे। मैं उससे कुछ पूछता या उसे कुछ कहता और सोनू बस ‘हां ना’ में जवाब दे रही थी।
यकीन मानिए दोस्तो, ऐसा इंसान दो ही मौकों पर करता है, या तो वो आपसे बात नहीं करना चाहता या फिर वो बस बात ही नहीं करना चाहता।

खैर लगभग आधे घंटे बाद हम अग्रोहा पहुँच गए, वहां जाकर पहले हमने मंदिर के दर्शन किए। वहां जो गुफाएं बनी हुई है वो देखी। थोड़ी देर वहां बैठने के बाद हम थेहड़ की चल पड़े। ऐसा सोचा तो नहीं था लेकिन वहां जब हम पहुँचे तो पता चला कि थेहड़ के गेट पर लॉक लगा हुआ था।

एक बार के लिए तो मूड खराब से हुआ लेकिन फिर सोचा कि चलो थोड़ी देर शीतला माता मंदिर चलते हैं, वापसी तक क्या पता लॉक खुल जाए।
हम शीतला मंदिर गए तो वहां भी सुनसान पड़ा था। दोपहर का वक़्त होने के कारण सभी पुजारी वगैरा अपने कमरों में आराम कर रहे थे।

मैं और सोनू पार्क के एक कोने में जा कर बैठ गए। मैं सोनू की गोदी में सर रख कर लेट गया और सोनू की आंखों में देखने लगा।
सोनू बोली- क्या देख रहे हो?
मैं बोला- देख रहा हूँ कि इन आँखों में अगर में डुबकी लगाऊं तो कहीं डूब तो नहीं जाऊंगा? मुझे तो तैरना भी नहीं आता!
सोनू ने जवाब दिया- चिंता मत करो, आप डूबो … उससे पहले मैं अपनी आंखों का पानी सुखा लूँगी।

मैं उसका जवाब सुन कर खुश हो गया। मैंने उसके सर को झुकाया और उसके सुर्ख गुलाबी होंठों को चूम लिया। करीब दस मिनट तक हम वैसे ही किस करते रहे। सोनू के होंठों की सारी लिपस्टिक मैंने उतार दी थी, अब बचा था तो बस असली सुर्ख लाल रंग जो कुदरत ने उसे दिया था।

मैंने कहा- तुम किसी भी शृंगार के बिना ज्यादा खूबसूरत लगती हो।
सोनू थोड़ा थोड़ा शर्मा गई।
मैंने उठ कर उसे जोर से हग कर लिया।

फिर हम थेहड़ की तरफ चल पड़े। मैंने सोचा सड़क से वापस जाने की बजाए पीछे से चलते है, थोड़ा एडवेंचर से भी हो जाएगा और अगर अब भी लॉक लगा मिला तो वापस भी नहीं आना पड़ेगा।

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