मीठा मीठा मौसम

हम पीछे की तरफ से थेहड़ पर चढ़ गए। सोनू को थोड़ी थोड़ी सांसें फूलने लगी तो उसकी छाती ऊपर नीचे होने लगी। वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी।
मैंने उधर ही सोनू को कस के हग किया और उसके गले पर किस करने लगा।
ठंडी ठंडी हवा चल रही थी। हम दोनों गरम हुए जा रहे थे।

दोस्तो, एक बात जो मैं कहना चाहता हूँ, सोनू ने मेरे साथ रहते हुए कभी ये नहीं कहा कि यहां नहीं करते … छोड़ो कोई देख लेगा, कोई आ जायेगा वगैरह वगैरह …
इस बात से मुझे बहुत अच्छा लगता था। इस बात से पता लगता था कि उसने खुद को मुझे सौंप दिया है बस … आगे जो भी हो.

फिर मैंने सोनू को अपनी पीठ पर उठा लिया। वैसे वो आम लड़कियों जितनी हल्की फुल्की तो नहीं थी लेकिन उसका वजन ज्यादा भी नहीं था। लेकिन चढ़ाई होने की वजह से मुझे भी हल्का हल्का जोर आ रहा था।
लेकिन जैसे तैसे हम पहुंच गए।

ऊपर जाकर हम दीवार पर बैठ गए। वो मेरी गोदी में लेट गई और मैं उसके बालों को सहला रहा था। मुझे ऐसा लगा कि जैसे वो मुझ से कुछ कहना चाहती हो, उसकी आंखों में एक शांति सी थी, सुकून का एहसास था।

ऊपर हवा थोड़ी तेज थी और ठंडी भी, मानो हवा भी हमारे आने की खुशी में नाच रही हो।
कुछ देर वहां बैठ कर हम मौसम का मजा लेते रहे।
बीच बीच में मैं उस के पेट पर कभी गालों पर कभी छाती पर गुदगुदी सी कर देता और वो मेरे में सिमट जाती।

ऐसे हल्की फुल्की मस्तियां करते हुए हमें करीब एक घंटा हो गया था। फिर हम दीवार से नीचे अंदर की तरफ आ गए। वहां एकदम शांत और सुनसान था।

मैंने सोनू को हग कर लिया और उसे गले पर किस करने लगा। सोनू तड़पने लगी। वो मुझे कस कर हग किये हुए थी। मैं उसके कान की बालियों को चूम रहा था। ये उसका सबसे कमजोर पॉइंट था; उसकी तड़प बढ़ने लगी थी।

मैं उसकी पीठ पर हाथ फिरा रहा था। मैंने उसके टॉप के ऊपर से ही उसकी ब्रा का हुक खोल दिया था।
अब मैं सोनू के होंठों को चूम रहा था; उसके सॉफ्ट सॉफ्ट होंठों को चूसने का मजा ही कुछ और था। मेरा एक हाथ उसके बूब्स को मसल रहा था।
उसके बूब्स भरे भरे और नर्म नर्म थे, ऐसा लगता था जैसे इम्पोर्टेड कुशन हाथ में हो।

हम काफी देर तक एक दूसरे को ऐसे ही किस करते रहे और मैं सोनू के बूब्स को मसलता रहा।
सोनू का एक हाथ मेरी पैन्ट के ऊपर से मेरे पप्पू को मसल रहा था। पप्पू धीरे धीरे अंगड़ाई लेने लगा था।

मैंने सोनू के टॉप को ऊपर सरका दिया, वहां हम निकालने का रिस्क नहीं ले सकते थे। ब्रा मैं पहले ही खोल चुका था। मैंने सोनू के निप्पल को मुंह में भर लिया, एक को चूसता दूसरे को हाथ से मसलता।
सोनू जोर जोर से आहें भर रही थी। उसकी सिसकारियां वहां के सन्नाटे को ललकार रही थी। उसकी सांसें जोर जोर से चल रही थी, उसके बूब्स साँसों के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे।

कसम से वो बहुत सेक्सी लग रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई हसीन परी नीचे आई हुई हो और अपनी जन्म जन्म की प्यास बुझाना चाहती हो।
अब उसका एक हाथ मेरी पैन्ट के हुक को खोलने में लगा था।
जल्दी ही उसे सफलता भी मिली, पप्पू महाराज ताव में आ चुके थे, वो अपना सर उठा कर बाहर निकलने को बेताब थे जैसे कोई सांप को टोकरी में बंद किया हुआ हो।

सोनू पप्पू को अंडरवियर के ऊपर से ही मसलने लगी, पप्पू महाराज अंडरवियर के अंदर ही उछलने लगे।
सोनू ने मेरे अंडरवियर में हाथ डाल दिया। वो ऊपर से नीचे तक पप्पू को मसल रही थी जैसे उसका जायजा ले रही हो या जैसे किसी बच्चे को सुलाने के लिए उसे प्यार से सहला रही हो लेकिन यहां उल्टा होता जा रहा था; पप्पू महाराज तो जोश में आते जा रहे थे।

जैसे ही मैंने सोनू के बूब्स को छोड़ा, सोनू एकदम से नीचे बैठ गई और पप्पू को अपने मुंह में भर लिया। कभी वो सुपारे पर जीभ फिराती तो कभी जड़ तक मुंह में ले लेती। कभी गोटियों को अपने मुंह में भर लेती।
मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं हवा में होऊँ।

मैंने वो करीब 5 मिनट तक ऐसे ही करती रही। उसकी सांस जोर जोर से चलने लगी थी। मुझे ऐसा लगा जैसे वो अपने मुंह से ही मुझे फारिग कर देना चाहती हो..
मैंने पूछा क्या इरादा है जानेमन?? आज तो पप्पू पे बड़ा प्यार आ रहा है तुम्हें..
सोनू एक सेकंड के लिए रुकी और बोली- आज मैं अपनी और इसकी (पप्पू) प्यास बुझाना चाहती हूं।

मैं उस का इशारा समझ गया.
एक दो मिनट के बाद पप्पू ने उस के मुंह में पानी छोड़ दिया; वो गट गट कर के सारा पी गई; एक बूंद भी नहीं छोड़ा। फिर भी उस ने पप्पू को छोड़ा नहीं, एक एक बूंद तक चाट गई। उसकी सांस जोर जोर से चल रही थी।
इतनी मेहनत के बाद पप्पू अब थोड़ा आराम के मूड में चला गया था।

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