मॉम ने सिखाई कामुकता की मधुर परिभाषा

अन्तर्वासना पर कामुक कहानियाँ तो आप लोगों ने बहुत पढ़ी होंगी. मगर आज कामुकता की जो परिभाषा मैं आपको देने जा रहा हूँ, वह शायद ही आपने इससे पहले कभी कहीं पढ़ी हो. यह कहानी मेरी कामुकता की जीवनमाला के समान है जिसका हर एक शब्द रूपी मोती मैंने अपने निजी अनुभव के समंदर से छांटकर निकाला है. उम्मीद है आपको यह मधुर कहानी पसंद आएगी.

दोस्तो, आज मैं आपको अपने जीवन की कहानी सुनाना चाहता हूँ। मेरी कहानी सुन कर आप भी सोचेंगे कि शायद मेरी जैसी किस्मत आपको भी मिलती। सच में मेरी जितनी खुशनसीबी किसी को नहीं मिलती।
जब मैं स्कूल में पढ़ता था, तब एक दोस्त ने मुझे बताया कि जिसके लंड पर तिल होता है, उसको बेइंतेहा चुदाई का मौका मिलता है। मेरे लंड पर कोई तिल नहीं है, कहीं पर भी नहीं। मगर फिर भी जितनी चुदाई मैंने की है, शायद ही किसी ने की हो। आप जैसे-जैसे मेरी कहानी पढ़ते जाएं, तो आप अपने साथ मेरी तुलना करते जाएँ, आपको पता चलता जाएगा, कि आप ज़्यादा बड़े चोदू हैं या मैं!
तो लीजिए पढ़िए मेरी जीवन कथा:

मुझे जो बात अपने जीवन में सबसे पहले सेक्स से सम्बन्धित याद आती है, वो है अपनी माँ के बारे में। मैं बहुत छोटा था, तब एक रात मेरी नींद खुल गई, मैं उठ गया और बाथरूम में जाकर सुसू करने लगा। जब मैं सुसू करके आया तो देखा कि माँ मामाजी के कमरे में जा रही थी। उनके कमरे की बत्ती जल रही थी.

मैंने खिड़की से आँख लगा कर देखा तो हैरान रह गया, माँ और मामाजी दोनों ने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये और देखते ही देखते वो दोनों बिल्कुल नंगे थे। फिर दोनों ने कस कर एक दूसरे को अपनी बांहों मे ले लिया, और एक दूसरे को पागलों की तरह चूमने लगे।
मुझे बहुत गुस्सा आया कि माँ मामा जी के साथ क्या कर रही है।

बेशक मैं छोटा था, पर इतना तो पता ही था कि यह काम मम्मी और पापा करते हैं, न कि माँ और मामाजी। उसके बाद न जाने क्यों मैं अक्सर इस बात का ख्याल रखता कि माँ और मामाजी क्या करते हैं। और माँ पापा के साथ वो सब क्यों नहीं करती।
जब भी माँ और पापा के बीच कोई बहस होती, माँ हमेशा एक ही ताना मारती- किसी लायक भी हो?
तब मैं इस बात को नहीं समझ पाता था कि ये लायक क्या होता है. आज समझ पाया हूँ कि पापा सेक्स के मामले में मम्मी के लायक नहीं थे, इसीलिए मम्मी ने अपने जिस्म की भूख मिटाने के लिए अपने ही भाई को चुना।
शायद इसलिए कि उनका काम भी बन जाएगा और घर की बात घर में ही रह जाएगी. बाहर किसी को भी पता नहीं चलेगा। पापा और मेरे बीच में भी कोई ख़ास प्यार नहीं था, पापा के लिए मैं सिर्फ एक ज़िम्मेदारी था।

घर का सारा काम पापा करते थे। अपनी जॉब पर जाने से पहले और वापस आने के बाद भी। मॉम सिर्फ अपनी खूबसूरती पर और अपने नए-नए बन रहे दोस्तों पर ही अपना सारा समय बिताती। जब मामाजी की शादी हो गई, तो मामाजी का आना-जाना हमारे घर कम हो गया. मम्मी के दोस्तों का आना-जाना बढ़ गया।
अब दोस्त लोग आ रहे थे, तो घर में अक्सर शराब और सिगरेट के साथ नॉन वेज सब कुछ चलने लगा। पर अक्सर ये सब तब होता, जब मैं स्कूल में और पापा ऑफिस में होते।

मगर एक दिन जब मैं स्कूल से किसी वजह से जल्दी घर वापस आ गया तो देखा कि घर में टेबल पर शराब, मीट, सिगरेट भरे पड़े थे, जब बेडरूम में देखा तो मॉम बेड पर बिल्कुल नंगी लेटी पड़ी थी और दो लड़के, एक 20-22 साल का और दूसरा उस से कुछ बड़ा, दोनों नंगे, मॉम के साथ सेक्स करने में लगे थे। मॉम नशे में बिल्कुल बेसुध थी, उन्हें कुछ पता नहीं चल रहा था कि उनके साथ क्या हो रहा है।

थोड़ी देर बाद वो लड़के चले गए। मैंने ही घर मे सारी साफ सफाई की. फिर बेडरूम में जाकर देखा, मॉम अभी भी उसी तरह बेसुध, नंगी लेटी थी। मैंने उनके ऊपर चादर डाली और फिर अपना खाना खाकर पढ़ने बैठ गया।

शाम को पापा आए. मैंने पापा से बात करने की कोशिश की मगर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं पापा से क्या कहूँ। जो कुछ भी मैंने पापा से कहा, पता नहीं पापा समझे या समझ कर भी अन्जान बन गए।
मगर बात वहीं की वहीं रही।

अब तक तो मैं अपनी मॉम को सैकड़ों बार नंगी देख चुका था। मुझ पर भी जवानी चढ़ने लगी थी, बहुत बार मॉम के पेट से मैंने गोंद जैसा गंदा सफ़ेद पानी साफ किया था, कई बार उनके मुंह पर भी यही सफ़ेद पानी गिरा होता।
मॉम को पता था कि मैं ही घर पहले आता हूँ और मैंने ही हमेशा उनकी बेहोशी में उनके नंगे जिस्म को ढका था, तो वो जानती थी कि मैंने उनको नंगी देखा था, मगर मॉम ने इसको बहुत आम बात की तरह लिया।
वो अक्सर कहती- तुम अब बड़े हो गए हो, तुम्हारी अब कोई गर्ल फ्रेंड होनी चाहिए।
मगर मुझे तो अपनी माँ से प्यार हो गया था, मैं तो अपनी क्लास की या आस-पड़ोस की किसी भी लड़की को नहीं देखता था।

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