मम्मी ने अंकल का क़र्ज़ चुकाया

हेल्लो दोस्तो, मेरा नाम ज़य (18) है, मेरी मा का नाम कविता (40) है और वो हाउसवाइफ है, पापा अशोक (50) की प्रॉविषन स्टोर है.

मा का फिगर बड़ा आकर्षक है. 36-32-42. वैसे तो मा सलवार कमीज़ ही पहेनती है पर कभी साड़ी भी पहेनती है.

जब वो साड़ी पेहेन के घर के बाहर निकलती है तो कई मर्दो की आँखे मम्मी का बदन नापति है, शरारती लोंडे तो चुपके से मम्मी को आँख मार कर गंदे गंदे इशारे करते है,पर मम्मी ने कभी इस बात पे ध्यान नही दिया.

पापा वैसे तो पूरा दिन सुबह से रात तक दुकान पर ही रहते है रात मे दोस्तो के साथ शराब पी कर मम्मी के साथ फटाफट चुदाई कर सो जाते है.

वैसे पापा का लंड भी काफ़ी छोटा था 4इन का, और इस तरह मम्मी की सेक्स की प्यास पूरी नही हो पाती है फिर वो किचन मे जाकर कभी उंगलियों से तो कभी किसी बॉटल से अपनी चूत की तड़प शांत करती है.

ये बात दो साल पहले की है. मंदी की वजह से पापा को दुकान पर पचास हज़ार का घाटा हुआ, जिसके चलते पापा परेशान रहने लगे.

पापा का एक दोस्त थे जिनका नाम महेश (45) था वो हमसे काफ़ी पैसेवाला था. उस वक़्त उन्होने पापा की पैसे से हेल्प की जिसकी वजह से पापा का कर्ज़ा निकल गया पर हम महेश अंकल के एहसान मे बँध गये.

अंकल शादीशुदा थे और उनके 3 बचे थे, दिखने मे भी काफ़ी रौबदार और घनी मुच्छे थी उनकी, उनके गले मे सोने की चैन हमेशा रहती.

उसके बाद अंकल का हमारे घर आना जाना काफ़ी होने लगा. पापा कभी खाने पर तो कभी कुछ मोको पर उनको बुलाते तो कभी वो खुदसे आ जाते, कई बार जब पापा घर पर ना हो तो वो तब भी आते और मम्मी से बाते किया करते, उनके एहसान की वजह से मम्मी भी उनका बोहोत सम्मान करती थी.

मैने कई बार नोटीस किया की कई बार वो मम्मी के नशीले बदन को गहरी निगाहो से ताकते रहते, और अकेले मे मम्मी की तारीफ़ किया करते..

जैसे की तुम माधुरी जेसी दिखती हो और तुम बड़ी हसीन हो, साड़ी मे तुम बड़ी अच्छी लगती हो. तो उसके बाद मम्मी ने हमेशा साड़ी ही पहेनना शुरू कर दिया.

एक दिन पापा कुछ समान लेने शहेर से बाहर गये थे. तब सुबह सुबह मे महेश अंकल घर आ गये. और हॉल मे बैठ गये.मैं बाहर के लिए जा रहा था और मम्मी बाथरूम मे नहा रही थी.

मम्मी को लगा की मैं चला गया हू और घर मे कोई नही है इसलिए वो पूरी नंगी ही बाथरूम से नहा के निकल आई, उनके गीले बदन पे पानी के कतरे चमक रहे थे और नंगे वक्षों पे निप्पल कठोर हो गये थे.

उनकी चूत क्लीन शेव थी, शायद अभी अभी सॉफ की थी, अंकल तो मम्मी को पूरी नंगी देख के अवाक ही रह गये थे और बैठे थे तो खड़े हो गये.

मम्मी अंकल को हॉल मे देख के चोंक गयी और अपने मोटे वक्षों को हाथों से छिपाते हुए वापिस बाथरूम मे घुस गयी अंकल कुछ देर तक बदहवास से खड़े रहे और फिर मुस्कुराने लगे.

उनकी जीन्स मे मोटा तंबू बन गया था जिसे वो अपने खड़े लंड पे हाथ से सहलाने लगे. मैं ये सब चुपके से घर के बाहर खिड़की से देख रहा था.

मम्मी के कपड़े बाहर पड़े थे. अंकल सोफे पे बैठ गये और पेंट पे से ही अपने लंड को सहलाने लगे. और कहा, अरे कविता मे पराया थोड़ी ना हू बाहर आ जाओ.

मम्मी बाथरूम से बोली, माफ़ कीजिए भाई साहब मुझे लगा घर मे कोई नही है इसलिए मे ऐसे ही… मेरे कपड़े बाहर पड़े हे वो प्लीज़ मुझे दे दो… मैं आपके सामने ऐसे नही आ सकती हू.

अंकल: घर मे कोई नही है, जय बाहर गया है और अशोक भी नही है, मुझे तुम्हे नंगा देखने की बड़ी ख्वाहिश है क्या तुम पूरी नही करोगी, मेरे एहसानो की कोई कीमत नही.

मम्मी: आप ऐसा मत कहो मे ये नही कर सकती मुझे शरम आएगी.

अंकल: तो ठीक है मैं भी नंगा हो जाता हू, फिर तो कोई दिक्कत नही हम दोनो मदरजात नंगी अवस्था मे आ जाते हे.

अंकल मुस्कुराते मुस्कुराते अपने कपड़े उतारने लगे पहले शर्ट फिर पेंट और अंडरवेर. अंकल पूरे नंगे हो गये, उनका हशट पुष्ट शरीर काफ़ी आकर्षक दिख रहा था, उनका मोटा लंड उच्छल कर अंडरवेर से बाहर आ गया. उनका लंड करीब 8इन लंबा और काफ़ी मोटा था.

फिर अंकल बाथरूम मे गये और मम्मी का हाथ पकड़ कर बाहर खींच लिया, मम्मी ने अपने हाथो से मोटे वक्षों को छिपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी और आँखे मिचे हुए थी.

अंकल: अब शरमाना छोड़ दो कविता अपनी आँखे खोलो और इस मोके का आनंद लो.. मैं तुम पे ज़ोर नही आज़माउँगा और किसी को कुछ पता नही चलेगा.

मम्मी ने अपनी आँखे खोली और अंकल को अपने आँखो के सामने मोटे लंड को हिलाते नंगा खड़ा देख शर्मा के नज़रे झुका ली.

अंकल: आह, कविता बड़ा नशीला बदन है तुम्हारा, बोहोत बुरा हाल कर दिया है मेरे लौडे का देखो इसे शांत ही नही बैठ रहा अब तुम ही इसे शांत कर सकती हो. इसे प्यार करो, सहलाओ.

अंकल ने मम्मी का हाथ अपने लंड पे रख दिया जिसके कारण मम्मी का पूरा शरीर हिल गया. उनके निप्पल तन के कठोर हो गये जिससे अंकल अपने मज़बूत हाथो से सहलाने लगे.

मम्मी: मैने जय के पापा के अलावा किसी गैर मर्द के साथ ऐसा नही किया.. मुझे बड़ा अजीब लगा रहा है..

मम्मी का हाथ लगातार अंकल के तगड़े लंड को हिला रहा था.

अंकल: डरो मत कविता इस अनुभव का आनंद लो, तुम्हारे यौवन की अशोक को फिकर नही है. अगर तुम मेरी बीवी होती तो तुम्हे रानी बनाके रखता. आज मैं तुम्हे असली कामसुख का अनुभव कराता हू.

मम्मी की आँखे मस्ती से बंद हो रही थी और अंकल मम्मी के अंग अंग को अपने हाथो की गर्मी से गर्म कर रहे थे.

अंकल ने मम्मी को पकड़ के सोफे पे सुला दिया और उनकी चिकनी गीली चूत को अपने मुँह मे भर के मम्मी की सेक्स की भूख को भड़काने लगे. अंकल की जीभ मम्मी की चूत मे करतब दिखा रही थी और एक हाथ से अंकल अपना लंड हिला रहे थे.

मम्मी अपने हाथो से मोटे मोटे बूब्स को दबा के कामोत्तेजना की आग मे झुलसा रही थी. उत्तेजना के सागर ने मम्मी को इतना पागल बना दिया था की 5 मिनिट मे ही चूत से रस बहने लगा जिससे अंकल ने अमृत समझ कर चाट लिया अपने मुँह को मम्मी के होंठो से सट्टा के उनके रस का स्वाद चखा रहे थे.

अब अंकल ने मम्मी को नीचे बिठा दिया और लंड को चूसने का इशारा किया.

मम्मी: जय के पापा का भी मैने कभी मुँह मे नही लिया प्लीज़..

अंकल: आज मेरा ले के देखो बड़ा स्वादिष्ट लगेगा जय के पापा से भी अच्छा है. और आज वक़्त आ गया है के तुम मुझे खुश कर के मेरे एहसानो को भर दो.

मम्मी ना चाहते हुए भी अंकल का तगड़ा मोटा लंड मुँह मे लेके चूसने लगी. मुँह मे जाते ही लंड फुफ्कारे मार के कड़क हो गया.

आधा लंड जाते ही मम्मी का मुँह भर गया. पापा के मुक़ाबले मे अंकल का लंड काफ़ी मोटा और बड़ा था.

आअहह कविता बड़े अच्छे से चुस्ती हो तुम, पागल कर दिया है तूने मुझे आअहह. अंकल का लंड चूस्ते हुए मम्मी के मुँह से पुच्छ पुच्छ की आवाज़े निकल रही थी.

10 मिनिट तक लगातार चूसने के बाद भी अंकल का व्हिर्य नही निकल रहा था. अंकल ने मम्मी के सर को उनके लंड पे धकेल दिया जिससे उनका पूरा का पूरा मोटा लंड मुँह मे चला गया और मम्मी के गले मे अटक गया मम्मी की आँखे बाहर हो गयी और आँसू निकलने लगे.

अंकल की मज़बूती के आगे मम्मी कुछ भी नही थी. लंड बाहर निकलते ही मम्मी खांसने लगी और साँसे सही करने लगी. पर अंकल को कुछ फ़र्क़ नही पड़ रहा था वो तो सेक्स के नशे मे गुम थे.

अब अंकल ने मम्मी को सोफे पे लिटा दिया और एक तकिया उनकी कमर के नीचे रख दिया.

मम्मी: कॉंडम के बिना मत चढ़ो, कही कुछ…

अंकल: मैं कॉंडम यूज़ नही करता हू, और कुछ नही होगा, वैसे भी मैं चाहता हू मेरे प्रेमरस से तेरी चूत की प्यास बुझे.

अंकल ने एक धक्का मारा और उनका आधा लंड मम्मी की चूत की तंग दीवारो को चीरता हुआ उसमे समा गया.

मम्मी चिल्लाई – उऊयईीई माआ आअहह प्ल्ज़ हल्का हल्का करो, मैं इसकी आदि नही हू आअहह…

अंकल ने लंड बाहर खींचा और फिर धक्का मारते हुए कहा – आज से आदि हो जाओगी मेरे लंड की. मज़े लो ऐसा सुख अशोक कभी नही दे पाएगा तुम्हे.

अंकल धीरे धीरे पूरा लंड मम्मी की चिकनी तंग चूत बाहर से अंदर बाहर करने लगे.

अब मम्मी की चीखों मे दर्द कम वासना ज़्यादा थी. अंकल भी ज़ोर ज़ोर से गुर्रटे हुए चोद रहे थे. और मम्मी के बूब्स को अपने हाथो से मसल रहे थे. कभी कभी निपल को होंठों मे फसा कर उनका रस निचोड़ते थे.

घपा घाप चुदाई से मम्मी का पूरा बदन हिल रहा था और बूब्स तो मानो हवा मे लहरा रहे थे.

आधा घंटे की दमदार चुदाई के बाद अंकल के लंड ने मम्मी की चूत मे अपने प्रेम रस से उनकी कोख को तरबतर कर दिया. दोनो का शरीर चुदाई की मेहनत के बाद पसीने मे भीगा था.

काफ़ी देर तक दोनो वैसे ही चिपके हुए एकदुसरे के होंठो को चूम रहे थे.

बस यही एहसानो का बदला.