जब घर पर कोई नहीं था, 8 दिन तक नौकर से खूब चुदी

मेरा नाम निकिता हे और मुझे इन्सेस्ट सेक्स कहानिया पढना बहुत अच्छा लगता हे जैसे की भाई बहन का सेक्स, ससुर बहु का सेक्स, अंकल और भांजी भतीजी का सेक्स, माँ बेटे का सेक्स. ऐसी कहानिया मैं बहुत पढ़ती हूँ. और आज मैं अपना भी एक अनुभव आप लोगों के लिए ले के आई हूँ. मैंने नाम और जगह को बदल दिया हे प्राइवेसी के लिए.मैं 24 साल की हूँ और मेरा फिगर 35 26 36 का हे. दिखने में हॉट हूँ और स्कूलिंग तक ही पढ़ी हूँ. फिर मैंने इग्नू से अपनी डिग्री ली घर पर ही स्टडी कर के. मेरे पापा का अपना बिजनेश हे और उनका एक नोकर था संजय. वो अक्सर दोपहर में पापा की ऑफिस से उनका टिफिन लेने के लिए हमारे घर आता था. वो मजाकिया और बडबोला था और मुझे काफी अच्छा लगता था. संजय के आते ही मम्मी किचन में बीजी हो जाती थी कुकिंग फिनिश करने के लिए और टिफिन की पेकिंग में.संजय मेरे से उम्र में छोटा था. और वो साला पक्का हरामी थी. वो मुझे बगल के रूम में ले जाता था और मेरी छाती और जांघ के ऊपर हाथ फिराता था. वैसे मैं एक्टिंग तो करती थी ये सब से नाराज होने की लेकिन मुझे अंदर ही अंदर मजा आता था. तभी तो उसके आते ही मैं खुद सामने से वो कमरे में चली जाती थी. ताकि वो आ के मुझे टच कर सके. मम्मी जब आवाज लगाती किचन से तो वो डिब्बा लेने के लिए भाग जाता था. अक्सर मैं उसके विचारों में खोई हुई अपनी चूत में ऊँगली भी कर लेती थी.

संजय मुझे कहता था की आप ना ब्रा मत कहना करो क्यूंकि उस से दबाने मजा नहीं आता हे. लेकिन जब मम्मी घर में हो तब ब्रा ना पहनने में बड़ी प्रॉब्लम थी. वो मुझे उसके लिए डांटती जो आई हे पहले से. माँ कहती हे की ब्रा ना पहनो तो छातियाँ फुल के भद्दी सी लगने लगती हे. लेकिन एक दिन मैंने अपने दुपट्टे के निचे छिपा लिया ताकि मम्मी देख ना सके की मैंने ब्रा पहनी हे की नहीं. संजय आया तो मम्मी किचन में ही थी. उसने संजय को बोला की देख सब्जी कच्ची हे अभी इसलिए जल्दी मत करना. संजय बोला ठीक हे और वो मेरे कमरे में आ गया.संजय ने आज मेरा टॉप ऊपर किया और ब्रा नहीं थी तो वो बड़ा खुश हो गया और बोला आज तो मजा आ जाएगा निकिता. और फिर उसने अपने चहरे को मेरे बूब्स के ऊपर रखा और मेरे निपल्स को किस करने लगा और चूसने लगा. मैंने उसकी पेंट के ऊपर हाथ रख के उसके कडक लंड को पकड लिया.

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वो सच में बहुत ही बड़ा था. लेकिन मैंने तो सिर्फ पोर्न और XXX क्लिप्स में ही लंड देखे थे असल में नहीं. मैं उसके लंड को देख लेना चाहती थी. मैंने उसे कहा तो वो बोला देख ले. मैंने उसकी पेंट खोली और लंड को बहार निकाला. वो लोहे की रोड के जैसा गरम था लेकिन टच करने के ऊपर मस्त सॉफ्ट सॉफ्ट चमड़ी लगी मुझे.संजय ने फिर से मेरे बूब्स को दबाये और उन्हें चूसने लगा. तभी मम्मी ने उसे आवाज लगाईं और वो बोला, बहनचोद सब्जी को भी अभी ही रेडी होना था. मैंने हंस पड़ी उसकी मज़बूरी को देख के. मैं भी अपनी प्यासी गीली चूत की वजह से दुखी थी लेकिन मैं ये भी जानती थी की कुछ नहीं हो सकता था इतने कम समय में.मेरा और संजय का ये टुटा और कम समय का अफेयर ऐसे ही चलता रहा. पता नहीं वो अफेयर था भी की नहीं लेकिन हम दोनों हफ्ते में 6 दिन में ऐसे मस्ती करते थे. मैंने उसका लंड पकडती और वो मुझे गरम कर के चला जाता था.फिर पापा ने खुद ड्राइविंग छोड़ दी क्यूंकि उन्हें हाई बीपी की प्रोब्लम हुई थी. एक बूढ़े अंकल जिसका नाम जगदीप था उसे पापा ने फेमली ड्राईवर रख लिया. संजय अगर काम में बीजी रहे तो पापा जगदीप के हाथो अपना कहना मंगवा लेते थे. फिर मेरी माँ बीमार हुई और पापा उसे ले के हॉस्पिटल गए. पापा को भी मम्मी के पास रहना पड़ा क्यूंकि डॉक्टर ने उन्हें एक हफ्ते के लिए एडमिट किया था. पापा ने संजय को बोला घर संभालने के लिए.अब मैं खाना बनाती थी और वो दिन में दो टाइम माँ पापा के लिए टिफिन ले के जाता था होस्पिटल में. पहले दिन ही शाम को वो हॉस्पिटल से आया तो मैंने उसके लिए खाना निकाला. मेरी एक दोस्त से मैंने प्रेग्नन्सी रोकने की टेबलेट की ब्रांड नेम पूछ ली थी बात बात में. संजय को पर्ची में वो लिख के दी और मेडिकल से मंगवा ली. जो मेडिकल वाला था वो संजय को जानता था और उसने पूछा की किसके लिए ले के जा रहा हे?

मूर्ख संजय ने बता दिया की साहब की बेटी ने मंगवाई हे. दूकान में सब लोग हंस पड़े. और वो एक नहीं पूरी 10 टेबलेट ले के आया था. मैंने उन्हें छिपा दी. फिर हम दोनों ड्राइंग रूम में बैठ के टीवी देख रहे थे. वो मेरे साथ में रात बिताने के ख्याल से ही उत्साहित लग रहा था. मैं भी खुश थी की इस जवान नोकर के लंड से चूत खुलवाने को मिलेगी.पहले तो मैंने उसे समझाया की देखो यहाँ जो भी होता हे इस घर में वो किसी को भी न बताये. वो अग्री हो गया. मैंने अपनी ब्रा और पेंटी उसके आने के पहले से ही निकाल दी थी. संजय ने मेरे बूब्स पर हाथ रखा और वो दबाता रहा. उसने मुझे दो किस भी दी मेरे गालो के ऊपर और वो आगे बढ़ने में थोडा असहाय लग रहा था.

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