चुदाई की तड़प ने मुझे नौकर से चुदने पर मजबूर किया

मैं पारुल आज आप के लिए एक मस्त कहानी ले के आई हूँ. मेरी उम्र 25 बरस की हे और मैं मेरिड हाउसवाइफ हूँ. वैसे मेरी लाइफ में सब कुछ हे, पैसा, बगंला गाडी, नोकर चाकर. लेकिन एक औरत के नजरिये से देखूं तो लाइफ में कामरस नहीं हे बीएस! पति का अच्छा बिजनेश हे जो मेरी सब से बड़ी सौतन हे! बिजनेश की वजह से वो घर से और मेरे से दूर जो रहते हे! पति के सिवा सुख और मजे करने की सब चीज हे मेरे पास. लास्ट इयर की बात हे. तब मेरे पति दुबई की ट्रिप से आये. और अभी एक ही दिन हुआ था की फिर दिनभर उन्के फोन चले. शाम को खाने के टेबल पर अपने लेपटोप में कुछ इधर उधर करते हुए वो बोली, पारुल मुझे काल इवनिंग में जर्मनी निकलना हे एक महीने के लिए. एक नया क्लाइंट बन सकता हे वहां पर.

रात को मैं इतना रोई की मेरा तकिया तक गिला हो गया था. शराब की पूरी बोतल पी गई. पति रातभर कमरे में आये ही नहीं. उन्के लंड को देखे ज़माना हो गया था मुझे. शराब और दिल के दर्द ने तबियत ख़राब कर दी मेरी! हॉस्पिटल में भी मुझे घर का नोकर शंकर ले के गया. डॉक्टर ने कुछ घंटे एडमिट किया. शंकर वही पर रहा जब तक मैं एडमिट थी. मैंने उसे बुलाया और उसको कहा, शंकर थेंक यु तुमने मेरे लिए ये सब किया उसके लिए.शंकर ने कहा, भाभी हम तो आप के नोकर ही हे. और आप की सेवा करना ही हमारा कर्तव्य हे. गरीब हे और मजबूर इसलिए बीवी बच्चे सब छोड़ के यहाँ शहर में आये हे. और आप के पास पैसे हे लेकिन आप की मज़बूरी कैसी हे की आप का पति आप के पास नहीं हे. ऐसे में अकेलान अंदर से मार देता हे तो मुझे पता हे. आप भी अकेली हे और हम भी!

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मेरी आँख में पानी आ गया उसकी बात सुन के.

मैं अपने पर्स में से 2000 के दो नोट निकाले और उसे देते हुए कहा, जाओ मैं छुट्टी देती हूँ तुम घर हो आओ.

वो बोला: नहीं मेडम अभी साहब महिना बहर बहार रहेंगे फिर आप खूब ड्रिंक करेंगी जैसा की आप करती हे. फिर आप का ध्यान भी तो रखना हे. पैसे के लिए शुक्रिया, वो हम अपनी बेटी के लिए घर भेज देंगे.उसकी बाते मेरे दिल के आरपार सी हो गई. मैंने सोचा की ये गरीब हे और मज़बूरी में अपने पपार्टनर से दूर हे. और मेरा पति पैसे के लिए मुझे छोड़ रहा हे. मुझे लगा की शंकर भी ऐसे ही तडप रहा था जैसे मैं. मुझे एक पल के लिए लगा की हम दोनों एक ही कश्ती के सवार थे!

और उस वक्त मुझे एक नंगा विचार आया की क्यूँ न हम दोनों मिल के एक दुसरे की इस तडप को दूर कर ले! और उस दिन मेरी निगाहें अपने इस नोकर के लिए बदल सी गई.एक दिन शंकर घर में सफाई के काम में लगा हुआ था. उस समय उसका बदन आधा नंगा सा था. उसने एक हाल्फ-पेंट पहनी हुई थी. उसके मांसल हाथ और गदराये से बदन को देख के मेरे मन में गुदगुदी सी होने लगी थी. मैंने सोच लिया की आज तो कुछ भी कर के शंकर के साथ मिल के अपनी प्यास को दूर करवा लुंगी!

रात में वो कमरे में आया और बोला, मेडम खाना रेडी हे आप के लिए टेबल पर निकालूं?

मैंने कहा, एक काम करते हे न.

वो बोला, क्या भाभी?

मैंने कहा, मेरे पैरो में बहुत ही दर्द सा हो रहा हे इसलिए खाने के मूड नहीं हे. तुम गरम तेल की मसाज कर सकते हो मेरे लिए?

वो बोला: मैं अभी सरसों का तेल गरम कर के लाता हूँ.

मैं उस वकत गाउन पहन के बैठी हुई थी. उसके आने से पहेल मैं बिस्तर में लम्बी हो गई. शंकर 2-3 मिनिट में ही एक कटोरी के अन्दर तेल ले के आ भी गया. मैंने अपने गाउन को ऊपर कर के अपनी चिकनी जांघे उसके सामने खोल दी और कहा, आ जाओ मुझे मालिश कर के मेरे दर्द को दूर कर दो. शंकर ने मुझे देखा और बोला, जी भाभी जी और वो मेरे पास बैठ के सरसों का तेल मेरे पैरो के ऊपर लगाने लगा.

मैं उसे देख के अन्दर से कराह रही थी. और अपने गाउन को और भी ऊपर कर दिया ताकि वो देख सके मेरी जवानी को.शंकर की निगाहें बार बार मेरी जांघो के ऊपर जा रही थी. मेरी पेंटी भी बहार से दिख रही थी. मैं खुद ही दिखा जो रही थी. शंकर की ग्रिप मेरी जांघो के ऊपर तेज होने लगी थी. फिर मैंने अपनी पेट के बल लेट के अपनी कमर उसकी तरफ की और कहा, शंकर पीठ के ऊपर भी तेल और अपने हाथ का जादू दिखा दो. वहां पर भी दर्द हो रहा हे.

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