हमने नया गाँव बसा लिया

इधर मेरा साथी मनोहर, महरुन्निसा को चोद रहा था और रुबिया की चूत उसके मुँह में थी. इसी प्रकार सभी लड़के लड़कियाँ खूब मजे से चुदाई का आनंद ले रहे थे।

लगभग दो घण्टे चुदाई के बाद हम लोगों ने 15 मिनट का विश्राम लिया क्योंकि 20 लड़कियों को एक बार में ही चोद लेने की क्षमता किसी में भी नहीं थी।

15 मिनट बाद फिर से खेल चालू करना था तो फिर हम लोगों ने निश्चय किया कि ऐसे तो सब लड़के चोदेगें और सब लड़कियाँ चुद जायेंगी पर पूरा मजा किसी को नहीं आयेगा।

तो हमने सबके नामों की एक सूची बनाई और हर लड़के को तीन लड़कियों को चोदने की अनुमति दी गयी।
यह निश्चय किया गया कि सात दिन में सभी को सभी से चुदने का मौका मिल जायेगा। और लड़कियाँ गर्भवती होंगी तो इन संतानों के पिता सभी 15 साथी माने जायेंगे।

सात दिनों तक चुदाई के बाद सभी लड़कियों को गर्भ ठहर गया।

फिर हम लोगों ने अपने लिये सौ बीघा जंगल साफ किया, गांव से हल बैल आदि खरीद लाये, खेती शुरू की।
हम लोगों ने रहने के लिये 15 घरों का निर्माण किया। ये सभी घर आपस में खुले हुये थे, जब जिसका, जिससे मन करता, चोद लिया करता था.
हर महीने में पहले हफ्ते के सात दिन हम लोग 3-3 चुदाई वाला कार्यक्रम करते थे। जिससे हम लोगों का भाईचारा बना रहता था.

धीरे धीरे लगभग पहली पीढ़ी में 50 बच्चों ने जन्म लिया, हमने वहीं अपना गाँव बना लिया, 100 बीघा में हमने फलों के बगीचे भी लगाये, बहुत सी गाय भैंसें भी खरीद ली गईं।

हमने अपने सभी बच्चों की शादी भी आपस में करवा दी. अब हमारे गाँव की आबादी 2 हजार के ऊपर हो चुकी है. लेकिन हमारे गाँव में आज भी सामूहिक चुदाई कार्यक्रम चलता है. गाँव की हर लड़की हर लड़के की दुल्हन होती है। बस एक बात का ही ख्याल रखा जाता है कि कोई किसी को जबरदस्ती नहीं चोदेगा। और हर नई जवान लड़की पहले हम 15 साथियों से बारी बारी से चुदेगी। और हर कुंवारा लड़का पहले हमारी 20 पत्नियों को चोदकर अपनी मर्दानगी की परीक्षा देगा।

लेकिन अब हम सब रिटायर हो रहे हैं तो हमारी चोदन परीक्षा की जिम्मेदारी हमारी अगली पीढ़ी के 50 बच्चों पर आ गयी है।
इनके रिटायर होने के बाद हमारी तीसरी पीढ़ी के 82 बच्चों पर होगी।

यह कहानी कैसी लगी, मेरे ईमेल पर बताइयेगा।

Pages: 1 2 3 4