पड़ोसन आंटी का अंगप्रदर्शन और धमाकेदार चुदाई

यह कहानी काल्पनिक है, इसमें दर्शाये गए चरित्र व घटनाएँ वास्तविक नहीं हैं.

मैं योगू.. उम्र 23 साल, महाराष्ट्र से हूँ. अपनी नयी सेक्स की स्टोरी लेकर हाजिर हूँ, सो लेडीज, आंटी, और भाभी अपनी अपनी चुत में उंगली डालने को तैयार रहो.

यह स्टोरी मेरी और मेरी पड़ोसन दीपा आंटी की है. उनका क्या मस्त गदराया बदन है यार.. उफ़ देखते ही लंड खड़ा हो जाता है. दीपा आंटी की उम्र 40 साल है. उनके 38 इंच के बूब्स बहुत मस्त हैं.. कमर 34 की और गांड का तो जवाब ही नहीं है, पूरे 40 इंच की है. मुझे भी ऐसे मस्त गदरायी हरी भरी लड़कियां और औरतें ज्यादा पसंद हैं.

मैं हमेशा ही दीपा आंटी को सेक्सी नज़रों से देखता रहता था. एक दिन वो कपड़ा धो रही थीं, मैं उनके पास जाकर बैठ और उनके हिलते हुए बड़े बड़े मम्मों को देखते हुए उनसे बातें करने लगा.
वो- क्या रे.. आज बहुत बातें कर रहा है?
मैं- कुछ नहीं, आप जैसी जानदार और शानदार आंटी से तो बातें करना मेरा सौभाग्य है.

वो हंसते हुए अपने पल्लू को गिराते हुए और भी ज्यादा कामुकता दिखाने लगीं और बोली- वैसे सिर्फ़ बातें ही करता है या अब तक कोई शानदार काम भी किया है?
इतना कह कर आंटी मेरे खड़े होते लंड की ओर देख कर हंसने लगीं.

मैं- आप एक मौका तो दो.. तो बता देता हूँ कि आपका काम कितना अच्छा और शानदार तरीके से करता हूँ.

उनकी साड़ी ऊपर हो जाने के कारण उनकी चिकनी मस्त गदरायी जाँघों को देखते हुए बोला- वैसे आप तो बड़ी जानदार बनी हुई हो, अन्दर से भी और बाहर से भी बड़ी हॉट दिखती हो.

मैं उन्हें ठीक से देखने का बहाना बना कर उनकी चुत देखने का मौका देख रहा था. मगर अन्दर का कुछ नहीं दिख रहा था. तो आंटी हल्के से अपने घुटनों को और खोलते ऐसे बैठ गईं, जिससे मुझे उनकी मस्त क्रीम कलर की पेंटी दिखाई दे जाए.

अब आंटी मुझे पेंटी की झलक दिखाते हुए और हिल हिल कर कपड़े धोने लगीं.

जैसे ही वे आगे पीछे को होतीं, वैसे ही वो अपनी अदा मादक सी बनाते हुए मुझे रिझाने लगतीं.

मैं भी उनकी गोरी चिकनी गदरायी मोटी मोटी भरी हुई जांघें देख कर मुँह में पानी लाता और अपनी जीभ होंठों पर फिराने लगता.

आअउह उनहह.. मैं तो पागलों की तरह उनको देख रहा था, वो जानती थीं कि मैं उनसे क्या चाहता हूँ. मगर पक्का पता करने के लिए और मुझे भड़काने के लिए आंटी ऐसा कर रही थीं.

अचानक वो कपड़े सुखाने जाने के लिए उठीं. वो मुझसे बोलीं- योगू जरा आगे आकर देख तो.. मुझे लगता है कि मेरी साड़ी में चींटी घुस गई है.. कहीं काट ना ले.. देख तो जरा..
मैंने आगे बढ़ते हुए कहा- कहां है आंटी दिखाना जरा.
उन्होंने अपनी टांग को सीधा करते हुए साड़ी उठा दी और कहा- शायद जाँघों पर है.. ढूँढ कर निकाल तो दे, मेरे हाथ में कपड़े हैं.
मैंने आगे बढ़ते हुए कहा- हां आंटी रूको, मैं देखता हूँ.

मैं उनके सामने घुटने टेक कर बैठा और उनकी मस्त चिकनी टांगों पर हाथ रखते धीरे धीरे सहलाने लगा. मैंने अनजान बनते हुए कहा- आंटी बताना जरा किधर लग रही है?

यह कहते हुए मैंने उनकी साड़ी में अपना सर अन्दर घुसाया. मेरी सांसें बहुत गरम होकर तेज़ी से चल रही थीं और सर अन्दर डालने के वजह से उनकी चुत की महक मुझे और कामोत्तेज़ित कर रही थी.
‘अहहहा.. आहह…’

मैं अपना हाथ आंटी की गदरायी हुई जाँघों पर सहलाते हुए देखने लगा. वो भी मज़ा लेने लगी थीं- आहह.. इधर से और ऊपर देख न..

मैं उनकी चुत को पेंटी के ऊपर नाक लगा कर सूँघने लगा.
तभी बोली- हां शायद यहीं अन्दर घुस गई है..

मैंने उनकी चुत पर हाथ फेर दिया. उन्होंने मुझे झट से बाहर निकाला और देखने लगीं. मैं अपने आपे में नहीं था. मुझे ऐसा लग रहा था कि साली आंटी को अभी पटक कर चोद दूँ. हालांकि इसमें रिस्क था, सो मैं चुपचाप खड़ा रहा.
आंटी गांड मटकाते हुए चली गईं- अभी आती हूँ.

मैं मुँह बनाकर वहीं उनका इंतज़ार कर रहा था. वो अब धुले हुए कपड़े सूखने डाल कर आईं और दूसरे कपड़े उठाने लगीं. मैं बोला- क्या हुआ आंटी.. चींटी मिली क्या.. कहीं काटा तो नहीं ना?

वो हंसते हुए मेरे लम्बे खड़े हुए लंड को पेंट में तंबू बनाते देखते हुए बोलीं- नहीं मिली.. लगता है वो भाग गई.

वे फिर से कपड़े धोने लगीं. मैं अब लंड को दबाते हुए उनकी ओर थोड़ा कम देखते हुए दूसरी तरफ देख रहा था. मगर वो बार बार मुझसे बातें करने की कोशिश करते हुए मुझे अपनी ओर देखने को बोल रही थीं.
अचानक उन्होंने कुछ मेरी तरफ़ फेंकते हुए ऐसा जताया कि कपड़े धोते वक्त आ गया हो.

मैंने जब ध्यान से देखा.. तो वो उनकी पेंटी थी, जो अभी थोड़ी देर पहले उन्होंने पहनी हुई थी. मतलब साफ़ था कि आंटी मेरा ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयास कर रही थीं. मैंने देखा कि वो भी अंजान बनकर जानबूझ कर अपने पैर फैलाए बैठी थीं.

मैं तो सीन देखता ही रह गया. अब तो आंटी की मस्त गदरायी गोरी जांघें साफ़ साफ दिख रही थीं. मेरी नज़र और अन्दर गई तो देखा उनकी मस्त पिंक कलर की चुत साफ़ नज़र आ रही थी. चुत पर थोड़े से बाल भी थे. उन झांटों की बीच आंटी की भरी हुई मस्त फूली हुई उनकी चुत के होंठ बहुत मस्त लग रहे थे. वो नज़ारा देखते ही मेरी जीभ मेरे होंठों पर घूमते हुए मुझे आगे झुककर देखने को मजबूर कर बैठा.

आंटी ने भी मुझे कामातुर होकर चूत दिखाना शुरू कर दी.
मैं हंसते हुए बोला- अरे आंटी आखिर चींटी ने आपको काट ही लिया ना.. आप कहो तो थोड़ा पानी लगाऊं.. ठंडक पड़ जाएगी.
यह कहते हुए मैं हंसने लगा.

वो भी नाटक करते हुए बोलीं- हां अब क्या करें.. मेरे पीछे ही पड़ गई.. अब तो ये और अन्दर घुस गई.

ये कह कर आंटी ने अब अपनी जांघें और अधिक चौड़ी करके कपड़े धोने की स्पीड बढ़ा दी. उनकी हरकतें ठीक उस तरह थीं जैसे चुदाई के वक्त झटके मारते हुए आगे पीछे होते हैं ना, बिल्कुल वैसे बदन हिला रही थीं. उनके कंगन की आवाज़ भी उस माहौल में पागल मुझे बनाने पर तुली थी.

आंटी अपने मुँह से जानबूझ कर ‘आअहह आ आ ससी सी ससिईई हम्म.’ जैसी आवाजें निकाल रही थीं.

मैं बोला- आंटी आपके पति बहुत लकी हैं. वे आपके जैसी कमसिन सेक्सी भरी हुई बीवी के साथ रोज मज़ा करते होंगे. आपका बदन भी आपने बहुत मेंटेन कर रखा है.. काश आपकी जैसे कोई मुझे मिल जाए.. तो मैं भी मज़ा लेना चाहूँगा.
इतने पर वो बोलीं- अरे रहने दे.. कोई मजा वजा नहीं लेते.. मैं भी क्या करूँ.. वो तो जल्दी ही सो जाते हैं और मुझे मज़ा ही नहीं मिल पाता. हफ़्ता भर में कभी कभार प्यार करते हैं.. वरना मैं तो अभी और भी ज्यादा मस्त हो जाती. तेरे अंकल की जगह कोई और होता तो मैं भी हर रोज मज़ा कर लेती.

मैं उनकी बात सुनकर अपने लंड को सहलाने लगा.

आंटी मेरे लंड को फूलता हुआ देखकर अचानक से उठते हुए साड़ी हटाते हुए बोलीं- अरे जरा अन्दर आ ना.. मेरी साड़ी में अभी भी शायद चींटी है.. देख तो जल्दी से.

आंटी के ये कहते ही मैं उनकी गदरायी हिलती हुई गांड को देखते पीछे से घर में घुसा.

वो झट से बोलीं- साड़ी के अन्दर ज़ाकर कर देख.. कहीं दिखती है क्या.. और अच्छे से मेरी चिनमिनी शांत कर दे इस चींटी से मुझे निजात दिला दे. अब रहा नहीं जाता.

मैंने भी उन्हें लिटाकर उनकी साड़ी को उठा दिया. फिर जल्दी से अपना मुँह सीधा उनकी चुत पे लगा कर अन्दर जीभ डालकर उनकी चूत का रस चाटने लगा.

वो अपनी गदरायी जाँघों के बीच मेरा सर और अन्दर दबाते हुए अपनी चुत चुसवाने लगीं. मैं भी मजे से आंटी की पूरी चूत पर अपनी जीभ को किसी कुत्ते की तरह फेरने लगा. आंटी पैर फैला कर मेरे बालों में हाथ फिराते हुए छटपटाने लगीं. मैं अपने हाथ उनके मक्खन पेट पर ले जा कर सहलाने लगा.

“आहह उहह मुउहह उहह … आंटी, कितने दिन से मैं आपको चोदना चाहता था. आज पूरी कर दी आपने मेरी तमन्ना.. आह…”
वो भी बोलीं- हां.. योगू मेरी जान.. मैं भी कितने दिन से तुझसे चुदवाना चाहती थी. आज बुझा दे मेरी प्यास.. आह.. चाट ले मेरी चूत.. आह..

मैं अब उनके ब्लाउज को खोलने लगा.. ब्रा भी खोल दी. आंटी के बड़े बड़े मम्मों को सहलाते हुए अपने हाथों से मजा लेने लगा. फिर आगे बढ़ते हुए मैंने अपने हाथ से उनका पेटीकोट और साड़ी को भी निकाल दिया. उन्होंने भी मुझे नंगा कर दिया.

मेरा 7.2 इंच का लंड देखते ही पागलों की तरह चुम्मा चाटती करते हुए मुझसे बोलीं- योगू क्या मस्त लंड है रे तेरा.. आज से इससे ही चुदवाऊंगी. जब भी मौका मिलेगा इसको अपनी चुत में लेने से नहीं चूकूंगी.

अगले कुछ पलों में ही हम दोनों 69 में हो गए. आंटी मेरा लंड कुल्फी की तरह चूसते हुए, गोटियों को हाथ से सहलाते लंड को अपने मुँह में अन्दर तक लेने लगी थीं.

आंटी इस वक्त मुझे जन्नत का एहसास दिलवा रही थीं. इसी के साथ मैं भी उनकी रसीली काम रस से भरी चुत को चाटता जा रहा था. आंटी की गदरायी मस्त गांड को अपने हाथों से दबोचते हुए और गांड के छेद को कुरेदते हुए उन्हें मज़ा दे रहा था.

हम दोनों ‘आहह उह सस्सीए उहह मयहह इस्स आस्स आहह आह..’ की आवाज़ के साथ एक दूसरे को मजा दे रहे थे. आंटी कामुक सीत्कारों के सिवाए एक भी शब्द नहीं बोल पा रही थीं.

वो कुछ ही देर में मेरे मुँह में झड़ गई और मैंने उनका कामरस चुत में जीभ डाल डाल कर चूसने लगा. क्या मस्त नमकीन स्वाद था.. चूत का रस चाटने के बाद मैं अब उनके मुँह में मुँह डाल कर उनको ही उनकी चूत के रस का स्वाद चखाने लगा. हम दोनों अब स्मूच करने लगे थे. हम दोनों की जीभें आपस में किलोलें कर रही थीं.

कुछ ही देर बाद आंटी फिर से गर्म हो गईं और चुदाई के लिए मचलने लगीं.

मैं अपना कड़क लंड उनकी चुत पर घिसते हुए, उनकी गदरायी जाँघों पर अपनी जांघें घिसते हुए और ज्यादा गरमी पैदा कर रहा था. मैं उनके पेट पर उंगली घुमाते हुए, हल्के से उनकी गांड दबाते हुए, कभी आंटी के गाल पर किस करते हुए.. तो कभी गले पर और हल्के किस के साथ निप्पल चूसने लगता.

अब वो अपना छटपटाते मुझसे बोल रही थीं- योगू.. ऊहह.. अब लंड डाल कर चोद दे.. मेरी प्यासी चुत को शांत कर दे.. ये कब से तेरे लंड से चुदवाने को बेताब है.. आह.. प्लीज़ आहह सीए उहह आजा मेरे योगू आ अब्ब रहा नहीं जाता.

यह हुए कहते आंटी ने मेरे लंड को हाथ में लेकर ज़ोर से दबाते हुए अपनी चुत के मुँह पर रख लिया. लंड को चुत की फांकों में घिसते हुए लंड का टोपा चुत के छेद पर रखा और नीचे से गांड उठाकर खुद लंड को अन्दर लेने की कोशिश करने लगीं.

मैं उनकी इस चुदास को देखते हुए दंग था. उनकी चुदास भरी आँखों में देखते हंसते हुए उनके होंठ पर होंठ रखकर चूसते हुए.. मुँह में मुँह डालकर चुदाई की पोजीशन में आ गया. मैंने नीचे से उनकी गांड को हाथों में पकड़ कर ज़ोर का झटका लगा दिया. लंड चुत से टकरा गया था. लंड के प्रहार से आंटी कराह उठीं.

आंटी इस चोट से इतनी अधिक कलप गई थीं कि वे मेरे होंठ को काटते हुए चीखना चाहती थीं, मगर मैंने उनके मुँह को पहले से ही अपने मुँह से बंद कर रखा था. मुझे अंदाज़ा लग गया था कि वो लंड घुसते ही जरूर चीखने की कोशिश करेंगी. इस बार के झटके से मेरा लंड उनकी चुत की मक्खन जैसी चिकनी और गरम दीवारों को ‘सर.. सर..’ से चीरते हुए उनके गर्भाशय से जा टकराया.

मैं अब पूरा गर्म होकर आंटी को चोदने में लगा. मैं गचागच अपना लंड पेले जा रहा था.
“आहह आहह …” आंटी की मादक कराहें निकल रही थीं, वो अब एंजाय करने लगी थीं और नीचे से अपने कूल्हे उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थीं. मैं हर झटके के साथ ज़ोर से अपना लंड आंटी की चुत में डालता और झटके के साथ उनके बड़े बड़े मम्मों को हिलते हुए देखता. उनके मम्मे बड़ी जोर से थिरकन करते हुए झूलने लगे.

हमारे बदन की घिसावट से चुदासी आवाजों से पूरा कमरा गूँज रहा था ‘आहह छट छथ.. फथफ्ट.. फतफ्ट आह.. उउहह उहह उहम्म उओ ससी..’
चुदाई की सुर ताल जैसी आवाजों से माहौल एकदम गरम हो गया था.

अब हम दोनों एक दूसरे को चोदते हुए अपनी प्यास को शांत करने पे ध्यान दे रहे थे. वो हर झटके के साथ मेरी गांड को अपने पंजों में लेकर दबा लेतीं.

मेरा लंड सटासट उनकी चुत की दीवारों को चीरते हुए मानो जन्मों के प्यासे लंड को उनकी चुत की गंगा में डुबकियां दिलाने में मशगूल होकर पागलों की तरह उन्हें चोदे जा रहा था. इस धमाकेदार चुदाई में वो भी कसकस के नीचे से अपनी गदरायी गांड को उठा उठाकर चुदवा रही थीं.

हम दोनों कुछ ही देर में झड़ने की कगार पर आ गए थे. ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ वो सीत्कारते हुए मुझे और ज़ोर से चुदाई करने को बोल रही थीं.

मैं भी बुलेट ट्रेन की रफ़्तार से आंटी को चोद रहा था. अचानक हम दोनों एक साथ में झड़ गए. मेरे लंड ने आंटी की चुत में ही पानी निकाल दिया. झड़ते समय भी मैंने 6-7 बार तेज झटके मारे और चुत के अन्दर ही रस छोड़ दिया. उसी वक्त उनकी चुत ने भी अपना गरम पानी छोड़ दिया. हम दोनों अपने कामरस से एक दूसरे को नहलाकर निढाल हो गए.

हम अब एक दूसरे को पकड़ कर एक दूसरे की बांहों में यूं ही जकड़ कर मुँह में मुँह डाले नंगे ही पड़े रहे. थोड़ी देर तक एक दूसरे की आंखों में देखते हुए आंखों से ही बातें करते रहे.

मैं आंटी को अपनी बांहों में लेकर प्यार से गालों पर चूमता, तो कभी नाक पर, तो कभी माथे पर और गले पर चूमने लगा. ऐसा करते हुए मैं अपने हाथों से उनकी प्यारी चूचियों को और निप्पलों को भी दबा देता. उनके हाथ में हाथ डालकर जोर से मसलता. ऐसा करते समय पैर की उंगली को अपनी उंगली और अंगूठे के बीच दबा कर घिस देता. उनकी गदरायी गोरी जाँघों पर जांघें घिसते हुए आंटी को प्यार करता रहा.

वो भी मेरे सर में बालों में हाथ रखते हुए मेरे बालों को हाथ की उंगली से सहलाए जा रही थीं.

आंटी अपने मुँह से बीच बीच में ‘आहह उहह ऑश..’ भी करती जा रही थीं. मुझे किस कर रही थीं.

ऐसे करते करते करीब आधा घंटे बाद हम दोनों फ़िर से गरम हो गए और इस बार वो उठ कर मेरा लंड सहलाने लगीं. मेरे लंड को आंटी ने पूरा खड़ा करके उस पर किस करने लगीं.

मैं भी उनके मम्मों को दबाते हुए उनकी चुत में उंगली करने लगा.
‘आहह महह..’

वो मेरे लंड को हाथ से पकड़ते हुए अपनी चूत पर उसे रगड़ने लगीं. आंटी मेरे ऊपर चढ़ गईं और मेरे तने हुए लंड को अपनी चुत की फांकों पर रखते हुए अन्दर फंसा लिया. जैसे ही लंड ने चूत की फांकों में अपने सुपारे से चुम्मी ली.. आंटी बड़ी ज़ोर से अपनी गांड को लंड पर दबाते हुए लगभग कूद गईं.

मेरा लंड भी ‘सर सर..’ करते हुए पूरा उसकी चुत में समा गया.
‘आहह अहहुहह..’ आंटी की कराह निकल गई. उन्होंने अपनी आँखें बंद करके लंड के मीठे दर्द को जज्ब किया. फिर अपनी गांड को उठा उठा कार मेरा लंड अपनी चुत में जड़ तक लेने लगीं. उनके इस तरह गांड उछालने के कारण उनके मम्मे ज़ोर ज़ोर से उछल कूद करने लग गए थे.

मैं भी उत्तेजित होकर नीचे से अपनी गांड को उठा उठाकर लंड से आंटी की चुत मारे जा रहा था. नीचे से मैं गांड उठा रहा था और ऊपर से आंटी की गांड ठुमक रही थी.

‘आहह आहह उह..’

हमारे बदन से धक्कों की आवाजों से फट फट की जैसी तेज रफ़्तार से आने लगी थीं. हम दोनों की चुदाई बड़ी घर्षण पैदा करते हुए हमारे बदन की आवाजों से और हम दोनों की कामुक चीत्कारों से पूरा कमरा गूँजने लगा था ‘आ हहुहऊहह उहह य्या याह एयेए हह आहह औउहह..’

अब आंटी भी ताबड़तोड़ उछल रही थीं.. जिससे उनके चूतड़ों से फटफट करते हुए मेरी गोटियां भी हर धक्के के साथ मजा ले रही थीं. उनकी गदरायी गांड पे लंड की गोटियां टकराते समय ऐसा लग रहा था, जैसे मेरी गोटियां आंटी की गांड को किस कर रही हों.

कुछ देर बाद आंटी ने वो पूरा लंड बाहर निकाल कर एकदम से फिर अपनी गदरायी चुत में ले लिया और अपनी गदरायी गोरी गांड को गोल गोल घुमाने लगीं. इस वजह से मेरा पूरा लंड उनकी मांसल कामुक चुत के हर एक कोने में जाकर अपनी गर्माहट से उनको मस्त कर रहा था. कुछ देर बाद हम दोनों ने दूसरी पोज़िशन ले ली.

मैंने इस बार मेरी मस्त आंटी को डॉगी स्टाइल में खड़ा करके पीछे से उनकी गांड को ज़ोर से ज़ोर से हाथ की हथेलियों से ‘ठप ठप..’ थपथपाते और चमाट मारते हुए एक किस किया. फिर अपना लंड ज़ोर से चुत में घुसा दिया. उनकी मस्त गोरी गोरी मदमस्त मांसल और भारी गांड और फूल कर चौड़ी हो कर फैल गई. उसे देखकर मैं तो और पागल हो कर ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.

मेरे लंड के हर एक धक्के के साथ वो आगे पीछे हो रही थीं. उनके मम्मे मेरे हर झटके के साथ ‘फट.. फट..’ आवाज़ करते हुए ऊपर नीचे हिलने लगे थे. मैं भी आंटी की गांड को कभी ज़ोर से दबाता, तो कभी ज़ोर से थपथपाते हुए चमाट मारता. इसके कारण उनकी गांड पूरी लाल हो चुकी थी. चमाट और मेरे धक्कों से उनकी गांड ज़ोर से आगे पीछे हिल रही थी.

‘आहह उहह शह फट फटत आहह..’ की मस्त आवाजें बदस्तूर माहौल को रंगीन बना रही थीं. मैं सटासट उनकी कमर पकड़ कर उन्हें चोदने लगा था.

कुछ ही देर में चुदास चरम पर आ गई और मैं थोड़ा झुक कर आंटी के बाल पकड़ कर उनकी चूत चोदने लगा.

तभी एकदम से गर्मी बढ़ गई और आंटी जोर जोर से अपने शरीर को ऐंठने लगीं. इधर मेरा भी चरम आ गया था.

कुछ ही झटकों के बाद मैं और आंटी एक साथ झड़ गए. मैं वैसे ही उनकी गांड पर उनके ऊपर पसर गया. उन्होंने अपना मुँह घुमाकर मुझे किस किया और मेरे हाथ अपने मम्मों पर रखते हुए दबवाने लगीं. हम दोनों वैसे ही थोड़ी देर लेटे रहे. फिर लेटे लेटे ही मैंने उनकी बांहों के अन्दर हाथ डाल कर उनके मस्त बड़े बड़े मम्मों को पकड़ लिया. अपने हाथों से आंटी के आमों को मसलते हुए मैं अपनी गांड को गोल गोल घुमाता रहा.

इससे मेरा लंड उनकी गांड की दरार में रगड़न पैदा करने लगा.

अब वो भी बड़ी मेरी आंटी बड़ी कमसिन नज़रों से मुँह पलट कर हंसते हुए मेरी गांड पे चमाट मारते हुए गांड को नोंचते हुए बोलीं- लगता है अभी भी मन नहीं भरा मेरे योगू का..

आंटी ने हंसते हुए मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और जीभ घुमाते फिराते मेरा लंड पकड़ कर दबोचने लगीं. आंटी ने अपनी एक टांग को घुटने से मोड़कर आगे कर दी. इससे उनकी चुत दब गई और कुछ ज्यादा ही टाइट हो गई.

इस पोज में मैंने झट से अपना कड़क खड़ा हुआ लंड, जो उनकी गांड पर मसलने से पहले से ही तैयार हुआ पड़ा था. वैसे ही उनकी चुत में लंड घुसाते हुए अपने हाथ से आंटी के मम्मों को कचाकच निचोड़ने लगा. अब मैं उनके खड़े हुए टाइट निप्पल को अंगूठे और उंगली के बीच लेकर ज़ोर ज़ोर से कुरेदते हुए मसलने लगा.

‘अहह…’ वो ज़ोर से कसमसाते हुए दर्द से कराहते हुए बोलीं- बेबी धीरे कर.. बहुत दर्द होता है.. तू तो पागल हो गया योगू..

मेरे लंड के झटके के साथ आंटी अपने मुँह से मादक सिसकारियां निकालते हुए मुझे साथ देने लगीं. उनके मुँह से ‘आऔह कितना मज़ा दिया तुमने.. मेरी लाइफ में मैंने ऐसा सेक्स अब तक कभी नहीं किया.. बेबी.. चोद दे.. आह रगड़ दे.’
ये सब कहते, बड़ाबड़ाते कामवासना से मस्त कामुक आंटी मदमस्त सिसकारियां लेते मज़ा ले रही थीं.

मैं भी अब ‘फॅक फचाआहह..’ की आवाज़ करते हुए चोदने लगा. कुछ ही देर में वासना फिर से सर चढ़ कर बोलने लगी थी. अब मैं फुलस्पीड में आंटी को चोद रहा था. अचानक उनकी चुत के मांसल होंठों ने उनका साथ छोड़ दिया और उनकी गर्म चुत की दीवारों ने मेरे लंड पर दबाव बनाना शुरू कर दिया. आंटी की चूत ने अपनी गर्म दीवारों से मेरे लंड को कसना चालू कर दिया था.

इस बार वो इतना ज़ोर से लंड को कस रही थीं कि उनकी कसी हुई चुत की गर्मी से उनके साथ ही लंड को भी पानी छोड़ने पर मजबूर कर दिया. मैं और उन्होंने एक साथ पानी छोड़ा.
क्या बताऊं.. कितना मज़ा आता है जब दोनों के अंग एक साथ कामरस छोड़ते हैं.

हम दोनों ही इस लम्बी चुदाई से बहुत थक चुके थे. हम थक कर वैसे ही नंगे चिपक कर लेटे रहे.

दोनों को कब नींद लग गई.. पता ही नहीं लगा.

दोस्तो, यह थी मेरी लम्बी चुदाई की कहानी. आप सबको मेरी सेक्स स्टोरी कैसी लगी. मुझे मेल करके बताना जरूर मेरा ईमेल आईडी है.