पड़ोसन आंटी का अंगप्रदर्शन और धमाकेदार चुदाई

यह कहानी काल्पनिक है, इसमें दर्शाये गए चरित्र व घटनाएँ वास्तविक नहीं हैं.

मैं योगू.. उम्र 23 साल, महाराष्ट्र से हूँ. अपनी नयी सेक्स की स्टोरी लेकर हाजिर हूँ, सो लेडीज, आंटी, और भाभी अपनी अपनी चुत में उंगली डालने को तैयार रहो.

यह स्टोरी मेरी और मेरी पड़ोसन दीपा आंटी की है. उनका क्या मस्त गदराया बदन है यार.. उफ़ देखते ही लंड खड़ा हो जाता है. दीपा आंटी की उम्र 40 साल है. उनके 38 इंच के बूब्स बहुत मस्त हैं.. कमर 34 की और गांड का तो जवाब ही नहीं है, पूरे 40 इंच की है. मुझे भी ऐसे मस्त गदरायी हरी भरी लड़कियां और औरतें ज्यादा पसंद हैं.

मैं हमेशा ही दीपा आंटी को सेक्सी नज़रों से देखता रहता था. एक दिन वो कपड़ा धो रही थीं, मैं उनके पास जाकर बैठ और उनके हिलते हुए बड़े बड़े मम्मों को देखते हुए उनसे बातें करने लगा.
वो- क्या रे.. आज बहुत बातें कर रहा है?
मैं- कुछ नहीं, आप जैसी जानदार और शानदार आंटी से तो बातें करना मेरा सौभाग्य है.

वो हंसते हुए अपने पल्लू को गिराते हुए और भी ज्यादा कामुकता दिखाने लगीं और बोली- वैसे सिर्फ़ बातें ही करता है या अब तक कोई शानदार काम भी किया है?
इतना कह कर आंटी मेरे खड़े होते लंड की ओर देख कर हंसने लगीं.

मैं- आप एक मौका तो दो.. तो बता देता हूँ कि आपका काम कितना अच्छा और शानदार तरीके से करता हूँ.

उनकी साड़ी ऊपर हो जाने के कारण उनकी चिकनी मस्त गदरायी जाँघों को देखते हुए बोला- वैसे आप तो बड़ी जानदार बनी हुई हो, अन्दर से भी और बाहर से भी बड़ी हॉट दिखती हो.

मैं उन्हें ठीक से देखने का बहाना बना कर उनकी चुत देखने का मौका देख रहा था. मगर अन्दर का कुछ नहीं दिख रहा था. तो आंटी हल्के से अपने घुटनों को और खोलते ऐसे बैठ गईं, जिससे मुझे उनकी मस्त क्रीम कलर की पेंटी दिखाई दे जाए.

अब आंटी मुझे पेंटी की झलक दिखाते हुए और हिल हिल कर कपड़े धोने लगीं.

जैसे ही वे आगे पीछे को होतीं, वैसे ही वो अपनी अदा मादक सी बनाते हुए मुझे रिझाने लगतीं.

मैं भी उनकी गोरी चिकनी गदरायी मोटी मोटी भरी हुई जांघें देख कर मुँह में पानी लाता और अपनी जीभ होंठों पर फिराने लगता.

आअउह उनहह.. मैं तो पागलों की तरह उनको देख रहा था, वो जानती थीं कि मैं उनसे क्या चाहता हूँ. मगर पक्का पता करने के लिए और मुझे भड़काने के लिए आंटी ऐसा कर रही थीं.

अचानक वो कपड़े सुखाने जाने के लिए उठीं. वो मुझसे बोलीं- योगू जरा आगे आकर देख तो.. मुझे लगता है कि मेरी साड़ी में चींटी घुस गई है.. कहीं काट ना ले.. देख तो जरा..
मैंने आगे बढ़ते हुए कहा- कहां है आंटी दिखाना जरा.
उन्होंने अपनी टांग को सीधा करते हुए साड़ी उठा दी और कहा- शायद जाँघों पर है.. ढूँढ कर निकाल तो दे, मेरे हाथ में कपड़े हैं.
मैंने आगे बढ़ते हुए कहा- हां आंटी रूको, मैं देखता हूँ.

मैं उनके सामने घुटने टेक कर बैठा और उनकी मस्त चिकनी टांगों पर हाथ रखते धीरे धीरे सहलाने लगा. मैंने अनजान बनते हुए कहा- आंटी बताना जरा किधर लग रही है?

यह कहते हुए मैंने उनकी साड़ी में अपना सर अन्दर घुसाया. मेरी सांसें बहुत गरम होकर तेज़ी से चल रही थीं और सर अन्दर डालने के वजह से उनकी चुत की महक मुझे और कामोत्तेज़ित कर रही थी.
‘अहहहा.. आहह…’

मैं अपना हाथ आंटी की गदरायी हुई जाँघों पर सहलाते हुए देखने लगा. वो भी मज़ा लेने लगी थीं- आहह.. इधर से और ऊपर देख न..

मैं उनकी चुत को पेंटी के ऊपर नाक लगा कर सूँघने लगा.
तभी बोली- हां शायद यहीं अन्दर घुस गई है..

मैंने उनकी चुत पर हाथ फेर दिया. उन्होंने मुझे झट से बाहर निकाला और देखने लगीं. मैं अपने आपे में नहीं था. मुझे ऐसा लग रहा था कि साली आंटी को अभी पटक कर चोद दूँ. हालांकि इसमें रिस्क था, सो मैं चुपचाप खड़ा रहा.
आंटी गांड मटकाते हुए चली गईं- अभी आती हूँ.

मैं मुँह बनाकर वहीं उनका इंतज़ार कर रहा था. वो अब धुले हुए कपड़े सूखने डाल कर आईं और दूसरे कपड़े उठाने लगीं. मैं बोला- क्या हुआ आंटी.. चींटी मिली क्या.. कहीं काटा तो नहीं ना?

वो हंसते हुए मेरे लम्बे खड़े हुए लंड को पेंट में तंबू बनाते देखते हुए बोलीं- नहीं मिली.. लगता है वो भाग गई.

वे फिर से कपड़े धोने लगीं. मैं अब लंड को दबाते हुए उनकी ओर थोड़ा कम देखते हुए दूसरी तरफ देख रहा था. मगर वो बार बार मुझसे बातें करने की कोशिश करते हुए मुझे अपनी ओर देखने को बोल रही थीं.
अचानक उन्होंने कुछ मेरी तरफ़ फेंकते हुए ऐसा जताया कि कपड़े धोते वक्त आ गया हो.

मैंने जब ध्यान से देखा.. तो वो उनकी पेंटी थी, जो अभी थोड़ी देर पहले उन्होंने पहनी हुई थी. मतलब साफ़ था कि आंटी मेरा ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयास कर रही थीं. मैंने देखा कि वो भी अंजान बनकर जानबूझ कर अपने पैर फैलाए बैठी थीं.

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