मेरी पड़ोसन ज्योति आंटी की चुदाई

दोस्तो, मेरा नाम सुमित है। मैं दिल्ली में रहता हूँ. मेरी आयु 23 साल है। मेरे घर में चार सदस्य हैं- मेरी मां और पापा, एक बहन और मैं. मेरी बहन शालू अभी स्कूल में पढ़ाई कर रही थी जबकि मेरी पढ़ाई खत्म हो चुकी थी और मैं घर पर ही टाइम पास करता रहता था.
एक बार मेरे पड़ोस में एक आंटी रहने आई। कुछ दिन के बाद उनसे जान-पहचान हुई तो पता चला कि उनका नाम ज्योति था.
थोड़े ही दिनों में उनका हमारे घर पर आना-जाना भी होने लगा. हम दोनों अच्छी तरह घुल-मिल गए।

ज्योति आंटी बहुत ही चिकनी थी, उसकी चूची बहुत ही मोटी थी, हम दोनों बहुत फ्रैंक थे पर हमारे बीच कोई ग़लत बात नहीं थी। आंटी बहुत शरीफ़ थी। वो शक्ल से भी शरीफ दिखती थी और उसका पहनावा भी ऐसा था कि कहीं से उसके बदन का कोई हिस्सा बाहर दिखाई ही नहीं देता था. वो अपने चिकने बदन को अपने कपड़ों के अंदर ऐसे छिपा कर रखती थी जैसे कोई सुनार तिजोरी में सोना छिपाकर रखता है.

ज्योति आंटी का पति अक्सर टूअर पर जाता रहता था। मैंने बहुत कोशिश की आंटी को पटाने की लेकिन आंटी की लाइन कहीं से भी ओपन नहीं लग रही थी.

फिर एक दिन मैंने उंगली टेढ़ी करने की सोची क्योंकि सीधी उंगली से तो घी निकलना मुझे संभव नहीं लग रहा था.

वो वाकया उस दिन का है जब एक दिन आंटी अपने घर में कपड़े धो रही थी। मैं किसी काम से आंटी के घर गया हुआ था, मैंने देखा कि बैठने के कारण आंटी की आधी चूची बाहर निकली हुई थी। बहनचोद … उसकी चूची जब मैंने इस हालत में देखी तो मेरा लौड़ा तो जैसे तनतना गया. उसकी चूची बहुत चिकनी थी।

आंटी कपड़ों पर जोर-जोर से सोटा मार रही थी, सोटा मारते मारते आंटी की चूची भी हिल रही थी। उधर आंटी का सोटा कपड़ों को ठोक रहा था और इधर मेरा सोटा मेरी पैंट में तन कर मेरे अंडरवियर को ठोकने लगा था. मैंने सोचा कि आंटी की चूची इतना चिकनी हैं तो पूरी की पूरी नंगी आंटी कितनी चिकनी होगी!

मगर जल्दी ही मेरे अरमानों पर आंटी ने तब पानी फेर दिया जब उन्होंने मुझे उनकी चूचियों को घूरते हुए देख लिया. जैसे ही आंटी को इस बात की भनक लगी कि मैं उनकी चूचियों को ताड़ रहा हूं तो आंटी ने मुझे देख कर अपनी चूची छुपा ली … बहनचोद बहुत शरीफ़ थी वो.

फिर आंटी बोली- सुमित, ज़रा काम में मेरा हाथ बंटा दो।
मैं बोला- क्यों नहीं! अभी आता हूं आंटी.

मैं उठकर आंटी के पास चला गया. आंटी ने सारे कपड़ों का मैल निकाल दिया था. मगर मेरे लंड का माल निकलने के लिए तो आंटी कोई जुगाड़ कर ही नहीं रही थी.
मैं आंटी के पास जाकर खड़ा हो गया तो आंटी बोली- ये कपड़े मशीन में डाल दो।

मैं आगे बढ़ा तो आंटी मशीन के पास खड़ी थी. कपड़े डालने से पहले मेरे दिमाग को एक शरारत सूझी. मैं जानता था आंटी इतनी जल्दी से तो नंगी हो नहीं सकती है इसलिए पहले आंटी को गर्म करना जरूरी था. आज वही मौका मेरे हाथ में था. मैंने मन ही मन सोचा कि सुमित, आंटी की गांड पर हाथ तो लगा दे … एक बार शुरूआत तो करके देख, उसके बाद फिर देखा जायेगा जो होगा.

यह सोच कर मैं जानबूझ कर फिसल कर आंटी पर जा गिरा। आंटी पूरी की पूरी मेरे साथ लग गई, आंटी की गांड पर मेरा लण्ड लग गया। वाह … बहुत ही मजेदार पल था। मेरा लंड आंटी की गांड पर सटा हुआ था.
मगर वो कामुक पल ज्यादा देर तक ठहरा नहीं क्योंकि आंटी ने मुझे पीछे कर दिया, आंटी बोली- लल्लू, जरा संभल कर खड़ा हो!

फिर मैं मशीन में कपड़े डालने लगा तो आंटी मेरे पीछे आकर खड़ी हो गई।
मेरा लंड तो आंटी की गांड छूते ही तन कर उछल-कूद करने लगा था. अब बारी थी आंटी की चूचियों को छूने की. वो हाथ से छूना तो संभव नहीं था लेकिन बहाने से आंटी के बदन से लग कर तो कम से कम आंटी की चूचियों को छूना संभव लग रहा था मुझे.

मैं जानबूझ कर झटका खाकर पीछे हुआ और आंटी ने मुझे बचाने के लिए कस कर पकड़ लिया। इस स्थिति में आंटी की पूरी चूची, पेट और चूत मुझसे चिपक गई।
हाय … मेरी तो लॉटरी लग गई थी. आंटी के बदन से सट कर मजा आ गया कसम से. अब तो भूखे शेर के मुँह खून लग गया था।

बस उस दिन मैंने आंटी की चुदाई का मन बना लिया था। मैंने ठान लिया था कि चाहे मुझे आंटी की चुदाई के लिए कुछ भी करना पड़े मैं इसकी चूत को चोद कर ही रहूंगा.
मगर एक समस्या थी कि उसकी ये जो शर्म और शराफत थी वो मेरे लंड के आगे आ रहा थी. समझ नहीं आ रहा था कि उसको चुदाई के लिए उकसाया कैसे जाये. बस एक उम्मीद की किरण यही नजर आ रही थी कि आंटी का पति काफी दिनों से बाहर गया हुआ था. मैं सोच रहा था कि आंटी भी तो लंड लेने के बारे में सोचती होगी. अगर उसकी चूत में ज़रा सी भी खुजली होती होगी वो चुदने के लिए तैयार हो जायेगी. मगर उसके लिए मुझे एक अच्छे प्लान की जरूरत थी.

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