पति के बिना नौकर के साथ मस्ती

दिनेश : रानी तुझे चोदने के लिए मेरा लंड रोजाना तड़पता रहता है, मुझे हर औरत में तू नज़र आती रहती है, बहुत दिन हो गये चूत का स्वाद लिए, फिर उधर से मुझे हल्की आवाज़ उसकी बीवी की बातें सुनाई दी।

बीवी : तो चोद ले उन्हीं औरतो को। फिर तो मेरे राजा का लंड ठंडा हो जाएगा ना, वैसे कोई खास औरत तो नहीं गर्मा रही तुझे।

दिनेश : रानी ये नई मालकिन एकदम भरपूर माल है, उसकी तेरे से भी ज़्यादा भरी जवानी है।

बीवी : अरे वो होगी जवानी से भरपूर, लेकिन मेरे राजा तेरा लंड अगर देख लिया तो वो खुद ही चुदवा बैठेगी, संभलकर रहना।

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अब ये सुनकर में शर्मा गई और अपने रूम में आ गई। फिर मैंने सोचा कि देवर तो अपना एग्जॉम देकर अपने दोस्त के घर पर होता हुआ शाम के 4 बजे तक आएगा, तो क्यों ना इस मौके का फायदा उठाया जाए? फिर मैंने तुरंत अपना एक सेक्सी ब्लाउज लिया, जो पिंक कलर की बैक में डोरी वाली थी। फिर मैंने काली ब्रा पहनी और मेरे आधे बूब्स ब्लाउज में से ऊपर उठकर बाहर आ रहे थे। फिर मैंने पिंक कलर की साड़ी पहनी एकदम नीचे, पीछे से कूल्हों पर और आगे से चूत के 3 उंगली ऊपर और नीचे गई और स्टोर रूम के पास जा कर दिनेश को आवाज़ लगाई। तो दिनेश स्टोर रूम से ही घबराता हुआ बाहर आया, उसने पजामा पहना था जिसमें से उसका लंड इतना सेक्सी लग रहा था कि अब मेरा मन किया कि उसका पजामा नीचे करके उसके लंड को चूम लूँ, अब दिनेश मुझे देखता ही रह गया था।

फिर मैंने कहा कि क्यों दिनेश? क्या देख रहे हो? अपनी बीवी की याद आ गई क्या? तो दिनेश मुस्कुराया और अपने लंड को पेंट के ऊपर से छूते हुए बोला नहीं मालकिन बीवी अपना यौवन आँचल में थोड़े ना छुपाती है। फिर में अपना पल्लू किनारे करते हुए उसकी तरफ बढ़ी और कहा कि अब बताओ अब तुम्हारी बीवी की याद आ रही है। तो दिनेश बोला कि मालकिन अब तो एक जवान बीवी सामने है, वो भी इतनी सुंदर और गदराई हुई। अब तो में अपनी शादी भी भूल गया। अब ये बोलकर दिनेश मेरे बूब्स देखने लगा जो कि अब ब्लाउज से बाहर निकल आने को हो रहे थे। फिर में दिनेश के पास गई और कहा कि लेकिन इस बीवी को बड़े तगड़े लंड का पति ही चाहिए। ये कह कर मैंने उसके पजामे के अंदर अपना हाथ डालकर उसका लंड पकड़ लिया, तो में उसके लंड का अहसास पा कर एकदम से सिहर गई, उसका लंड कम से कम 8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा था।

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अब मैंने उसके लंड को दबाते ही दिनेश की आँखे बंद हो गई थी, अब मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने उसका पजामा उतार दिया, तो में उसका काले लंड पर वीर्य से गीला सुपाड़ा देखते ही रह गई। फिर मैंने तुरंत उसके मुँह में अपना मुँह डाल लिया और चूसने लगी। तो दिनेश मेरे बालों को पकड़कर मेरा सिर आगे पीछे करने लगा, अब इतना प्यारा लंड मुझे काफ़ी दिनों बाद मिला था। फिर दिनेश ने मेरी पीठ से मेरे ब्लाउज की डोरी खोल दी और मुझे ऊपर उठाकर बेतहासा चूमने लगा और मेरे बूब्स मसलने लगा। अब वो इतनी ज़ोर-ज़ोर से मेरे बूब्स दबा रहा था कि मेरी आहें निकली जा रही थी, लेकिन मुझे मज़ा इतना आ रहा था कि मैंने उससे कुछ नहीं कहा, बस उसके होंठो से होंठ मिलाए उसके होंठ चूसती रही और उसकी जीभ से खेलती रही। अब में उसमें इतनी डूब गई थी कि मुझे पता ही नहीं चला कि कब दिनेश ने मुझे कमर से पकड़कर उठा लिया और डाइनिंग टेबल पर बैठा दिया। फिर उसने मेरे बूब्स को पूरा नंगा कर दिया और एक-एक करके मेरे बूब्स को अपने मुँह में लेकर ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। फिर वो मेरी साड़ी को जांघो तक ऊपर उठाकर मेरी चूत को पेंटी के ऊपर से ही रगड़ने लगा।

अब में उसे अपने बूब्स पर दबाने लगी थी, अब दिनेश मेरे निपल्स को काटने लगा था। अब मेरी दर्द से आवाज़े निकलने लगी थी। फिर दिनेश ने मेरी पारदर्शी पेंटी खींचकर निकाल दी और मेरी चूत पर अपनी उंगलियाँ फैरने लगा। अब मैंने पूरी मस्त हो कर अपने दोनों हाथों से उसके लंड को पकड़ लिया और अपनी चूत की तरफ खींचने लगी, लेकिन उसने मुझे पीछे धक्का देते हुए टेबल पर लेटा दिया, इधर में इतनी बैचेन हो गई थी कि मैंने उससे कहा कि अब चोदना राजा, अब तड़पा मत, तेरा लंड मेरी चूत में डाल दे। तो फिर दिनेश मुस्कुराया और अपने कपड़े आराम से उतारते हुए मुझे देखता रहा, अब उसे मुझे तड़पाड़ने में मज़ा आ रहा था। फिर वो नंगा हो गया और फिर उसने मेरी दोनों टाँगे अपने दोनों हाथों से फैलाई। अब में उसका लंड अंदर लेने के लिए बिल्कुल तैयार थी और में बार-बार उसके लंड को खींच रही थी। फिर उसने अपने लंड से मेरा हाथ हटाया और एकदम से मेरी चूत से अपनी जीभ चिपका दी और अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर डालकर मेरी चूत को चाटने लगा।

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