पेट और चूत की आग ने रंडी बना दिया

कोई भी लड़की रण्डी नहीं बनना चाहती. हालात ऐसे होते हैं, जिससे लड़की को रंडी बनना पड़ता है. कुछ परेशानियां होती हैं, कुछ मजबूरियां होती हैं, जिनसे उसे इस नर्क में जाना पड़ता है.

नमस्ते मेरे सभी चाहने वाले सभी दोस्तो, आप कैसे हो … मुझे उम्मीद है कि किसी न किसी की जुगाड़ में लगे होगे.

दोस्तो, मैं आज जो सेक्स कहानी आपके लिए लाई हूँ … वो मेरी अपनी सच्ची सेक्स की कहानी है.

अपने जीवन में कोई भी लड़की रांड नहीं बनना चाहती है. ये कुछ हालात ऐसे होते हैं, जिस वजह से लड़की को रंडी बनना पड़ता है. हर लड़की की कुछ ना कुछ परेशानियां होती हैं, कुछ मजबूरियां होती हैं, जिनके चलते वो इस नर्क में चली जाती है.

पहले मैं आपको अपने बारे में बता देती हूँ. मैं अंजलि हूँ, मेरी उम्र 34 साल है. मेरा फिगर 36-34-38 का है.

मेरे पति का देहावसान हो गया था. उनके जाने के बाद मेरे घर की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई थी. क्योंकि हमारे रिश्तेदारों ने हमसे नाता तोड़ा हुआ था. इसका कारण ये था कि मेरे पति की कमाई बहुत कम थी, जिस वजह से हम लोग कहीं भी ज्यादा आते जाते नहीं थे.

हम लोग लोअर मिडल क्लास फैमिली से थे. इसलिए रिश्तेदारों से नाता ही नहीं रह गया था. आज की दुनिया में सभी लोग पैसे वाले से नाता निभाना अधिक पसंद करते हैं, गरीब की तरफ कोई नहीं देखता है.

जब मेरे पति की मृत्यु हुई, उसके बाद मैं एक फैक्ट्री में काम करने लग गई. मुझे इधर कपड़े की पैकिंग का काम मिला हुआ था. लेकिन उसमें मुझे कुछ ख़ास वेतन नहीं मिलता था. बस किसी तरह एक सहारा मिला हुआ था, जिसे छोड़ना मेरे लिए आत्महत्या करने के समान था.

जैसे तैसे जिंदगी गुजरने लगी. फिर मैंने सोचा कि क्यों ना मैं कुछ और काम भी करूं, जिससे मेरी आमदनी बढ़ जाए.

मुझे खाना बनाना बहुत अच्छे से आता है और मैं एक से बढ़कर एक डिश बनाने में निपुण थी. मैंने सोचा कि जो यहां पीजी या कमरा किराए पर लेकर काम करने वाले रहते हैं, उनके वहां जाकर कुकिंग आदि काम करने लगूँ. यह सोच कर मैं मेरे घर से कुछ ही दूरी पर एक कॉलोनी थी, वहां गवर्नमेंट ऑफिसर्स रहते थे, जो बाहर से आकर इधर रहते थे. मैं उस कॉलोनी में गई. चूंकि वो एक सरकारी कॉलोनी थी, वहां सिक्योरिटी गार्ड थे. उसके गेट पर एक सिक्योरिटी गार्ड था.

मैं जब वहां गई, तो वो मुझे देख कर बोला- क्या काम है?
मैं बोली- जी … मुझे यहां सबके घर जाकर मार्केटिंग करनी है, किसी को टिफिन चाहिए या कुकिंग करने वाली महिला की जरूरत हो, तो यही सब बात करने के लिए मैं अन्दर जाना चाहती हूँ.
वो सिक्योरिटी गार्ड बोला- देखो ऐेसे इधर जाना मना है, यह गवर्नमेंट कॉलोनी है.
मैं बोली- हां मैं जानती हूँ … लेकिन मैं कहां कोई चोरी करने जा रही हूँ?

इस पर वो सिक्योरिटी गार्ड बोला- एक काम करो … तुम अपना नंबर दे जाओ. मैं सब साहब लोगों से बात करूंगा, कोई कुछ बोला, तो तुझे बोल दूँगा.
उसकी बात सुनकर मैंने अपना नंबर उसे दे दिया.

मुझे तीन दिन बाद फ़ोन आया कि एक साहब हैं … उन्हें खाना बनाने वाली चाहिये, तू आकर उनसे मिल ले.
मैं ये सुनकर बड़ी खुश हुई और उधर चली गई.

उस कॉलोनी का वही सिक्योरिटी गार्ड मुझे मिला और बोला- बिल्डिंग नंबर 10 में नवीन सर है. उनके फ्लैट में चली जाओ और उनसे मिल लो.

मैं ख़ुशी ख़ुशी उन साहब की बिल्डिंग में चली गई. नवीन जी के कमरे पर जाकर मैंने घंटी बजायी. नवीन जी ने दरवाजा खोला. उनकी उम्र लगभग 36 साल की रही होगी.

उन्हें देख कर मैं बोली- जी मैं अंजलि … कुकिंग के लिए!
वो मुझे तीखी नजरों से देखते हुए बोले- हां हां … आओ अन्दर आ जाओ.
मैं अन्दर चली गई.

फिर वो मेरे मम्मों को देखते हुए बोले- क्या क्या बना लेती हो?
मैं लजाते हुए बोली- साहब, मैं हर डिश बना लेती हूँ.

नवीन जी दिल्ली के थे. वो मुझसे आराम से पुश्त से टिकते हुए बोले- मुझे नॉनवेज ज्यादा पसंद आता है.
मैं बोली- जी साहब मैं सब बना लेती हूँ.
वो मुझे देखते हुए बोले- तुमको दिन में 2 बार आना होगा, सुबह ब्रेकफास्ट और शाम में डिनर बनाने.

मैं बोली- ठीक है साहब जी … कितने बजे आना है?
नवीन जी बोले- मेरा मॉर्निंग में 7 बजे जाना रहता है और मैं रात में 9 बजे कमरे पर आता हूँ.
मैं बोली- ठीक है … रात में कोई बाधा नहीं है … लेकिन इतनी सुबह ब्रेकफास्ट बनाने आने में मुझे देर हो जाएगी.
इस पर नवीन जी आंख दबाते हुए बोले- जब तुम रात में डिनर बनाने आओगी, तब यहीं रुक जाया करना … और सुबह ब्रेकफास्ट बना कर चली जाना.

मैंने उनकी दबती आंख से काफी कुछ समझ लिया था. चूंकि इतने दिनों से जमाने की मार खा चुकी थी तो मैंने भी नवीन जी से जुड़ने का मन बना लिया था. वो मुझे न जाने क्यों बड़ा भा गए थे.

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