पुलिस चौकी में मेरा एनकाउंटर

police choki mai chudai दोस्तो, मैं आपकी प्यारी प्यारी दोस्त प्रीति शर्मा।
आज मैं आपको अपनी एक दुख भरी कहानी सुनाने जा रही हूँ जो 3 दिन पहले मेरे साथ हुआ। भगवान करे ऐसा किसी के साथ ना हो।
तो लीजिये पढ़िये मेरी दुख भरी व्यथा।

पिछले हफ्ते मेरे पति ने बताया कि वो एक हफ्ते के लिए बिज़नस टूर पर सिंगापोर जा रहे हैं। वैसे जाने का मन तो मेरा भी था, क्योंकि मुझे बीच पर चड्डी ब्रा पहन कर घूमना और सारा सारा दिन अधनंगी हालत में खुले बीच पर लेटे रहना बहुत पसंद है। जब आते जाते लोग मेरे गोरे बदन और भरपूर जवानी को ललचाई निगाहों से ताकते हैं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है, बड़ा गर्व होता है खुद पर। मैं भी गहरे काले रंग का चश्मा लगती हूँ ताकि लोग ये न जान सकें मेरे बदन को घूरते हुये मैं उन्हे देख रही हूँ।
मैं पहले भी 2 बार सिंगापोर, बैंगकोक, मलेशिया जा चुकी हूँ। दुबई भी गई थी, उसकी कहानी तो आप लोग पढ़ ही चुके हैं कि वहाँ क्या हुआ था मेरे साथ।

खैर पति तो चले गए, घर में मैं और मेरी छोटी सी बेटी ही अकेले रह गए। मैंने अपनी काम वाली बाई को कह दिया कि वो सारा दिन रुक जाया करे, ताकि घर में कोई तो और हो।
पहले दिन ही मैं घर में बोर हो गई। टीवी भी कितना देखूँ, मोबाइल पे पॉर्न भी कितना देखूँ, अन्तर्वासना पर कितनी कहानियाँ पढ़ूँ।

फिर सोचा, कहीं घूम आती हूँ। तो खुद भी तैयार हुई, बेबी को भी तैयार की और अपनी बाई कमला को साथ लेकर बाज़ार चली गई, बेवजह इधर उधर घूमती रही, चाट पपड़ी, गोल गप्पे, ये वो खा कर, फालतू का सामान खरीद कर घर वापिस आ गई, मगर बोरियत ने पीछा नहीं छोड़ा।

बड़ी मुश्किल से रात हुई, रात को सो गई।

अगले दिन फिर वही सब कुछ। कमला के साथ भी कितनी बातें करती। आस पड़ोस में भी सब नौकरी पेशा लोग, जो सुबह जाते और शाम को आते। अगले दिन फिर बाज़ार चली गई, मूवी देखने इस लिए नहीं गई, क्योंकि सिनेमा के अंधेरे में बेबी बहुत तंग करती है, तो फिल्म का मज़ा सारा किरकिरा हो जाता है।

वैसे ही मैं बाज़ार में घूम रही थी, तो दो नौजवान से लड़के मेरे आस पास दो तीन बार चक्कर लगा कर गए। उनके रवैये और चाल ढाल से लग रहा था, जैसे वो मेरे में इंटेरेस्टेड हों। मुझे भी कुछ गुदगुदी सी हुई कि मेरे हुस्न के दीवाने आज भी हैं, चाहे मैं एक बच्चे की माँ भी बन चुकी हूँ। मैंने भी उन्हें पूरी लाइन दी कि अगर कोई सेटिंग हुई, तो कमला को घर भेज दूँगी, और इन दोनों को अपने घर ही ले जाऊँगी, शायद सेक्स मुझे मेरी बोरियत से निजात दिला सके।
मगर वो भी दो चार चक्कर मार कर चले गए।

मैं फिर से वापिस घर आ गई; आ कर टीवी लगा लिया, कमला ने चाय बना दी, बेमन से चाय पी ली। शाम का खाना भी कमला ने बना दिया, मगर आज मैंने उसे रोक लिया के रात को भी मेरे पास ही रुक जाए।
मैं बेवजह टीवी झाँकती रही, थोड़ी देर में बेबी उठ बैठी और रोने लगी, देखा तो उसका डाइपर गीला हो गया था, सुबह का लगाया था। घर में देखा तो और कोई डाइपर भी नहीं था। मैंने कमला को कहा कि तुम बेबी को संभालो और मैं ज़रा बाहर दुकान से डाइपर ले कर आती हूँ।

मैं अपनी सोसाइटी से निकली और गाड़ी लेकर पास के ही एक मॉल में चली गई। वहाँ से मैं बेबी के डाइपर और कुछ और समान भी खरीद लिया। मैं जब शॉप से बाहर निकलने लगी तो उनका साएरन बज उठा, गार्ड ने रोका तो मैंने उसे अपना समान चेक करवाया। मगर मेरे समान में कुछ भी ऐसा नहीं मिला। जब दोबारा चेक किया तो फिर से साएरन बज उठा, इस बार दुकान का मैनेजर और कुछ और लोग भी आ गए। मेरे पर्स की तलाशी ली गई तो उसमे से एक मोबाइल फोन मिला, जो मगर मुझे नहीं पता कि वो मोबाइल मेरे बैग में कैसे आया।

मैंने बहुत इंकार किया, मगर उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी, मैंने तो पैसे देने की भी ऑफर की कि चलो अगर मेरे बैग में ये फोन आ ही गया तो मैं पैसे दे देती हूँ, मगर उनका मैनेजर बहुत ही खडूस था, साले ने पुलिस को बुला लिया।

झगड़ा बढ़ गया और पुलिस वाली ठुल्ली मुझे अपने साथ ले गई। बाहर जा कर उसने मुझे पुलिस वैन में बैठाया और मुझे लेकर वो पुलिस चौकी आ गए।
चौकी पहुँच कर मुझे ध्यान आया कि यार मैं अपना मोबाइल फोन तो घर ही भूल आई हूँ। और ये फोन बिल्कुल मेरे फोन जैसा था, शायद इसी वजह से बेख्याली में मैंने इस फोन को अपने पर्स में रख लिया होगा।

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