निःशब्द प्रेम से तन के मिलन तक • Kamukta Sex Stories

निःशब्द प्रेम से तन के मिलन तक

लव एंड सेक्स कहानी मेरे किराये के कमरे के पड़ोस में रहने वाली एक भाभी की है. हम दोनों पास में रहते तो एक दूसरे की मदद कर देते. हमारे बीच एक अनकहा सा प्यार हो गया था.

नमस्कार दोस्तो,
मेरा नाम मोनू है मैं एक औसत लड़का हूँ। मेरी उम्र 30 वर्ष हैं।
मैं उत्तराखंड का रहने वाला हूँ तथा वर्तमान में श्रीनगर गढ़वाल में रह रहा हूँ। यहाँ पर रहकर पढ़ाई कर रहा हूँ। यहाँ पर मैं अकेले ही कमरा लेकर रहता हूँ।

मैं पिछले कई सालों से अन्तर्वासना का पाठक हूँ।
काफी समय से मैं भी आपके सामने अपने अनुभवों को कहानी के माध्यम से रखने की सोच रहा था लेकिन संकोच के कारण नहीं रख पा रहा था।

मुझे नई नई लड़कियों, भाभियों, आंटियों से सेक्स करना बहुत अच्छा लगता है लेकिन गढ़वाल में ऐसा ज्यादा संभव नहीं हो पाता.
इसलिए मैं ज्यादा लोगों से सेक्स नहीं कर पाया हूँ.
पर मेरी हमेशा इच्छा रहती है कि मैं रोज सेक्स करूँ और उसका आनंद प्राप्त करूँ।

लेकिन फ़िलहाल तो मैं अन्तर्वासना की कहानियां पढ़कर हाथ से ही मुठ मारकर काम चला रहा हूँ।
आशा है कि जल्द ही मेरे वीरान पड़े लंड को चूत की तृप्ति मिलेगी।

मैं लड़कियों और उनकी इच्छाओं का बहुत सम्मान करता हूँ।
सेक्स के दौरान भी मैं अपने पार्टनर का पूरा ध्यान रखता हूँ।

जिससे जिस लड़की से एक बार सम्बन्ध बना लेता हूँ वह हमेशा संपर्क में बनी रहती है तथा संसर्ग की इच्छा भी जाहिर करती है।

मेरा मानना है कि लड़कियाँ, औरतें हम पर इतना भरोसा करके संसर्ग के लिए तैयार होती हैं तो उनकी गोपनीयता को बनाये रखना हमारा परम कर्तव्य होना चाहिए।

इसलिए मैं अपने सेक्स पार्टनर के बारे में किसी से भी शेयर नहीं करता अपने बेस्ट दोस्त से भी नहीं।

मेरा मानना है कि एक बार सेक्स कर लेने के बाद दुबारा हम उनसे सेक्स की चाह रखते हैं और सेक्स की मांग रखते हैं जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।

सेक्स एक रोमांचक क्रिया है, उसका आनंद जरूर लेना चाहिए।
इसलिए सेक्स खुलकर करना चाहिए।
लेकिन साथ ही अपने सेक्स पार्टनर की गोपनीयता तथा पसंद का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

अब ज्यादा बात न करते हुए सीधे अपनी लव एंड सेक्स कहानी पर आते हैं।

कहानी में गोपनीयता का ध्यान रखते हुए अपने पात्रों के नाम तथा स्थान के नाम बदल दिए गए हैं।

बात उन दिनों की है जब मैं शुरू शुरू में श्रीनगर कॉलेज में पढ़ाई करने के लिए आया था।

बड़ी मुश्किल से ढूंढने के बाद एक कमरा मिला।

मेरे पड़ोस में एक सुन्दर सी भाभी रहा करती थी।
उनके दो छोटे छोटे बच्चे थे।

भाभी गढ़वाली थी और दिखने में बहुत सुन्दर थी।
मुझे भी भाभियाँ बहुत पसंद हैं।

शुरू शुरू में मैं उनके बच्चों के साथ खेल लिया करता था.
धीरे-धीरे उनके बच्चे मेरे कमरे में भी आने लगे.
इस तरह से घुलना मिलना हो गया।

मैं भाभी को बहुत अच्छी मानता था तथा भाभी भी मुझे बहुत अच्छा मानती थी।
समय-समय पर वे मुझे चाय नाश्ता वगैरा पूछ लिया करती थी।
और मैं भी बाजार से उनके लिए उनका सामान ला दिया करता था।

भाभी के पति कहीं बाहर नौकरी करते थे तो भाभी भी कमरा लेकर यहाँ अकेली रहती थी।

इस प्रकार हम दोनों के बीच प्रेमपूर्ण सम्बन्ध बन गए।

कहते हैं न कि रिश्ते में अपनापन होना बहुत जरूरी है, इसी तरह हम भी बहुत अच्छे दोस्त हो गए.
हम अपने सुख दुःख एक दूसरे को शेयर कर दिया करते थे।

मुझे भाभी बहुत पसंद थी पर मैं उनका बहुत सम्मान भी करता था तो कभी इस तरह के कामुक विचार भाभी को लेकर कभी नहीं आए।

एक दिन की बात है कि उनके बच्चे की तबियत ख़राब हुई तो हम उसको डाक्टर के पास ले गए।
डॉक्टर ने उसे कुछ दवाइयां दी तथा कुछ इंजेक्शन लगवाए और हम घर आ गए।

भाभी ने खाना बनाया और कहा- आज यहीं सो जाओ. कहीं रात को बच्चे की तबियत और ख़राब हो गयी तो मैं अकेली क्या क्या करुँगी।

उनके कमरे मैं एक ही डबल बेड था. एक तरफ भाभी के बच्चे सो गए, फिर भाभी सो गयी और फिर सो गया.

लेटकर हम बातें करने लगे.

भाभी ने कहा- मोनू, तुम मेरी इतनी मदद करते हो. आज के जमाने में कौन इस दुनिया में इस तरह के रिश्ते निभाता है।

बात करते करते भाभी भावुक हो गयी तथा अचानक वो मेरे सीने से लग गई.
मैं भाभी को चुप करने के लिए उनकी पीठ पर प्यार से हाथ फेर रहा था।

पता नहीं कब हमारा निस्वार्थ प्रेम वासना में बदल गया और हम एक दूसरे के ओठों को चूमने लगे।

मुझे क्या पता था जिसने आज तक मुठ मार कर काम चलाया हो, उसे आज असीम आनंद की प्राप्ति होगी; प्रेम का आलिंगन होगा; परमानन्द की तृप्ति मिलेगी।

अब हमारी जीभें एक दूसरे के मुख की तलाशी लेते हुए प्रेम आलिंगन कर रही थी।

हमारी पकड़ एक दूसरे पर मजबूत होती जा रही थी मानो कब से दो प्रेमी आज मिलन की रात में एक दूसरे में समा जाना चाहते हों।

इस शांत रात में हमारे चुम्बन की आवाजें मधुर संगीत उत्पन्न कर रही थी।

मेरा हाथ न जाने कब उनके उरोजों पर जा बैठा. कुछ मालूम नहीं लग रहा था … मेरा खुद पर कोई वश नहीं मानो मैं रति का गुलाम हो गया हूँ।

जैसे ही मैंने उनके मुलायम उरोजों को छुआ, वे मुझे और जोर जोर से किस करने लगी, उनके मुख से कामुक आवाजें निकलनें लगी।

मैंने उनकी टी शर्ट के अन्दर हाथ डाल कर उनके बूब्स को मसलना शुरू किया.
भाभी के हाथ भी मेरे शरीर को टटोलने लगे।

मैंने उनकी टीशर्ट निकल दी, नीली ब्रा में वे रति से कम नहीं लग रही थी।
उनके बूब्स को मैं ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा. उनके मुंह से मीठी सीत्कार निकल रही थी।

अब मैंने हाथ पीछे ले जाकर उनकी ब्रा का हुक खोला जिससे उनके सुन्दर, सुडौल उरोज मेरे सामने आ गए।
पहले मैं उन्हें एकटक देखता रहा, फिर मैंने उन्हें एक-एक कर चूमना शुरू किया.

इस क्रिया से भाभी भी उत्तेजित हो रही थी, वे अपने उरोजों पर मेरे सर को जोर जोर से दबा रही थी मानो कह रही हों ‘इन्हें और जोर जोर से चूसो!’

लेकिन उन मुलायम बूब्स को देखकर ऐसा लग रहा था कि इनको अगर छू भी लें तो इन पर निशान पड़ जाएंगे और मैले हो जाएँगे.

अब मैंने उनकी कमर को उनके बगल को चूमना शुरू किया.
उनके बदन की खुशबू एक अलग ही प्रकार का नशा जगा रही थी जिससे मैं खुद को भूलता जा रहा था।

उनके शरीर पर मेरे हाथ चल रहे थे.
कभी मैं उनको किस कर रहा था कभी उनके बूब्स चूस रहा था, कभी उनको दबा रहा था.

अब मेरे हाथ उनकी गहरी नाभि से होते हुए उनकी चूत की घाटी की तरफ बढ़ रहे थे.
उनके प्लाजो रूपी सलवार के ऊपर से ही मैंने उनकी चूत को सहलाना शुरू किया जिससे वो सी … सी की आवाजें निकालनें लगी।

मैंने उनकी सलवार के अन्दर हाथ डाला और उनकी पेंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को रगड़ने लगा।

अब तक की रति क्रियाओं से उनकी चूत ने कामरस छोड़ना शुरू कर दिया था।

मैंने उनकी सलवार और पेंटी को एकसाथ ही उनके शरीर से अलग किया।
अब तक उनकी चूत रस से सराबोर होकर चिकनी हो चुकी थी जो कि अंगुली को स्वतः ही अपनें में समाने के लिए आमंत्रित कर रही थी।

जैसे ही मैंने उनकी चूत में अंगुली डाली, वे उचक सी गयी.
शायद काफी समय के बाद उनकी चूत को किसी ने छुआ होगा और किसी पराए पुरुष ने तो पहली बार ही छुआ होगा।

वे भी मेरे कपड़ों को खींचने लग गयी, उन्होंने अपनें हाथो से मेरे कपड़ों को मुझसे अलग किया।

इसी तरह हमने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए।
मैं उनके शरीर को हर जगह चूमने लगा।

उनके शरीर के हर एक अंग से प्रेम की महक निकल रही थी।

मैंने उनकी नाभि को चूमा और धीरे धीरे उनकी चूत की तरफ बढ़ने लगा।
शायद वे हमेशा अपनी चूत क्लीन शेव रखती थी।

मैं बड़े प्रेम भाव से उनकी चूत को तलीनता के साथ चाटने लगा, उसे जीभ से कुरेदने लगा।

उनकी चूत से अलग कामुक गंध आ रही थी।

मैं उनकी चूत चाटने का आनंद लेने लगा।
मुझे उनकी चूत चाटने में बहुत मजा आ रहा था और वे भी मेरा सर अपनी चूत में दबा रही थी तथा मादक सिसकारियां ले रही थी जो मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी.

मैं और जोर जोर से उनकी चूत चाटने लग गया।
उनके शरीर में एक कम्पन सी महसूस हुई तथा वे थोड़ी शांत हो गयी.
शायद वे झड़ गयी थी।

मैंने उनके कामरस को चाट-चाट कर का स्वाद लिया.

मैं उनके बगल में लेटा ही था कि फिर से उन्होंने मुझे चूमा और फिर किस शुरू हो गयी.

इस बार उन्होंने मेरे पूरे बदन को बहुत ही प्यार से चूमा … मानो वो कहना चाह रही हों कि मुझे भी तुमसे उतना ही प्रेम है जितना तुम्हें मुझसे!

तभी तो शायद किसी नें कहा है कि ‘प्रेम की भाषा शब्द रहित होती है। उसमें शब्दों का कोई स्थान नहीं है।’

चूमते चूमते उन्होंने मेरे लिंग को चूमा तथा फिर अपने मुंह में भर कर चूसने लगी बिल्कुल प्रेम से … उनमें कोई हवस नहीं थी, बस प्यार ही प्यार था।

उनके प्यार को में ज्यादा देर तक सहन नहीं कर पाता इसलिए मैंने उन्हें ऊपर उठाया तथा प्यार से उनके माथे पर चुम्बन किया.
वे जोर से मेरे गले लग गयी।

उनकी आँखों में आंसुओं के मोती थे.
मैंने उन्हें सहलाया, प्यार किया।
उन्होंने बड़े धीरे से मेरे कान में कहा- आई लव यू मोनू!

मेरी आँखों से भी आंसू निकल सकते थे पर मैंने अपने ऊपर संयम बरता तथा उन्हें किस किया।

उनका हाथ टटोलते हुए मेरे लिंग पर गया और मेरा हाथ उनके चूत को सहलाने में लगा था।

मैं उनके ऊपर था और वे नीचे!
मेरा लिंग उनकी मुनिया को छू रहा था और वे और जोर जोर से मुनिया और लिंग का मिलन करवाने की कोशिश कर रही थी।

अब सब्र करना भी कठिन होता जा रहा था, मैंने अपने लिंग को उनकी मुनिया पर सेट किया तथा दोनों और से हल्के धक्के के साथ ही प्रेम का स्पंदन गान शुरू हो गया।

हम एक दूसरे में समाने की भरपूर कोशिश कर रहे थे।

कुछ समय तक इसी मुद्रा में सेक्स करने के बाद वे मेरे ऊपर आ गयी और कमान अपने हाथों में ले ली.
मेरे हाथों में उनके बूब्स थे जिन्हें मैं कभी चूम रहा था तो कभी दबा रहा था।

फिर हम दोनों आमने सामने बैठ गए और धक्के लगाते रहे।
हर धक्का एक नयी अनुभूति करवा रहा था।

10 मिनट तक इसी स्थिति में सेक्स करने के बाद उनकी गति बढ़ती गयी और उन्होंने मुझे बहुत जोर से जकड़ लिया।

अब मैंने उन्हें लिटाया तथा 2-4 मिनट के बाद में भी स्खलित हो गया।
मैंने अपना सारा लावा उनकी मुनिया में ही छोड़ा.

उन्होंने उस प्रेम रस की एक-एक बूँद को महसूस किया।

अंत में उन्होंने कहा- आज परम आनंद की अनुभूति हुई।

लव एंड सेक्स के बाद हम एक दूसरे से लिपट कर सो गए।

सुबह मेरी आंख खुली तो वे सब उठ चुके थे.
भाभी ने मेरे लिए चाय बनायी और नाश्ता कर में अपने कॉलेज चला गया।

उसके बाद हमें जब भी मौका मिलता हम प्रेम में डूब जाते।

कुछ समय बाद उनके पति आए।
उनसे भी मेरी अच्छी दोस्ती हो गयी।

कुछ समय बाद शायद उनके पति को हम पर शक होने लग गया तो मैंने अपना कमरा बदल दिया।

हमारा प्रेम आज भी वैसा ही है, बस मिलन अब कम हो पाता है क्यूँकि छोटे शहरों में जल्दी ही नज़र में आ जाते हैं।

दोस्तो, यह थी मेरी पहली कहानी.
लव एंड सेक्स कहानी आपको कैसी लगी, कमेंट्स जरूर करें।