सगी बहन के साथ यात्रा वाघा बॉर्डर पर

हेलो… अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार! मैं आज जालंधर जिला पंजाब से हूं, मेरा नाम रमनजीत सिंह (बदला हुआ) है, मैं सिख फैमिली से सम्बन्ध रखता हूं. मेरा घर में जालंधर शहर में है. मेरे पापा इंग्लैंड में रहते हैं, मेरे घर में मेरी मम्मी हाउसवाइफ है, हम तीन भाई बहन हैं, मुझसे बड़ी बहन का नाम प्रीति है, वह मुझ से 2 साल बड़ी है और मुझसे 3 साल छोटी बहन का नाम अमनदीप कौर है.

दोस्तो, आप का टाइम ना वेस्ट करते हुए मैं सीधा कहानी पर आता हूं.
यह कहानी मेरी और मेरी बड़ी बहन प्रीति की है.

मेरी बड़ी बहन प्रीति की शादी हो चुकी है, अब उसके पास एक लड़की भी है जो बहुत सुंदर है. आज के टाइम में मेरी हाइट की बात करें तो मैं 6’2″ की लंबाई वाला हूँ, मेरा लंड काफी बड़ा और मोटा है.

एक बार जब मेरी बड़ी बहन की शादी नहीं हुई थी, यह बात तब की है, मैं, मेरी बड़ी बहन और छोटी बहन अमनदीप कौर ने अमृतसर से आगे वाघा बॉर्डर पर जाने का प्लान बनाया. और सर्दियों के दिन थे. जिस दिन हमने वाघा बॉर्डर पर जाना था, उस दिन मेरी छोटी बहन अमनदीप कौर को बुखार आ गया और उसने अमृतसर जाने से मना कर दिया.

फिर मैं और मेरी बड़ी बहन प्रीति बस से अमृतसर गए. वहां से वाघा बॉर्डर लगभग 31 किलोमीटर दूर था. हम अमृतसर में 11:00 बजे के लगभग पहुंच गए सबसे पहले हमने वहां एक होटल में कमरा बुक किया फिर मैं लगभग 3:30 बजे एक मैजिक कार से हम वाघा बॉर्डर के लिए गए. मैं अपनी बहन के बारे में कुछ भी गलत नहीं सोचता था और ना ही कभी ऐसा ख्याल आया था.

जब हम वहां पर पहुंच गए तो वहां बहुत ही भीड़ थी. जब हम फौजियों की परेड देखने लगे तो मेरी बहन मुझसे आगे खड़ी हुई थी उसने बहुत ही अच्छा पंजाबी सूट डाल रखा था जिससे वह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी और उसकी सफ़ेद रंग की ब्रा साफ साफ दिखाई दे रही थी. जब वह मेरे आगे खड़ी होकर परेड देख रही थी तो मेरा लिंग खड़ा हो गया. इस बात का अहसास प्रीति को भी हो गया पर हम दोनों ने इग्नोर कर दिया.

फिर क्या था, मेरे मन में उसे चोदने का ख्याल आने लगा. ऐसा ही चलता रहा. मैंने उसको पेट पर से पकड़ रखा था वह भी बहुत खुश थी पर शायद वह यह सब नहीं चाहती थी और मैं चाहता था.
जब परेड खत्म हुई लगभग 7:00 बजे तो हम भाई बहन उसी गाड़ी से वापस आने लगे तो उस गाड़ी वाले ने उस गाड़ी में कुछ ज्यादा ही पैसेंजर बैठा लिए, उस गाड़ी में बहुत भीड़ हो गई थी. गाड़ी की कंडक्टर सीट पर मैं और मेरी बहन प्रीति बैठे हुए थे.
ड्राइवर ने कहा- तुम अपनी बहन को अपनी टांगों पर बिठा लो, मैं एक और सवारी को आगे भेज रहा हूं. मैंने ड्राइवर को मना किया परंतु वह नहीं माना तो फिर मेरी बहन प्रीति मेरी टांगों पर बैठ गई.

अब फिर मेरे पजामे में मेरा लिंग दोबारा खड़ा हो गया. मेरी बहन भी इसको अच्छी तरह महसूस कर रही थी. लगभग 8:30 बजे हम होटल पहुंच गए, हमें बहुत भूख लगी हुई थी, सबसे पहले हमने खाना ऑर्डर किया अब मेरी बहन बाथरूम में नहाने के लिए चली गई और गर्म पानी से नहाने लगी. मेरे मन में बहुत ही गंदे ख्याल आ रहे थे.

जब वह नहा कर बाहर निकली तो उसने लाल रंग का सूट और सलवार पहन रखा था. वह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी. मैंने भी टी-शर्ट और पजामा पहना हुआ था.
फिर हम दोनों ने खाना खाया और सोने लगे.

मेरी बहन प्रीति ने मुझसे कहा- मुझे नींद नहीं आ रही है!
और मुझे भी नींद नहीं आ रही थी इसलिए हमने टीवी देखने को निर्णय किया और हमने लगभग आधा घंटा पंजाबी गाने देखे.

होटल वालों ने हमें सोने के लिए जो कंबल दिया था वह काफी हल्का था, उसमें काफी ठंड लग रही थी. अब मेरी बहन मुझसे सोने के लिए कहने लगी और मैंने टीवी को बंद कर दिया और लाइट भी ऑफ कर दी.
परंतु मुझे नींद नहीं आ रही थी और मेरे मन में अपनी बड़ी बहन को चोदने के ख्याल आ रहे थे.

उस कमरे में एक लाल लाइट भी थी जिसको मैंने जला दिया, वह काफी हल्की लाइट थी.

मेरी बहन प्रीति मेरी तरफ अपनी गांड करके सोई हुई थी और मेरा लंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था तो मैंने अपना पजामा थोड़ा नीचे किया और अपना अंडरवियर नीचे करके अपना लिंग हाथ में पकड़ लिया. फिर मैंने अपनी बड़ी बहन प्रीति का कमीज उसके चूतड़ों से ऊपर उठा दिया और उसके चूतड़ों पर उसकी सलवार के ऊपर से अपना लिंग रख दिया और मैं एक हाथ उसके पेट पर रख कर अपने लिंग को आगे पीछे करने लगा जिससे मुझको बहुत ही मजा आ रहा था.

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