सहेली की शादी में मेरी चुत चुद गई-1

मैं पंजाबन हूँ. आप तो जानते ही हैं कि पंजाबनों का मस्त फिगर होता है. मेरी गांड ज़्यादा ही बड़ी है, इससे लोगों के लंड खड़े हो जाते हैं. एक बार मैं ट्रेन से अपनी सहेली की शादी में गयी तो …

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम मंजीत कौर है. मैं एक पंजाबन हूँ. आप लोग तो जानते ही हैं कि पंजाबनों का कितना मस्त फिगर होता है. सबसे ज्यादा हम लोगों की गांड मस्त होती है.

मेरी उम्र अभी 28 साल है और मेरा फिगर 34-25-43 का है. मैं सहारनपुर की रहने वाली हूँ. बस एक ही दिक्कत है कि मैं दिखने में गहरी सांवली या कहिए काली हूँ. लेकिन अब मुझे इस बात से कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि अब मुझ पर सब वैसे भी फिदा हो जाते हैं. फिर मेरी गांड भी कुछ ज़्यादा ही बड़ी है, इससे लोगों के लंड खड़े हो जाते है.

जब भी मैं बाहर निकलती हूँ, तो सबकी नज़र मेरी गांड पर ही टिकी रहती है. मुझे सेक्स करने का बहुत शौक है और मैं बहुत सारे लोगों से चुद चुकी हूँ. मैं खुद चुदने के नए नए बहाने ढूंढती रहती हूँ.

मेरे दो बेटे हैं और वो दोनों बाहर पढ़ते हैं. मेरे हज़्बेंड भी अपने काम के चलते ज्यादातर शहर के बाहर रहते हैं. वो कभी घर में रहते भी हैं, तो हमेशा इतने बिज़ी रहते हैं कि कभी मुझे टाइम नहीं देते.

अब शादी के बाद अगर दो बच्चे हो जाएं तो एक औरत की चुदाई की भूख क्या शांत हो जाती है?
नहीं ना?
लेकिन ये बात मेरे पति को कौन समझाए. इसी लिए मुझे दूसरों के लंड का सहारा लेना पड़ता है.

अब तो मुझे दूसरे लौड़ों से चुदने में इतना अधिक मजा आने लगा है कि मुझे अपने पति से किसी तरह की चुदाई की चाहत भी नहीं बची है. मुझे अब बाहर के गैर मर्दों के लौड़ों से ही चुदने में मज़ा मिल जाता है. और मुझे ये अच्छा भी लगने लगा है. बदल बदल कर लंड लेने से चुत की खुजली बड़ी मस्ती से बुझने लगी है.

यह बात तब की है, जब एक साल पहले मेरी सहेली शालिनी की लखनऊ में शादी थी. उसने मुझे शादी में बुलाया था.

चूंकि मेरे बच्चे तो बाहर पढ़ते थे, तो पति के साथ ही जाने का विचार बना. रात को मैंने हज़्बेंड को कॉल करके साथ में चलने को पूछा, तो उन्होंने मना कर दिया.

मैंने जाने की बात की तो उन्होंने बोला कि मैं तुम्हारे लिए ट्रेन का टिकट बुक करवा देता हूँ, तुम अकेली चली जाओ.
मुझे तो पहले से मालूम था कि ऐसा ही होगा तो मैंने बोला- ठीक है.

दो दिन बाद सहेली की शादी थी, तो एक दिन पहले शाम को 6 बजे की ट्रेन में मेरी टिकट बुक हो गई थी.

मैंने एक दिन पहले ही अपनी सब पैकिंग आदि कर ली और अगले दिन का जो भी काम था, वो सब भी निबटा लिया. सब काम पूरे करके मैंने अपने जाने की तैयारी कर ली.
शाम को मेरे हज़्बेंड का कॉल आया कि वो अपने ड्राइवर को भेज रहे हैं, वो मुझे स्टेशन तक छोड़ देगा.
कुछ देर में ड्राइवर आ गया और मैं स्टेशन के लिए निकल गई.

मेरे घर में किसी भी चीज़ के लिए कोई रोक टोक नहीं है, मैं दारू भी पीती हूँ और हर तरह के कपड़े भी पहनती हूँ, इससे मेरे हज़्बेंड कोई कोई दिक्कत नहीं है.

मैंने एक स्लीवलैस टी-शर्ट पहनी हुई थी जो कि एकदम फिटिंग की थी. इस टी-शर्ट में मेरे 34 इंच के तने हुए मम्मे देख कर तो कोई भी बता देता कि मैंने उसके नीचे ब्लैक कलर की ब्रा पहनी थी.
मेरा लोवर भी बड़ा चुस्त फिटिंग का था और शॉर्ट था. ये बस घुटने के कुछ नीचे तक ही आता था. इसमें से मेरी 43 इंच की गांड तो सबका ध्यान आकर्षित करने के लिए काफी थी. इस तरह मैंने सफ़र के लिए आरामदायक कपड़े पहने हुए थे.

जब मैं स्टेशन पर पहुंची, तो ट्रेन खड़ी थी. ड्राइवर ने मेरा सारा सामान मेरी सीट के नीचे रख दिया. मेरी बर्थ नीचे वाली थी. मैं अपनी बर्थ पर जाकर बैठ गयी और ड्राइवर को घर की चाबी देकर उसको जाने को बोल दिया. मेरे सामने वाली सीट पर एक बूढ़ी औरत बैठी थी. कोई दस मिनट बाद ट्रेन चली. मैं मस्ती में गाने सुनने लगी और सफ़र का मज़ा लेने लगी. कुछ देर बाद सामने बैठी वो औरत सो गयी.

मैं भी अधलेटी सी थी, तभी एक आदमी आया और मुझसे मेरी टिकट दिखाने को बोला.
चूंकि वो टीटीई नहीं था इसलिए मैंने पूछा- आपको क्यों दिखाऊं?

आदमी- मैडम मेरी भी यही सीट है लेकिन अभी कन्फर्म नहीं हुई है, तो मैं जानना चाहता हूँ कि क्या आपकी बर्थ कन्फर्म हो गई है.
मैं- जी हाँ.
आदमी- अगर आपको दिक्कत ना हो, तो इस पर मैं बैठ जाऊं, जब तक मेरी कोई सीट कन्फर्म नहीं हो जाती.
मैंने उसे घूरते हुए देखा और कह दिया- ठीक है, बैठ जाओ.

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