सर्दियों के मौसम में पड़ोसन को बनाया गर्लफ्रेंड

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम जगतपाल है। मै होशियार पुर में रहता हूँ। मै 27 साल का जवान मर्द हूँ। मेरे को चुदाई की लत काफी पहले लग चुकी थी। इंसान को जैसे दारू जरूरी हो जाती है, उसी तरह मेरे लिए चूत हो गयी। हर दिन नए चूत के बारे में सोचता रहता था। मै भी यहाँ काम धंधे के चक्कर में आया था। जिस मोहल्ले में रहता था, वहाँ के लोग काफी गरीब थे। वहाँ लडकियां पैसो के लिए अपनी चूत की कुर्बानी दे देती थी। मैं भी वहाँ चूत पाता था। इसलिए वही काफी दिनों से रह रहा था। जब मेरे को लगा की यहां चूत की कमी होने लगी है। तो मैंने वहाँ का रूम छोड़ने की सोचने लगा। उस मोहल्ले की लगभग सारी अच्छी लड़कियों को चोद चुका था। सर्दियों के दिन थे। दोपहर का समय था।

एक नई लड़की आई। मेरे वाले मकान में ही उसने रूम भी लिया। मैं उसके 38 34 36 के बदन का दीवाना हो गया। मेरा लंड उसे देखते ही खड़ा होकर सलाम ठोकने लगा। मैं बहोत ही खुश हो गया। रूम को न छोड़ने का फैसला करके पूरा प्लान कैंसिल कर दिया। उसके करीब जाने की कोशिश करने लगा। इत्तेफ़ाक से मेरे बगल वाला रूम भी उसी दिन खाली हो गया था। मेरा रूम दूसरे मंजिल पर था। वो मेरे बगल में आकर शिफ्ट होना चाहती थी। सीढ़ी की तरफ मैं देख रहा था। तभी वो कुछ सामान हाथ में लेकर ऊपर आ रही थी। मैंने सोचा इससे अच्छा मौका नहीं मिलने वाला। इसकी हेल्प करने के बहाने थोड़ी जान पहचान बढ़ा लेता हूँ। मै सीढ़ी की तरफ चला गया। उसके करीब पहुचते ही।

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मै: लाओ ये सामान मेरे को दे दो। तुम आराम से ऊपर आ जाओ

उसने मेरे को अपना सामान देकर थैंक यू बोला और नीचे से सामान लाने चली गयी। मेरी नजर बार बार उसके मोटे मोटे 38 के दूध पर ही जा रही थी। उसके हॉट सेक्सी बदन को देखकर मेरे से रहा नहीं जा रहा था। सारा सामान सही जगह रखने के बाद हमने एक दूसरे को अपना परिचय दिया। उसका नाम दिया था। वो मेरे काम से कुछ ज्यादा ही इम्प्रेस हो गयी। वो पास के ही किसी माल में काम करती थी। मैं उसके बदन को देखकर मुठ मारता रहता था। जब भी वो नहा कर बॉथरूम से बाहर निकलती थी। उसके गीले बदन पर ब्रा चिपकी हुई दिखने लगती थी। उसकी टाइट ब्रा को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था। एक दिन मैं बैठा हुआ धूप सेंक रहा था। दिया भी मेरे बगल आकर बैठ गयी। उस दिन बात कुछ आगे बढ़ गयी। एक दूसरे की आँखों में आँखे डालकर बात करने पर कुछ ज्यादा ही एक दूसरे के करीब हो गया। जनवरी का महीना था।

उसी महीने मेंरा बर्थडे भी पड़ता था। मैंने दिया को इनवाइट किया। वो मेरे बर्थडे के दिन मेरे को छूकर बर्थडे विश किया। उस रात तो मैं कुछ ज्यादा ही मूड में हो गया। मैंने उसे किस करके थैंक यू बोल दिया। वो मेरे को पहले घूरी लेकिन बाद में नार्मल होकर खाना खाया और अपने रूम में चली गयी। मेरे को लगा गुस्सा हो गयी होगी। मैने उसके रूम में जाकर उससे सॉरी बोलने के लिए घुसा ही था। कि मेरे को उसके एक और नज़ारे का दर्शन हो गया। उसके खूबसूरत संगमर मर जैसे बदन को देखकर मैं जोश में आ गया। मैंने धीरे से दरवाजा बंद कर दिया। थोड़ा सा दरवाजा खोल रखा था। जिससें मै उनमे से उसके खूबसूरत बदन का दर्शन कर सकू। उसी दरवाजे में से सारा नजारा देख रहा था। उसने अपना सारा कपड़ा एक एक करके निकाल दिया।

मेरी दिल की धड़कन उसके एक एक कपडे के निकलते ही बढ़ती जा रही थी। उसने बिस्तर पर बैठकर अपनी चूत में ऊँगली कर रही थी। मै इतना मोटा लंड लेकर हिला रहा था। वो खूबसूरत चूत में उंगली कर रही थी। मै बहोत ही ज्यादा उत्तेजित हो गया। मै दरवाजे के बाहर ही खड़ा होकर लंड हिलाकर मुठ मारने लगा। उसके दरवाजे के पास माल गिराकर चला आया। वो सुबह उठी तो साफ़ किया। दिया की गोरी चूत को देखने के बाद मेरी नजर उसकी चूत पर ही टिकती थी। हम लोगो के साथ रूम लेकर रहने वाले सभी लोग अपने घर गए हुए थे। सिर्फ हम दोनो लोग ही रहते थे। दिया कुछ ज्यादा ही अपने लटके झटके दिखाने लगी थी। वो मेरे सामने फ्रेंक रहती थी।
दिया: जगत तुम यहां अकेले रहते हो तो कभी बोर नहीं होते!
मै भी थोड़ा मजाक करते हुए कहने लगा।
मै: पहले होता था अब नहीं होता
दिया: क्यों अब नहीं होते
मै: जिसकी इतनी खूबसूरत पड़ोसन हो वो बोर कैसे हो सकता है
दिया( हसते हुए): क्या बात है आज कल बड़ी रोमांटिक बाते करने लगे हो
मै: तुम्हे देखकर ऐसे ही बात करने को मन करता है
दिया: क्यों ऐसा क्या है मुझमे जो तू ऐसे बोल रहा है
मै: तुम खुद ही समझ लो

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