टीचर भाभी के साथ पहली चुदाई

इस इंडियन सेक्स कहानी के सभी पात्र और घटनाएँ काल्पनिक हैं, इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं है। यदि किसी जीवित या मृत व्यक्ति या घटना से इसकी समानता होती है, तो उसे मात्र एक संयोग समझा जाये।

आपका परिचय अपनी कहानी के कुछ पात्रों से करवाता हूँ।
मेरे घर में 5 सदस्य हैं। पापा रमेश 42 वर्ष, मम्मी सुनीता 40 वर्ष, सबसे बड़ा भाई अमित 22 वर्ष, उनसे छोटी बहन नेहा 20 वर्ष, और सबसे छोटा मैं हूँ सुनीत 18 वर्ष।
मेरे पापा एफ सी आई विभाग में क्लर्क हैं, मम्मी हाउसवाइफ हैं, अमित भैया, नेहा दीदी कॉलेज में पढ़ते हैं और मैं 12वीं कक्षा में पढ़ता हूँ। हम दिल्ली में एक तीन मंज़िल की बिल्डिंग में रहते हैं। सबसे नीचे वाले फ्लोर पर दो दुकानें हैं, एक ब्यूटी पार्लर की और दूसरी मेडिकल स्टोर की और बाकी जगह में पार्किंग है।

फर्स्ट फ्लोर पर एक परिवार रहता है उसमें 4 सदस्य हैं अंकल (43 वर्ष टीचर) आंटी (38 वर्ष टीचर) और उनकी दो बेटियाँ कनिष्का (21 वर्ष) और साक्षी (18 वर्ष), दोनों कॉलेज में पढ़ती हैं। फर्स्ट फ्लोर की दूसरी साइड अभी खाली है।

दूसरे फ्लोर पर आमने-सामने दो फैमिली रहती हैं, राइट साइड पर जो भैया-भाभी रहते हैं, उनकी शादी को 4 वर्ष हो गए हैं, उनकी एक बेटी है 1 वर्ष की, मनीष भैया 26 वर्ष, बैंक में क्लर्क हैं और किरण भाभी (24 वर्ष) हाउसवाइफ हैं।
लेफ्ट साइड पर भी एक फैमिली भैया-भाभी रहते हैं उनकी शादी को 3 वर्ष हो गए हैं पवन भैया (28 वर्ष) सॉफ्टवेयर कम्पनी में हैं और रीना भाभी (25 वर्ष) हाउसवाइफ हैं।
सबसे ऊपर तीसरे फ्लोर पर हम रहते हैं, एक साइड पर मम्मी-पापा रहते हैं और दूसरी साइड पर हम तीनों के रूम हैं।

अब मैं कहानी पर आता हूँ। पढ़ाई में मैं ठीक-ठाक हूँ, स्पोर्ट्स में अच्छा हूँ। स्कूल में पढ़ाई के अलावा हम काफी कुछ सीखते हैं। तो कहानी की शुरुआत होती है क्लास के चैप्टर ‘मानव जनन कैसे करता है?’ से!
टीचर ने हमें कहा- तुम्हें सब पता है और ये चैप्टर जरूरी नहीं है.
ऐसे कहकर मतलब इसे टाल दिया और कहा- खुद ही पढ़ लेना।

अब मेरी उत्सुकता हुई इसके बारे में और अधिक जानने की!
यकीन मानो दोस्तो … इससे पहले मेरी कोई रूचि नहीं थी इस विषय को लेकर। मेरे दोस्त जो इस बारे में पहले से ही जानते थे, उनसे सुना था और अब तक मैं इन बातों पे ज्यादा ध्यान नहीं देता था लेकिन अब ये सब जानने की मेरी थोड़ी इच्छा हुई।

रीना भाभी मुझे पढ़ाती हैं, कभी-कभी किरण भाभी भी मुझे पढ़ाती थी लेकिन अब वो सिर्फ नेहा दीदी को पढ़ाती हैं क्यूंकि वो बड़ी कक्षा में है।

मेरी सभी से अच्छी बनती है। मेरी नेहा दीदी से बहुत अच्छी बनती है, हम भाई बहन से ज्यादा अच्छे दोस्त हैं। रीना भाभी और मैं बहुत क्लोज़ हैं बेस्ट फ्रैंड्स की तरह। खूब हंसी मजाक और सारी बात एक दूसरे से शेयर करते हैं। रीना भाभी दिखने में बहुत सुन्दर हैं, भाभी घर पर थोड़े खुले सलवार कमीज पहनती हैं। अक्सर भाभी मेरी पीठ पर अपने बूब्स दबा देती हैं, कभी कभी मुझे अपनी बाँहों में कसकर पकड़ लेती हैं, अब तक मेरे दिल या दिमाग में भाभी या किसी और को लेकर कोई अलग बात नहीं थी। मैं खेल कूद में मस्त रहने वाला था उस दिन तक, जब तक वो (जनन वाला) चैप्टर नहीं आया था।

अगले सप्ताह से स्कूल में रिविज़न शुरू हो गया.

इधर घर पर रीना भाभी ने मम्मी को बताया कि पवन कुछ दिनों के लिए गाँव जा रहे हैं और मैं यहीं रहूंगी, मुझे अकेले डर लगता है। अगर सुनीत रात को मेरे पास रुक जाये तो उसकी पढ़ाई हो जाएगी और मुझे कंपनी मिल जाएगी।
मम्मी ने कहा- रीना, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है… लेकिन तुम जानती हो सुनीत बहुत शरारती है।
भाभी बोली- कोई बात नहीं आंटी, वो इतना भी शरारती नहीं है और मैं उसे पढ़ाती भी तो हूँ।

मैं स्कूल से आया और खाना खाकर वीडियो गेम खेलने लगा. तभी मम्मी आयी और बताया कि आज सुबह पवन भैया कुछ दिनों के लिए गाँव गए हैं तो कुछ दिन नीचे रीना भाभी के पास सो जाना।
मैंने कहा- भाभी सिर्फ पढ़ने को बोलती रहेगी।
तो मम्मी बोली- मैंने उसको बोल दिया है कि ज्यादा पढ़ाई करने को न बोले तुझे!
“अब ठीक है!” मैंने सोचा कि बहुत अच्छा मौका है अब तो भाभी से सब कुछ पूछ लूँगा।
तो मैंने हाँ कर दी।

शाम को साढ़े 8 बजे मैं भाभी के पास अपनी किताबें लेकर पहुँच गया.
भाभी बर्तन धो रही थी, मुझे देखते ही बोली- क्या बात है … तू तो बिना कहे ही किताबें लेकर आ गया?
मैंने कहा- हाँ भाभी, मैंने सोचा आप बोलो, इससे अच्छा है खुद ही ले चलूँ।

फिर बर्तन धोकर भाभी आई और मुझसे बोली- चल बता … मैथ पढ़ेगा या सोशल स्टडीज़?
मैंने कहा- भाभी आज टी.वी. देखते हैं, कल पढ़ेंगे!
वो बोली- नहीं, तू किताब कॉपी निकाल, मैं अभी आती हूँ।

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