ट्रेन में मिली मस्त चुदासी लड़की

मेरा नाम सुखविंदर सिंह है, मैं उत्तर भारत पंजाब में लुधियाना जिले के एक गांव से हूँ. मेरी उम्र 29 साल है, मैं फुटबाल का एक अच्छा प्लेयर हूँ. हर रोज खेल कूद करने के कारण तगड़ी बॉडी और मजबूत स्टेमिना है. मेरा रंग गोरा है, कद 5 फीट 10 इंच है और मेरे लंड का साईज नार्मल 6 इंच है.. लेकिन मेरा लंड काफी मोटा है.

यह मेरी पहली और सच्ची चोदन स्टोरी है अगर कोई गलती दिखे तो माफ कर देना.

मेरे घर में मैं और मेरी मां हैं, पिता जी मौत कुछ वर्ष पहले हो गई थी. मैं एक लिमिटेड कंपनी में अच्छी सेलरी पे काम करता हूँ. मां को पिता जी के डिपार्टमेंट से फैमिली पैंशन मिलती है. गांव में जमीन है, जिसका ठेका देने से पैसा आ जाता है. कुल मिला के सब कुछ मस्त है.

वैसे तो कालेज टाइम मैंने बहुत सी लड़कियों को चोदा है. लेकिन अनजान लड़की से यह मेरा पहला मौक़ा था. जैसा कि मैंने पहले ही बताया मैं फ़ुटबाल का प्लेयर हूँ.. जिस वजह से अक्सर ही मैं घर से दूर दूर खेलने और घूमने जाता रहता हूँ.

मैं पिछले साल देहरादून खेलने जा रहा था. लुधियाना से देहरादून के लिए एक ही ट्रेन है, वो भी रात को सवा एक बजे जाती है. मैं 12:30 पर रेलवे स्टेशन पहुंच गया. प्लेटफार्म पे मैं ट्रेन का इंतजार कर रहा तो सामने से मेरे को एक बहुत ही सुन्दर लड़की आती दिखाई दी. मैं तो उसको देखता ही रह गया.. क्या माल थी वो.. उसके चूचे बहुत बड़े थे, जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद हैं.

ट्रेन अपने समय पे आ गई, मैं ट्रेन में चढ़ गया. मेरे पास स्लीपर कलास के 2 टिकट थे. एक मेरा था और एक मेरे दोस्त का था, जो अक्सर मेरे साथ ही खेलता है. लेकिन इस बार किसी काम की वजह से वो नहीं आ पाया. हमने टिकट पहले ही बुक की हुई थी. जिस वजह से मेरे पास 2 टिकट थे.

मैंने अपनी सीट ढूंढी, एक पे अपनी चादर बिछाई और दूसरी सीट जो सामने वाली थी, उस पे अपना सामान रखा और लेट के मोबाइल पे गाने सुनने लगा.

इतने में टी टी आ गया उसने टिकट चैक करी और मेरे से दूसरे टिकट के बारे में पूछा, तो मैंने बता दिया कि वो सीट खाली है.
टी टी सुन कर चला गया, मैं भी लाईट ऑफ़ करके लेट गया.

थोड़े टाइम बाद लाईट जली तो मैं देखता ही रह गया. टी टी के साथ वही स्टेशन वाली लड़की खड़ी थी. टी टी ने मेरे को बोला कि अपना सामान सीट से उठा लीजिए. इस लड़की को यह सीट दे दो.

मेरी तो जैसे मुँह मांगी मुराद पूरी हो गई. टी टी उस लड़की को सीट दिला कर चला गया. उस लड़की ने मुझे थैंक्स बोला और अपना सामान रखा. जब वो लड़की अपना सामान सीट के नीचे रख रही थी, तो उसकी गोल गांड बिल्कुल मेरे चेहरे के सामने थी. उसकी गांड.. हाय रब्बा.. इतनी बड़ी और गोल थी कि मेरा दिल करने लगा कि इस अभी पीछे से पकड़ लूं. पर सिवाए देखने के कुछ नहीं कर सकता था.

उसने अपना सामान सीट के नीचे रखा और लाईट आफ करके अपनी सीट पर लेट गई. मैं भी सो गया.

सुबह 5 बजे के करीब मेरी आंख खुली तो लाईट जल रही थी. मैं मूतने के लिए अपनी सीट पर उठ कर बैठा था, तो मेरी निगाह उस लड़की की कमर पर गई. सोने की वजह से उसकी टी-शर्ट कमर से ऊपर हो गई थी. उसकी नंगी दूध जैसी कमर और पैंटी की इलास्टिक साफ़ दिखाई दे रही थी. जिसे देखकर मेरा तो लंड खड़ा हो गया.

कब वो जाग गई और अपना मुँह घुमा कर मेरे को देखने लगी, मुझे पता ही चला. जब हमारी निगाह मिलीं, तो फिर मैं दूसरी तरफ देखने लगा. उसने अपने कपड़े सही किये और सीधी लेट गई. मेरा भी लंड खड़ा हो गया था, जो उसने भी देख लिया था. मैंने लंड को अपनी लोअर में एडजस्ट किया और बाथरूम में चला गया.

सुबह मूत और उसकी नंगी कमर की वजह से मेरा लौड़ा एकदम टाईट था. मैंने पेशाब किया, लेकिन मेरा लंड तब भी बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था. मैंने उस लड़की की गांड को याद कर के मुठ मारी.. और आकर अपनी सीट पर लेट गया. वो भी अब सीधी लेटी हुई थी. हमारी निगाहें आपस में काफी बार मिलीं. वो बहुत गौर से मेरी ओर देख रही. लेकिन ना अभी तक उसने मुझे कुछ बोला था.. ना ही मैंने.

साढ़े सात बज चुके थे, अब गाड़ी हरिद्वार पहुंच गई थी, तकरीबन सभी यात्री भी उतर चुके थे.

यह ट्रेन हरिद्वार जाकर एकदम खाली सी हो जाती है. हमारे आसपास के सभी यात्री उतर चुके थे. वो लड़की भी फ्रेश होने बाथरूम की ओर चली गयी. मैंने भी मिडल बर्थ वाली सीट को सीधा किया और खिड़की में बैठ कर बाहर का नजारा देखने लगा. इतने में वो भी आ गई और अपनी सीट भी सीधी करने लगी. उससे वो सीट सीधी नहीं हो रही थी तो मैंने बिना कहे ही उसकी सीट सैट करने में मदद कर दी.

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