ट्रिप के दौरान आदर्श अंकल के साथ

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मेरा नाम सुरभि है मैं मुंबई की रहने वाली हूं, मेरे पिताजी मुंबई में ही एक सरकारी विभाग में काम करते हैं। मैं कॉलेज में पढ़ रही हूं, मेरा कॉलेज का यह आखिरी वर्ष है। मेरे पिताजी अपने काम में काफी व्यस्त रहते हैं इसलिए वह हम लोगों को ज्यादा समय नहीं दे पाते परंतु एक दिन उन्होंने कहा कि क्यों ना हम लोग कहीं घूमने का प्लान बना ले, मैंने अपने पिताजी से कहा मेरी कुछ दिनों बाद ही छुट्टियां पड़ जाएंगे तो उसके बाद हम लोग कहीं घूमने चल पड़ते हैं। वह कहने लगे ठीक है मैं कुछ समय बाद घूमने का प्लान बना लेता हूं और उसके बाद हम लोग कहीं घूमने के लिए चल पड़ेंगे। मैंने अपने पिताजी से कहा ठीक है यह तो बहुत अच्छी बात है यदि आप कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, काफी समय हो चुका है जब हम लोग कहीं घूमने नहीं गए। मेरी मां भी बहुत खुश थी और वह कहने लगी कि यह तो आपने बहुत ही अच्छी बात कही क्योंकि हम लोग पिछले दो सालों से कहीं भी साथ में नहीं गए हैं।

मैं घर में इकलौती हूं इसीलिए मेरे माता-पिता ने मुझे कभी भी किसी भी प्रकार की कोई भी कमी नहीं होने दी और मुझे अच्छे कॉलेज में पढ़ा रहे हैं। मैं हमेशा की तरह ही कॉलेज जाती थी और कुछ दिनों बाद हमारे कॉलेज की छुट्टियां पड़ गई। मैंने अपने पापा से कहा कि अब हमारी कॉलेज की छुट्टियां पड़ चुकी हैं यदि आप घूमने के लिए कोई जगह बता दें तो वहीं हम लोग घूमने के लिए चलेंगे। मेरे पिताजी कहने लगे कि हमारे ऑफिस में ही एक मेरे मित्र हैं, हालांकि वह मुझसे छोटे हैं लेकिन उनका और मेरा काफी अच्छा रिलेशन है, उनका नाम आदर्श है। वह भी मुझसे कह रहे थे कि हम लोग कहीं घूमने के लिए चलते हैं, मैंने उन्हें कहा कि क्यों ना हम लोग गोवा चले, गोवा हमारे यहां से नजदीक भी पड़ेगा और हम लोग वहां इंजॉय भी करेंगे क्योंकि मौसम भी इस वक्त काफी अच्छा है। मैंने अपने पिताजी से कहा यह तो बहुत अच्छी बात है यदि आप गोवा का प्लान बना रहे हैं तो। हम लोग गोवा जाने की तैयारी करने लगे, मेरे पिताजी और आदर्श अंकल ने सब कुछ बुक कर लिया था, उन्होंने रहने के लिए होटल भी गोवा में बुक कर लिए थे और हम लोग ट्रेन से ही जाने वाले थे।

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मैं बहुत ही खुश थी और काफी समय बाद मैं अपने माता पिता के साथ कहीं घूमने के लिए जाने वाली थी। हम लोगों की ट्रेन सुबह के वक्त थी और हम लोग सुबह ही अपने घर से रेलवे स्टेशन के लिए निकल पड़े। जब हम लोग रेलवे स्टेशन पहुंचे तो मैं आदर्श अंकल और उनकी फैमिली से मिली, मैं पहली बार ही उनसे मिली थी और उनकी उम्र करीबन 40 वर्ष के आसपास की होगी। उनकी फैमिली से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा, उनकी फैमिली में उनकी पत्नी और उनके दो छोटे बच्चे हैं, जिनकी उम्र 12 15 वर्ष के बीच है। हम लोग ट्रेन का इंतजार कर रहे थे और जब ट्रेन आई तो हम लोग उसके बाद ट्रेन में बैठ गए, हम लोग जब ट्रेन में बैठे हुए थे तो सब लोगों को नींद आ रही थी और मुझे भी काफी नींद आ रही थी क्योंकि रात भर मैं अच्छे से सो नहीं पाई थी, उसके बाद मैं भी बहुत गहरी नींद में सो गई। जब मैं उठी तो मेरे माता-पिता, आदर्श अंकल और उनकी पत्नी आपस में बात कर रहे थे। उनके दोनों बच्चे सो रहे थे और मैं उठकर बाथरूम में चली गई, बाथरूम में मुंह धोने के बाद मैं अपने माता पिता के साथ बैठ गई। आदर्श अंकल मुझसे कहने लगे कि क्या तुम चाय पीओगी, मैंने उन्हें कहा कि हां मैं चाय पिऊंगी। उसके कुछ देर बाद हम लोगों ने चाय का आर्डर किया और हम लोग चाय पीने लगे, उस वक्त करीबन 11 बज रहे थे। हम लोगों का सफर बहुत अच्छे से कट गया और जब हम लोग गोवा पहुंचे तो वहां से हम लोगों ने होटल के लिए कार बुक कर ली फिर हम लोग होटल में ही फ्रेश होने लगे। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, मैं बहुत खुश थी। जब हम लोग फ्रेश हो गए तो उसके बाद हम लोग अपने होटल के ही थोड़ा दूर घूमने चले गये, हम लोग पैदल पैदल ही घूमने के लिए निकल गए। आदर्श अंकल मुझसे पूछने लगे की क्या तुम पहली बार गोवा आयी हो, मैंने कहा कि हां मैं पहली बार ही गोवा आई हूं, इससे पहले मैं कभी भी गोवा नहीं आई। उनकी पत्नी ने मुझसे पूछा कि तुम्हें यहां आकर कैसा लग रहा है, मैंने कहा कि मुझे तो बहुत अच्छा लग रहा है क्योंकि काफी समय से हम लोग भी कहीं घूमने नहीं गए थे।

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