बहन को दो वॉचमैन से एक साथ चुदते पकड़ा

मैं आज फिर से अपनी बहन को देखा. वाचमेन ने उसके लिए गेट खोला और वो दोनों खड़े हुए कुछ बातें करने लगे. मेरे एक दोस्त ने मुझे कहा था की तेरी बहन मानसी का चक्कर लगता हे वाचमेन के साथ. मैंने तब दोस्त के साथ झगड़ा सा कर लिया था. लेकिन उस दिन से मैं अपनी बहन के पीछे पड़ा था और उसकी वाच रख रहा था. मानसी 26 साल की हे और अपनी पीटीसी करने के बाद वो एक प्राइमरी स्कुल में पढ़ाती हे. पापा ने उसे जॉब प् आने जाने के लिए स्कूटी ला दी हे उसके ऊपर ही वो घुमती रहती हे. मानसी हम तिन भाई बहनों में सब से बड़ी हे और घर में बहुत फ्रीडम हे उसे. माँ तो कभी कुछ कहती ही नहीं. पापा भी नहीं कहते हे उसे. वाचमेन का नाम शंकर हे और वो एक युपी का बन्दा हे. उसकी एज 30 साल के करीब हे और वो सोसायटी के गेट पर दिनभर पहरा देता हे और रात को सोसायटी के कौने में एक टेम्पररी मकान में रहता हे. वो दिखने में हट्टा कट्टा हे और डेली मोर्निंग में वो दौड़ लगाता हे और डेढ़ दो घंटे तक अपने बदन को कसने के लिए वर्जिश करता हे. वाचमेन से बात कर के मेरी बहन घर पर आ गई. मैं भी आगे आ गया.

मानसी वहां से नहाने के लिए चली गई. और मैं भी अपने काम में लग गया. वो दोनों के बिच में कुछ तो बात हुई थी. और मानसी भी हंस हंस के कुछ कह रही थी उसे. शंकर की ड्यूटी ख़त्म हुई शाम को. और मैं छत पर बैठे हुए अपने मोबाइल पर फनी वीडियो देख रहा था. मैंने देखा की वो हमारे घर की तरफ देख रहा था. उसने वर्दी की ऊपर की जेब से फोन निकाला. दूसरा सिक्यूरिटी वाला हट में घुसा और शंकर ने अपने मोबाइल को बहार निकाल के किसी को मिस कॉल दी. मेरे दिल की धडकन तेज तेज चलने लगी. मैं समझ गया की ये साला मेरी बहन को ही मिस कॉल कर रहा होगा. मैं चुपके से निचे उतरा. मानसी निचे हॉल में थी. मैं उसके आगे घर से निकल गया ताकि उसको शक ना हो. सोसायटी से बहार निकल के मैं एक ट्रक के पीछे अपनी बाइक को पार्क कर के छिप गया.

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कुछ देर में शंकर कपडे चेंज कर के वहां आया. और वो पैदल ही आगे जाने लगा. मुझे लगा की शायद मुझे गलतफहमी हुई थी. मैंने सोचा की दो मिनिट और रुक जाता हूँ.और तभी मेरी बहन के एक्टिवा की हॉर्न सुनाई पड़ी. मानसी अपने चहरे के ऊपर दुपट्टे से मुहं को छिपा के निकली. और मैंने भी अपनी बाइक को चालु कर के उसके पीछे लगा दी इतने फासले पर की उसे शक ना हो. वो चली और शंकर एक साइड में खड़ा हुआ था. शंकर मेरी बहन के पीछे बैठ गया और मानसी ने अब तेजी से एक्टिवा को भगाई. मेरी भी यामाहा गाडी थी! मैं उसके पीछे ही था. 10-12 सोसायटी के बाद मानसी ने गाडी एक कच्ची रोड पर ले ली. वहां पर एक बिल्डिंग बन रहा था उसके बहार उसने गाडी को रोकी. मैं दूर ही पार्क कर दी अपनी बाइक को. फिर मैंने देखा की मानसी और शंकर दोनों हाथ पकड के किसी तीसरे आदमी से मिले. शायद वो उस बिल्डिंग का वाचमेन था.

मानसी उन दोनों को ले के इस अधूरी बिल्डिंग में चढ़ी. मैं भी पीछे चुपके से चला गया. मानसी को ले के वो दोनों वाचमेन ऊपर एक कमरे में गए. वो कमरा कोंक्रिट वाल का स्ट्रक्चर था अभी तो जिसमे कोई खिडकी दरवाजे नहीं थे. खिड़की के पास आड़ के लिए इंटे रखी हुई थी. मैं दबे पाँव ऊपर आया और इंटों के बिच की गेप से अन्दर देखा. बाप रे मानसी तो आलरेडी अपने घुटनों के ऊपर थी और उसके दोनों हाथ में एक एक लंड था. वो शंकर के और उसके इस दोस्त के लंड को हिला रही थी.

शंकर: अर्जुन मैंने मानसी को सुबह ही कहा था की तेरी साईट पर दो दिन के लिए काम बंद हे.

अर्जुन: हां यार अच्छा किया वैसे भी मेडम को चोदे हुए काफी दिन हो गए हे. मैं तो रोज इनके नाम की मुठ मारता हूँ.

मानसी: अरे मैं होटल्स में नहीं जा सकती ना वरना मैं तो रोज इन लंड के लिए अपने नाड़े को खोल देती.

अर्जुन ने अब मेरी बहन के माथे को पकड़ा और उसे अपने लंड की तरफ किया. मानसी ने मुहं को खोल के उसके लंड को मुहं में ले लिया और सक करने लगी. शंकर के लोडे को तब वो अपने हाथ में पकड़ के हिला रही थी. दोनों वाचमेन के लंड काले और 7 इंच जितने थे. अर्जुन का लंड शंकर से थोडा मोटा था. मेरी बहन इन दोनों टपोरी जैसे वाचमेन के लंड को ऐसे भोग रही थी जैसे ये दुनिया के दो आखरी लंड थे जिसे वो प्यार दे रही थी.अर्जुन ने मानसी के माथे को पकड़ा और बाल को उँगलियों में ले के वो अब जोर से मानसी के माउथ को चोदने लगा. मानसी के गले तक लंड को भर के वो ठोक रहा था. और मानसी भी अग्ग्गग्ग्ग्ग अग्ग्ग्गग्ग्ग्ग अग्ग्गग्ग्ग ग्गग्ग्ग का साउंड से लंड को गले तक डलवा रही थी. और शंकर के लोडे को वो हिला रही थी. अर्जुन की आँखे बंद हो गई थी इस मस्त माउथ फकिंग की वजह से. शायद मानसी ने लंड के ऊपर अपने होंठो से इतनी मस्त ग्रिप बनाई थी की उसको खूब आनंद आ रहा था.

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